फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Now on the lines of cabs booking of drones will be done through the app

Noida News: अब कैब की तर्ज पर एप से होगी ड्रोन की बुकिंग

Wed, 08 Feb 2023 08:38 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 08 Feb 2023 08:38 PM IST
विज्ञापन
Now on the lines of cabs booking of drones will be done through the app
सेवा मुहैया कराने वाली कंपनियां करवा रही एप तैयार
विज्ञापन

किसानों को होगी सहूलियत, जरूरत के हिसाब से कर सकेंगे इस्तेमाल
उद्यमियों की राय, देश में बढ़ रहा ड्रोन का इस्तेमाल
सर्वेश कुमार

नई दिल्ली। कैब की तर्ज पर अब एप के जरिये किसान ड्रोन का इस्तेमाल कर सकते हैं। ड्रोन की सेवा मुहैया कराने वाली कंपनियां इसके लिए एप तैयार करवा रही हैं। इससे वह छोटे व सीमांत किसानों को मांग के अनुरूप ड्रोन किराये पर ले सकेंगे। बुकिंग के बाद ड्रोन संबंधित लोकेशन पर भेजा जाएगा। किसानों को ड्रोन के इस्तेमाल के एवज में प्रति एकड़ की दर से किराया चुकाना होगा। इससे देश के लाखों सीमांत, छोटे और मध्यम दर्जे के उन किसानों को फायदा होगा जिनकी वित्तीय सेहत ड्रोन खरीदने लायक नहीं है।
देश में कृषि क्षेत्र के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल बढ़ चढ़कर हो रहा है। इससे देखते हुए कंपनियों ने भी एप के जरिये किराये पर ड्रोन देने की शुरुआत की। इससे कम रकबे में भी फसलों की अधिक पैदावार हो रही है। फिलहाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, पंजाब समेत मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी एप के जरिये ड्रोन किराये पर लेने की सुविधा है।
विज्ञापन


खेतों में किसान एप के जरिये कई राज्यों में ड्रोन की बुकिंग की जा रही है। इससे खासकर कम आय वाले किसानों को अधिक फायदा है। खेती में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए अगर उनके पास राशि नहीं है तो कैब की तरह किराये पर ड्रोन का इस्तेमाल की सुविधा है। अगर बागानों में छिड़काव करना हो या फसलों की ऊंचाई अधिक हो तो उसके हिसााब से ही किराया लिया जाता है। अलग अलग फसल के लिए प्रति एकड़ किराया औसतन 500-900 रुपये के बीच है।
विज्ञापन
विज्ञापन


देश भर में गांवों की जमीन डिजिटल मैपिंग के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे हर गांव में खेती के लिए जमीन और किसानों के पास जमीन की उपलब्धता के बारे में जानकारी उपलब्ध होगी। इससे खेतों में फसलें पैदा करने के लिए अलग अलग विश्लेषण कर पैदावार को बढ़ा सकेंगे।

-------------

95 फीसदी तक पानी की बचत

खेती में ड्रोन के इस्तेमाल से पानी की 95 फीसदी तक बचत होती है। इसके जरिये खेतों में प्रति एकड़ 10 लीटर पानी के घोल (उर्वरक या कीटनशाक) का छिड़काव किया जा सकता है। अगर परंपरागत तरीके से छिड़काव किया जाए तो इसके लिए 200 लीटर पानी की जरूरत होती है। यानी करीब 95 फीसदी पानी की बचत भी ड्रोन के जरिये की जा सकती है। अगर एक एकड़ खेत में छिड़काव के लिए श्रमिक को ढाई घंटे का वक्त लगता है तो ड्रोन महज सात मिनट में इसे पूरा कर देगा। यह खासकर उन राज्यों के अधिक फायदेमंद हैं जहां पानी की किल्लत है।

--------

फसलों पर किसानों का बढ़ सकता है 32 फीसदी तक मुनाफा

आयोटेकवर्ल्ड एविगेशन के संस्थापक निदेशक अनूप कुमार उपाध्याय ने बताया कि किसानों की सहूलियत के लिए एग्रीमेंट की शुरुआत की गई। इससे उन किसानों को अधिक फायदा होगा, जिनके पास ड्रोन खरीदने के लिए पर्याप्त राशि नहीं है। नई तकनीक का खेती में इस्तेमाल करने से किसानों को अलग अलग फसल पर 30-32 फीसदी तक का अधिक फायदा होता है। वैज्ञानिक तरीके से खेती होने की वजह से कम रकबे में भी पैदावार अधिक होती है।

---------

किसानों को नहीं सताएगी सेहत की चिंता

ड्रोन से उर्वरकों या कीटनाशकों का छिड़काव करने के लिए किसानों को खेतों में अधिक देर तक खड़े रहने की जरूरत है। ड्रोन ऊपर से ही छिड़काव करता है। इससे किसान दूर खड़े रहकर भी छिड़काव कर सकते हैं। इससे किसी भी केमिकल के लगातार संपर्क में रहकर सेहत बिगड़ने की भी चिंता कम होगी। मल्टीपर्पज ड्रोन का खेती में किसान अपनी जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया जा सकते हैं।


-------

मानव अंगों को जल्द पहुंचाकर जिंदगियां बचाएगा ड्रोन

अनूप कुमार उपाध्याय का कहना है कि कृषि, रक्षा, पुलिस, लॉजिस्टक, लास्ट माइल डिलीवरी सहित जल्द ही ड्रोन का इस्तेमाल अंगों के प्रत्यारोपण के लिए भी किया जाएगा। इससे कम वक्त में जरूरतमंद तक जरूरी अंगों को पहुंचाया जा सकेगा। ट्रायल के बाद 30-50 किलोमीटर के दायरे में अंगदाता सेे प्राप्त करने वालों तक अंगों को पहुंचाकर मरीज की जान बचाई जा सकती है। शहरी क्षेत्रों में कई बार सड़कों पर वाहनों का जाम लगने की वजह से अंगों को पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाए जाते हैं। लेकिन ड्रोन का ऑर्गन डोनेशन के लिए होने वाले इस्तेमाल से हर साल कई लोगों की जान बचाई जा सकेंगी। अंगों को पहुंचाने के लिए अगर कम तापमान की जरूरत होती है तो ड्रोन में इसकी सुविधा मुहैया की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed