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Noida News: अब मैनेजमेंट और कंप्यूटर एप्लीकेशन में बढ़ेगी बेटियों की भागीदारी
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I-बीबीए, बीसीए, बीएमएस प्रोग्राम की आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की मेधावी छात्राओं को स्कॉलरशिप देगा एआईसीटीईI
II
I-अब तक इंजीनियरिंग में छात्राओं को आगे बढ़ाने के मकसद से तकनीकी कॉलेज प्रगति योजना में दे रहे थे छात्रवृत्ति I
Iसीमा शर्माI
Iनई दिल्ली। IIइंजीनियरिंग के बाद अब मैनेजमेंट और कंप्यूटर एप्लीकेशन के क्षेत्र में भी बेटियों की भागीदारी बढ़ेगी। तकनीकी कॉलेजों में अब इन क्षेत्रों में बेटियों की संख्या बढ़ाने के लिए आगामी शैक्षणिक सत्र 2024 से विशेष स्काॅलरशिप योजना शुरू की जा रही है। बीबीए, बीसीए और बीएमएस प्रोग्राम की मेधावी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की छात्राओं को स्काॅलरशिप के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। इस योजना पर करीब 7.5 करोड़ रुपये सालाना खर्च होंगे। I
Iएआईसीटीई के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंजीनियरिंग में अतिरिक्त सीट और स्कॉलरशिप के कारण बेटियों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। इसी कारण अब प्रबंधन और कंप्यूटर एप्लीकेशन के क्षेत्र में बेटियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर होगा। बेटियों को इन क्षेत्रों में उच्च शिक्षा से जोड़े रखने के लिए स्कॉलरशिप सबसे बेहतर माध्यम है। इसीलिए आगामी शैक्षणिक सत्र 2024-25 से बीबीए, बीसीए और बीएमएस की छात्राओं को यह नई स्कॉलरशिप मिलेगी। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की 3000 से अधिक मेधावी छात्राओं को स्कॉलरशिप मिलेगी। इसमें उन्हें सालाना 25 हजार रुपये दिए जाएंगे। इस स्कॉलरशिप योजना का मकसद तकनीकी और प्रबंधन शिक्षा में बेटियों की क्षमता को निखारना है। अभी तक इंजीनियरिंग क्षेत्र में बेटियों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रगति योजना में स्कॉलरशिप दी जाती है। इसमें 50 हजार रुपये सालाना स्कॉलरशिप दी जाती है।I
I-- -I
Iपहली बार एआईसीटीई दे रहा मान्यता:I
Iदरअसल, एआईसीटीई पहली बार आगामी सत्र से बीबीए, बीसीए और बीएमएस प्रोग्राम को पढ़ाने की मंजूरी दे रहा है। अभी तक यह तीनों प्रोग्राम को पढ़ाने की मंजूरी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मिलती थी। इसीलिए एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त कॉलेजों की छात्राओं को इस स्कॉलरशिप का लाभ मिलेगा। I
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I-- -- -- I
Iबेटियों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी I
Iइंजीनियरिंग के क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं के कारण बेटियों की संख्या में लगातार सुधार हो रहा है। वर्ष 2019 में बेटियों की संख्या 29 फीसदी थी। 2020 में 30 फीसदी और 2021 में यह आंकड़ा 36 फीसदी तक पहुंच गया। पिछले दो वर्षों में बेटियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। वर्ष 2022 में इंजीनियरिंग डिप्लोमा में 29 फीसदी और इंजीनियरिंग यूजी इंजीनियरिंग प्रोग्राम में 40 फीसदी पहुंच गया है। I
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I-अब तक इंजीनियरिंग में छात्राओं को आगे बढ़ाने के मकसद से तकनीकी कॉलेज प्रगति योजना में दे रहे थे छात्रवृत्ति I
Iसीमा शर्माI
Iनई दिल्ली। IIइंजीनियरिंग के बाद अब मैनेजमेंट और कंप्यूटर एप्लीकेशन के क्षेत्र में भी बेटियों की भागीदारी बढ़ेगी। तकनीकी कॉलेजों में अब इन क्षेत्रों में बेटियों की संख्या बढ़ाने के लिए आगामी शैक्षणिक सत्र 2024 से विशेष स्काॅलरशिप योजना शुरू की जा रही है। बीबीए, बीसीए और बीएमएस प्रोग्राम की मेधावी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की छात्राओं को स्काॅलरशिप के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। इस योजना पर करीब 7.5 करोड़ रुपये सालाना खर्च होंगे। I
Iएआईसीटीई के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंजीनियरिंग में अतिरिक्त सीट और स्कॉलरशिप के कारण बेटियों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। इसी कारण अब प्रबंधन और कंप्यूटर एप्लीकेशन के क्षेत्र में बेटियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर होगा। बेटियों को इन क्षेत्रों में उच्च शिक्षा से जोड़े रखने के लिए स्कॉलरशिप सबसे बेहतर माध्यम है। इसीलिए आगामी शैक्षणिक सत्र 2024-25 से बीबीए, बीसीए और बीएमएस की छात्राओं को यह नई स्कॉलरशिप मिलेगी। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की 3000 से अधिक मेधावी छात्राओं को स्कॉलरशिप मिलेगी। इसमें उन्हें सालाना 25 हजार रुपये दिए जाएंगे। इस स्कॉलरशिप योजना का मकसद तकनीकी और प्रबंधन शिक्षा में बेटियों की क्षमता को निखारना है। अभी तक इंजीनियरिंग क्षेत्र में बेटियों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रगति योजना में स्कॉलरशिप दी जाती है। इसमें 50 हजार रुपये सालाना स्कॉलरशिप दी जाती है।I
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Iपहली बार एआईसीटीई दे रहा मान्यता:I
Iदरअसल, एआईसीटीई पहली बार आगामी सत्र से बीबीए, बीसीए और बीएमएस प्रोग्राम को पढ़ाने की मंजूरी दे रहा है। अभी तक यह तीनों प्रोग्राम को पढ़ाने की मंजूरी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मिलती थी। इसीलिए एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त कॉलेजों की छात्राओं को इस स्कॉलरशिप का लाभ मिलेगा। I
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Iबेटियों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी I
Iइंजीनियरिंग के क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं के कारण बेटियों की संख्या में लगातार सुधार हो रहा है। वर्ष 2019 में बेटियों की संख्या 29 फीसदी थी। 2020 में 30 फीसदी और 2021 में यह आंकड़ा 36 फीसदी तक पहुंच गया। पिछले दो वर्षों में बेटियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। वर्ष 2022 में इंजीनियरिंग डिप्लोमा में 29 फीसदी और इंजीनियरिंग यूजी इंजीनियरिंग प्रोग्राम में 40 फीसदी पहुंच गया है। I