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Noida News: उपभोक्ताओं का रिकॉर्ड खंगालने के बाद मिलेगी एनओसी
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उपभोक्ताओं का रिकॉर्ड खंगालने के बाद मिलेगी एनओसी
- दस साल पहले की बकाया राशि बिजली बिलों में जोड़कर भेजने का मामला
- उद्यमी संगठनों ने शासन स्तर तक पहुंचाई मामले की शिकायत
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम (पीवीवीएनएल) ने दस साल पहले की बकाया राशि को बिजली के बिलों में जोड़कर उद्यमियों को लाखों रुपये के बिल थमा दिए हैं। परेशान उद्यमियों ने यह मामला शासन स्तर तक उठाया। अब विद्युत निगम उपभोक्ताओं का रिकॉर्ड खंगालने में जुट गया है। इसके बाद उपभोक्ताओं को अनापत्ति पत्र जारी किए जाएंगे।
दरअसल, औद्यौगिक श्रेणी के कई उपभोक्ताओं कि शिकायत है कि उन्हें साल 2012-13 का बकाया बताकर लाखों रुपये के बिल भेजे गए हैं। ऐसे मामलों की संख्या सैंकड़ों में बताई जा रही है। इसकी वजह से उद्यमियों पर करोड़ों रुपये का बोझ पड़ा है। दरअसल, इनमें ऐसे बहुत से मामले हैं जिनमें फैक्ट्री बिकने के बाद नए खरीदारों को बकाया राशि का भुगतान करने के लिए कहा जा रहा है। इन उपभोक्तओं का कहना है कि हर महीने विद्युत निगम बिल भेजता रहा है और समय से भुगतान भी किया जाता रहा है। भूखंड ट्रांसफर होने के बाद अनापत्ति पत्र भी मिल चुके हैं। इस मामले में जिला प्रशासन की तरफ से विद्युत निगम को निर्देश दिए गए हैं कि जिन्हें अनापत्ति पत्र मिल चुके हैं उनसे बकाया राशि की मांग नहीं की जाए। विद्युत निगम के अधिकारियों ने बताया कि उपभोक्तओं का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। जांच कराने के बाद नए सिरे से अनापत्ति पत्र जारी किए जाएंगे।
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- दस साल पहले की बकाया राशि बिजली बिलों में जोड़कर भेजने का मामला
- उद्यमी संगठनों ने शासन स्तर तक पहुंचाई मामले की शिकायत
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम (पीवीवीएनएल) ने दस साल पहले की बकाया राशि को बिजली के बिलों में जोड़कर उद्यमियों को लाखों रुपये के बिल थमा दिए हैं। परेशान उद्यमियों ने यह मामला शासन स्तर तक उठाया। अब विद्युत निगम उपभोक्ताओं का रिकॉर्ड खंगालने में जुट गया है। इसके बाद उपभोक्ताओं को अनापत्ति पत्र जारी किए जाएंगे।
दरअसल, औद्यौगिक श्रेणी के कई उपभोक्ताओं कि शिकायत है कि उन्हें साल 2012-13 का बकाया बताकर लाखों रुपये के बिल भेजे गए हैं। ऐसे मामलों की संख्या सैंकड़ों में बताई जा रही है। इसकी वजह से उद्यमियों पर करोड़ों रुपये का बोझ पड़ा है। दरअसल, इनमें ऐसे बहुत से मामले हैं जिनमें फैक्ट्री बिकने के बाद नए खरीदारों को बकाया राशि का भुगतान करने के लिए कहा जा रहा है। इन उपभोक्तओं का कहना है कि हर महीने विद्युत निगम बिल भेजता रहा है और समय से भुगतान भी किया जाता रहा है। भूखंड ट्रांसफर होने के बाद अनापत्ति पत्र भी मिल चुके हैं। इस मामले में जिला प्रशासन की तरफ से विद्युत निगम को निर्देश दिए गए हैं कि जिन्हें अनापत्ति पत्र मिल चुके हैं उनसे बकाया राशि की मांग नहीं की जाए। विद्युत निगम के अधिकारियों ने बताया कि उपभोक्तओं का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। जांच कराने के बाद नए सिरे से अनापत्ति पत्र जारी किए जाएंगे।
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