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2023 तक नोएडा एयरपोर्ट पर शुरू हो एक-दो रनवे
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नोएडा। लोकसभा में वर्ष 2022-23 के नागर विमानन संबंधित अनुदानों की मांगों पर चर्चा के दौरान गौतमबुद्ध नगर के सांसद व पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दिल्ली एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। उतरने के लिए आधे से एक घंटे तक विमान आकाश में ही चक्कर लगाते रहते हैं। कई बार तो लोगों की प्लाइट तक मिस हो जाती है। ऐसे में नोएडा एयरपोर्ट के लिए नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मांग करता हूं कि इस एयरपोर्ट पर दिसंबर 2023 तक कम से कम दो या एक हवाई पट्टी को शुरू कर दिया जाए।
उन्होंने कहा कि दिल्ली से मात्र 70 किलोमीटर दूर बन रहे नोएडा एयरपोर्ट से निश्चित ही दिल्ली के एयर ट्रैफिक को काफी राहत मिलेगी। दिल्ली एयरपोर्ट से नोएडा एयरपोर्ट के बीच मोनो रेल के निर्माण कार्य को भी तीव्र गति दी जाए। जेवर में प्रदेश का ही नहीं, बल्कि देश का सबसे बड़ा 6 हवाई पट्टी वाला एयरपोर्ट बनने जा रहा है। नोएडा एयरपोर्ट से मथुरा, वृंदावन और आगरा जैसे विश्व प्रसिद्ध धार्मिक व ऐतिहासिक पर्यटन स्थल हवाई सेवा से सीधे जुड़ जाएंगे। हवाई यातायात के लिए एक अहम केंद्र होने के बावजूद हमारे देश के जहाज मरम्मत के लिए विदेशों पर निर्भर थे।
देश में लगभग 10 हजार करोड़ से अधिक का मेंटेनेंस बिजनेस है, जिसका 90 प्रतिशत से अधिक भाग विदेशों को चला जाता है। अब इस पर विशेष ध्यान देते हुए भारत को इसका हब बनाने के लिए नागर विमानन नीति में विशेष प्रावधान किए हैं। आने वाले समय में भारत न केवल अपने विमानों की मेंटेनेंस करेगा, बल्कि विदेशी विमानों को भी सेवा देगा।
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उन्होंने कहा कि दिल्ली से मात्र 70 किलोमीटर दूर बन रहे नोएडा एयरपोर्ट से निश्चित ही दिल्ली के एयर ट्रैफिक को काफी राहत मिलेगी। दिल्ली एयरपोर्ट से नोएडा एयरपोर्ट के बीच मोनो रेल के निर्माण कार्य को भी तीव्र गति दी जाए। जेवर में प्रदेश का ही नहीं, बल्कि देश का सबसे बड़ा 6 हवाई पट्टी वाला एयरपोर्ट बनने जा रहा है। नोएडा एयरपोर्ट से मथुरा, वृंदावन और आगरा जैसे विश्व प्रसिद्ध धार्मिक व ऐतिहासिक पर्यटन स्थल हवाई सेवा से सीधे जुड़ जाएंगे। हवाई यातायात के लिए एक अहम केंद्र होने के बावजूद हमारे देश के जहाज मरम्मत के लिए विदेशों पर निर्भर थे।
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देश में लगभग 10 हजार करोड़ से अधिक का मेंटेनेंस बिजनेस है, जिसका 90 प्रतिशत से अधिक भाग विदेशों को चला जाता है। अब इस पर विशेष ध्यान देते हुए भारत को इसका हब बनाने के लिए नागर विमानन नीति में विशेष प्रावधान किए हैं। आने वाले समय में भारत न केवल अपने विमानों की मेंटेनेंस करेगा, बल्कि विदेशी विमानों को भी सेवा देगा।
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