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Noida News: 1200 करोड़ से अधिक के ऑर्डर अटके, बढ़ेगी बेरोजगार
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टैरिफ बढ़ने से 1200 करोड़ से अधिक के ऑर्डर अटके
- जिले के औद्योगिक इकाइयों में तैयार है माल, अमेरिकी कंपनियों ने रोके ऑर्डर, नए प्राइस टैग से उत्पाद होंगे महंगे
- उद्यमियों ने कहा एक माह में नहीं हुआ समाधान तो कामगारों की जाएगी नौकरी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अमेरिकी सरकार की ओर से लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के उद्यमियों और निर्यातकों की परेशानी बढ़ा दी है। जिले के उद्यमियों के 1200 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर अटक गए हैं। अमेरिका की कंपनियों ने ऑर्डर रोक दिए हैं। अब अगर माल भेजना है तो उद्यमियों को नया प्राइस टैग लगाकर भेजना होगा। उद्यमियों ने कहा कि ऐसा हुआ तो अमेरिका में उनके सामान महंगे हो जाएंगे। जिसे कोई नहीं खरीदेगा। एक माह के अंदर इस समस्या का समाधान नहीं निकला तो कामगारों को मजबूरन नौकरी से निकालना पड़ेगा। इससे बेरोजगारी बढ़ेगी।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ कारोबार में टैरिफ को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया। बुधवार को टैरिफ लागू कर दिया गया है। टैरिफ लागू होने के बाद उद्यमी और कारोबारी परेशान हैं। उनका कहना है कि यहां से सबसे अधिक टेक्सटाइल्स, रेडिमेड वस्त्र, हैंडीक्राफ्ट्स का निर्यात होता है। हर वर्ष बड़ी मात्रा में ऑर्डर मिलते है। कंपनियां ऑर्डर के मुताबिक उत्पादन में जुटी थी। काफी ऑर्डर तैयार हो चुका है। अब टैरिफ बढ़ने के साथ ही ऑर्डर भी अटक गए हैं।
औद्योगिक सेक्टर ईपीआईपी के उद्यमियों के मुताबिक उनका 500 करोड़ का माल अटक गया है। यहां से सबसे अधिक गारमेंट और हैंडीक्रॉफ्ट का निर्यात किया जाता है। वहीं ग्रेटर नोएडा के अन्य सेक्टरों को मिलाकर 1000 करोड़ से अधिक का ऑर्डर अटक गया है। उद्यमियों का कहना है कि 10 से 15 प्रतिशत तक वो छूट दे सकते है, लेकिन उससे ज्यादा संभव नहीं है। अमेरिका की कंपनियों से तैयार माल को निर्यात करवाने का आग्रह किया जा रहा है।
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वहीं नोएडा में भी 200 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है। माल कपंनियों में तैयार है। उद्यमी किसी तरह माल को भेजने का प्रयास कर रहे हैं। उद्यमियों ने कहा कि अगर एक माह के अंदर इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो फिर बेरोजगारी बढ़ेगी। कंपनियों में काम पूरी तरह ठप हो गया है। इस कारण कामगारों को नौकरी से निकालना पड़ेगा। उनके सामने रोजगार की समस्या खड़ी हो जाएगी।
अमेरिका जैसे नहीं है अन्य देशों के बाजार
चेंबर ऑफ एक्सपोटर्स के महासचिव विकास शर्मा ने कहा कि सरकार अमेरिका के अलावा अन्य देशों में निर्यात करने पर जोर दे रही है। जबकि यह इतना आसान नहीं है। अमेरिका की जनसंख्या करीब 40 करोड़ है। वहीं रूस की 6 करोड़ के आसपास है। साथ ही अन्य समस्याएं भी हैं। ऐसे में अमेरिका के साथ समस्या का समाधान निकालना होगा। यही व्यापार के लिए लाभदायक होगा। उन्होंने नए बाजारों तक पहुंचने के लिए मुक्त व्यापार समझौते और द्विपक्षीय समझौते कराए जाने की मांग की। जीएसटी व ड्यूटी ड्रॉ बैक में सरलीकरण कर निर्यातकों की नकदी प्रवाह की समस्या कम करने की मांग की।
अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने से नोएडा में टेक्सटाइल कारोबार पूरी तरह से ठप हो गया है। कंपनियों में माल तैयार है, लेकिन वो निर्यात नहीं हो रहा है। अगर यहीं हाल रहा तो उद्योग बुरी तरह प्रभावित होगा। अन्य सेक्टर भी प्रभावित है। इसका समाधान नहीं दिख रहा है। सरकार को जल्द से जल्द जरूरी कदम उठाने होंगे।
नवीन गुप्ता, अध्यक्ष आईआईए नोएडा चैप्टर
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- जिले के औद्योगिक इकाइयों में तैयार है माल, अमेरिकी कंपनियों ने रोके ऑर्डर, नए प्राइस टैग से उत्पाद होंगे महंगे
- उद्यमियों ने कहा एक माह में नहीं हुआ समाधान तो कामगारों की जाएगी नौकरी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अमेरिकी सरकार की ओर से लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के उद्यमियों और निर्यातकों की परेशानी बढ़ा दी है। जिले के उद्यमियों के 1200 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर अटक गए हैं। अमेरिका की कंपनियों ने ऑर्डर रोक दिए हैं। अब अगर माल भेजना है तो उद्यमियों को नया प्राइस टैग लगाकर भेजना होगा। उद्यमियों ने कहा कि ऐसा हुआ तो अमेरिका में उनके सामान महंगे हो जाएंगे। जिसे कोई नहीं खरीदेगा। एक माह के अंदर इस समस्या का समाधान नहीं निकला तो कामगारों को मजबूरन नौकरी से निकालना पड़ेगा। इससे बेरोजगारी बढ़ेगी।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ कारोबार में टैरिफ को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया। बुधवार को टैरिफ लागू कर दिया गया है। टैरिफ लागू होने के बाद उद्यमी और कारोबारी परेशान हैं। उनका कहना है कि यहां से सबसे अधिक टेक्सटाइल्स, रेडिमेड वस्त्र, हैंडीक्राफ्ट्स का निर्यात होता है। हर वर्ष बड़ी मात्रा में ऑर्डर मिलते है। कंपनियां ऑर्डर के मुताबिक उत्पादन में जुटी थी। काफी ऑर्डर तैयार हो चुका है। अब टैरिफ बढ़ने के साथ ही ऑर्डर भी अटक गए हैं।
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औद्योगिक सेक्टर ईपीआईपी के उद्यमियों के मुताबिक उनका 500 करोड़ का माल अटक गया है। यहां से सबसे अधिक गारमेंट और हैंडीक्रॉफ्ट का निर्यात किया जाता है। वहीं ग्रेटर नोएडा के अन्य सेक्टरों को मिलाकर 1000 करोड़ से अधिक का ऑर्डर अटक गया है। उद्यमियों का कहना है कि 10 से 15 प्रतिशत तक वो छूट दे सकते है, लेकिन उससे ज्यादा संभव नहीं है। अमेरिका की कंपनियों से तैयार माल को निर्यात करवाने का आग्रह किया जा रहा है।
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वहीं नोएडा में भी 200 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है। माल कपंनियों में तैयार है। उद्यमी किसी तरह माल को भेजने का प्रयास कर रहे हैं। उद्यमियों ने कहा कि अगर एक माह के अंदर इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो फिर बेरोजगारी बढ़ेगी। कंपनियों में काम पूरी तरह ठप हो गया है। इस कारण कामगारों को नौकरी से निकालना पड़ेगा। उनके सामने रोजगार की समस्या खड़ी हो जाएगी।
अमेरिका जैसे नहीं है अन्य देशों के बाजार
चेंबर ऑफ एक्सपोटर्स के महासचिव विकास शर्मा ने कहा कि सरकार अमेरिका के अलावा अन्य देशों में निर्यात करने पर जोर दे रही है। जबकि यह इतना आसान नहीं है। अमेरिका की जनसंख्या करीब 40 करोड़ है। वहीं रूस की 6 करोड़ के आसपास है। साथ ही अन्य समस्याएं भी हैं। ऐसे में अमेरिका के साथ समस्या का समाधान निकालना होगा। यही व्यापार के लिए लाभदायक होगा। उन्होंने नए बाजारों तक पहुंचने के लिए मुक्त व्यापार समझौते और द्विपक्षीय समझौते कराए जाने की मांग की। जीएसटी व ड्यूटी ड्रॉ बैक में सरलीकरण कर निर्यातकों की नकदी प्रवाह की समस्या कम करने की मांग की।
अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने से नोएडा में टेक्सटाइल कारोबार पूरी तरह से ठप हो गया है। कंपनियों में माल तैयार है, लेकिन वो निर्यात नहीं हो रहा है। अगर यहीं हाल रहा तो उद्योग बुरी तरह प्रभावित होगा। अन्य सेक्टर भी प्रभावित है। इसका समाधान नहीं दिख रहा है। सरकार को जल्द से जल्द जरूरी कदम उठाने होंगे।
नवीन गुप्ता, अध्यक्ष आईआईए नोएडा चैप्टर