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थरूर के खिलाफ कोई स्पष्ट आरोप नहीं, पर्याप्त साक्ष्य नहीं: कोर्ट

Fri, 20 Aug 2021 12:06 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 20 Aug 2021 12:06 AM IST
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no specific allegation against Tharoor says Court while discharging him
नई दिल्ली। बिना स्पष्ट आरोप और पर्याप्त सामग्री के बगैर आरोपी को मुकदमे की बेसिरपैर की बातों का सामना करने के लिए विवश नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह बात वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शशि थरूर को पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत मामले में आरोपमुक्त करते हुए कही।
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राउज एवेन्यू अदालत की विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने कहा कि ये दिखाने के लिए कोई कुछ नहीं है कि शशि थरूर ने मृत्यु पूर्व अपनी पत्नी सुनंदा पुष्कर पर शारीरिक रूप से क्रूरता की थी। अदालत ने बुधवार को पारित अपने विस्तृत फैसले में ये बात कही। सुनंदा पुष्कर 17 जनवरी 2014 को राजधानी के एक पांच सितारा होटल के कमरे में मृत पाई गई थीं।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में ये नहीं कहा जा सकता कि आरोपी की ऐसी मंशा थी या उसने ऐसा कोई कृत्य किया जो सुनंदा पुष्कर को आत्महत्या करने के लिए विवश करता। विशेष न्यायाधीश ने इस पर गौर किया कि आरोपी पर दहेज मांगने या प्रताड़ित करने का भी आरोप नहीं है। इसके अलावा ऐसा भी कुछ नहीं है जिससे लगे आरोपी ने मृतका पर क्रूरता की थी।
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उन्होंने कहा कि अगर अभियोजन की इस बात पर भी भरोसा किया जाए कि आरोपी के पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के साथ कथित विवाहेतर संबंध थे जिसकी वजह से मृतका दुखी, मानसिक रूप से विचलित, परेशान थी, तो भी अन्य साक्ष्यों के अभाव में ये नहीं कहा जा सकता कि उसके साथ मानसिक क्रूरता हुई।
अदालत ने अभियोजन के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि थरूर ने आश्वासन देने के बावजूद तरार के साथ अपने कथित संबंधों को जारी रखा, इससे जानबूझकर बहकाने और ऐसा करके मृतका को उकसाने की बात जाहिर होती है।
विशेष न्यायाधीश गोयल ने कहा कि अभियोजन के अनुसार आरोपी ने मेहर तरार के साथ अपने कथित विवाहेतर संबंधों को छिपाने के लिए कदम उठाए। रिकार्ड पर ऐसा कुछ नहीं है कि आरोपी ने मृतका को चिढ़ाने या नाराज करने के लिए कुछ किया।
अदालत ने कहा कि आरोपी के कथित विवाहेतर संबंधों के कारण मृतका दुखी और मानसिक रूप से परेशान हो सकती थी लेकिन इससे उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनता। अदालत ने कहा कि एक मूल्यवान जिंदगी खत्म हो गई। लेकिन स्पष्ट आरोपों और पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में ये मानते हुए कि आरोपी ने उक्त अपराध किया, उसे मुकदमों की बेसिरपैर की बातों में नहीं धकेल सकते।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि केस की दलीलों, लगाए गए आरोपों और जांच में जुटाए गए साक्ष्यों पर अगर भरोसा कर स्वीकार कर भी लिया जाए तो भी इससे दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला आरोपी के खिलाफ नहीं बनता।

अदालत ने दिल्ली पुलिस के आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के बाद शशि थरूर को प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में बतौर आरोपी समन जारी किया था। दिल्ली पुलिस ने थरूर को इस मामले में गिरफ्तार नहीं किया था। - एजेंसी
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