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Noida News: चार वर्षों से डिपो के बेड़े में नहीं शामिल हुई एक भी बस, 76 बसें घटीं

Sat, 17 Jun 2023 12:29 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jun 2023 12:29 AM IST
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Not a single bus has joined the depot's fleet for four years, 76 buses decreased
चार वर्षों से बेड़े में नहीं शामिल हुई एक भी बस, 76 बसें घटी
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-144 बसें नोएडा तो 135 बसें ग्रेटर नोएडा डिपो से हो रहीं संचालित, बसों की कमी से यात्रियों को परेशानी
माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। बीते चार वर्षों में नाेएडा और ग्रेनो डिपो के बेड़े में एक भी नई बस शामिल नहीं हुई है। बल्कि बीते दो वर्षों में 76 बसें कम हो गईं। बसों की संख्या घटने से यात्रियों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। सड़क सुरक्षा संगोष्ठी में आए परिवहन मुख्य सचिव ने नई बसों के आने आश्वासन दिया था। इसके लिए डिपो की तरफ से प्रस्ताव भी भेजा गया है। लेकिन अभी तक इस पर ध्यान नहीं दिया गया।

नोएडा और ग्रेनो डिपो में 355 में से 76 बसें निकल जाने से उनकी संख्या 279 रह गई हैं। 144 बसें नोएडा तो 135 बसें ग्रेटर नोएडा डिपो से संचालित हो रही हैं। दोनों ही डिपो से रोजाना 60 से 65 हजार यात्री सफर करते हैं। इनमें कई रूट तो ऐसे हैं जिन पर नौकरी पेशा अथवा व्यापार के सिलसिले में यात्री रोजाना आवागमन करते हैं। सिटी बसों की कमी भी नोएडा डिपो की 20 बसें पूरा कर रही हैं। ऐसे में दोनों डिपो में बसों की संख्या कम होने से यात्रियों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। दो वर्ष पहले ही जोन के लिए 100 बसों का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें 50 बसें नोएडा डिपो तथा 50 ग्रेटर नोएडा डिपो को दी जानी थी। लेकिन यह प्रस्ताव अटका हुआ है।
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कमाई में अव्वल फिर भी नहीं बढ़ाई बसों की संख्या
बीते एक वर्ष से नोएडा डिपो प्रदेश में कमाई के मामले में नंबर वन बना हुआ है। करोड़ों रुपये का राजस्व अकेले नोएडा जोन ने सरकार की झोली में डाला है। इसके बाद भी नोएडा जोन को नई बसों से दूर रखा गया है।
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डिपो में एक भी एसी बस नहीं
जिले के डिपो से एक भी एसी बस संचालित नहीं हो रही है। इसके लिए भी नोएडा जोन को कौशांबी डिपो के सहारे रहना पड़ रहा है। लग्जरी सुविधा लेने के लिए लोग या तो प्राइवेट बसों का सहारा लेते हैं या कौशांबी डिपो की बसों का इंतजार करते हैं।

पांच वर्षों से बंद पड़ी कैंटीन

डिपो में पांच वर्षों से कैंटीन भी बंद पड़ी है। कैंटीन खुलने का यात्री काफी समय से इंतजार कर रहे हैं। दरअसल, यात्रियों को बाहर के खाने पर निर्भर रहना पड़ता है। यहां तक कि डिपो के कर्मियों को भी खाना खाने के लिए काफी दूर तक जाना पड़ता है।
जल्द ही बसें डिपो को मिलने जा रही हैं। इसे लेकर प्रस्ताव भी पास हो गया है। इस माह के भीतर बसें आने का अनुमान है।
नरेश पाल सिंह, क्षेत्रीय प्रबंधक
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