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77 केस, 19 में गैंगस्टर, दो पर रासुका, पर जिम्मेदार अफसर नहीं हुए बेनकाब
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77 केस और दो पर रासुका, फिर भी जिम्मेदार अफसर नहीं हुए बेनकाब
ग्रेटर नोएडा। दो साल पहले शाहबेरी हादसे में 9 निर्दोषों की जान चली गई। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश के बाद पुलिस ने प्राधिकरण के अधिकारियों की शिकायत पर 77 केस दर्ज किए। इनमें 19 में गैंगस्टर लगाया और सबसे बड़े गुनहगार माने गए शाहबुद्दीन और जसबीर मान पर रासुका लगाया गया, लेकिन हकीकत यह भी है कि 1453 अवैध भवनों के निर्माण में दर्जनों बिल्डरों को शह देने वाले सरकारी नुमाइंदों पर अब तक कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में खरीदारों को लगता है कि जिम्मेदार सरकारी नुमाइंदे बच निकले तो उनका संघर्ष अधूरा रहेगा। हालांकि, खरीदारों का संघर्ष अभी जारी है, वह रोजाना विभिन्न माध्यमों से इस प्रकरण की शिकायत करते हैं।
खरीदारों का कहना है कि ग्रेनो प्राधिकरण क्षेत्र में फुटपाथ पर अतिक्रमण करने वालों का भी सामान जब्त करने की कार्रवाई अधिकारियों द्वारा की जाती है। शाहबेरी में अवैध निर्माण में लगभग चार साल लगे। इस दौरान अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिस, प्राधिकरण और प्रशासन आदि विभागों के अधिकारी चुप्पी साधे रहे। बैंक वाले भी बिल्डरों के इशारे पर इसके लिए ऋण देते गए। हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवैध निर्माण के दौरान विभिन्न विभागों में तैनात रहे जिम्मेदार अधिकारियों की सूची शासन को भेजने की बात कही थी। स्थानीय अधिकारियों ने पुलिस, प्राधिकरण आदि के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची मंडलायुक्त को भेजने की बात की थी, लेकिन अब तक इन पर कार्रवाई नहीं हुई है।
शत्रु-धार्मिक संस्थानों की भूमि की भी हुई खरीद-फरोख्त
देश में नियमानुसार शत्रु भूमि को खरीदा और बेचा नहीं जा सकता। यह वह भूमि है, जो देश के बंटवारे के दौरान पाकिस्तान गए लोगों की थी। इस पर सरकार का अधिकार होता है। खरीदारों के मुताबिक, शाहबेरी में लगभग 2.3190 हेक्टेअर शत्रु और 28.737 हेक्टेअर धार्मिक संस्थानों की भूमि की न केवल खरीद-फरोख्त की गई बल्कि इनकी रजिस्ट्री और इन पर ऋण भी दिए गए।
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बैंकों को भेजे नोटिस, फिर आरबीआई को रिपोर्ट
अवैध निर्माण पर करोड़ों के ऋण देने के संबंध में पुलिस ने नोटिस भेजे, लेकिन बैंक अधिकारियों की ओर से इसका जवाब दिया गया कि लीगल रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने ऋण दिया। सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने आरबीआई को अवैध भवन पर ऋण के मामले की रिपोर्ट भेजी है।
सीबीआई जांच से ही मिलेगा न्याय
खरीदार सचिन राघव ने बताया कि वर्ष 2016 से अधिकारियों के गठजोड़ से अवैध निर्माण का खेल शुरू हुआ। वह और अन्य खरीदार निष्पक्ष जांच और सभी दोषियों पर कार्रवाई के लिए हजारों शिकायतें कर चुके हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। दोषी अफसर व बैंक कर्मियों पर शिकंजा नहीं कसा गया। 60 खरीदारों ने बैंक किस्त रोक दी है, तो उन्हें धमकी मिल रही है। उन्हें निचली एजेंसियों से पूर्ण जांच की उम्मीद नहीं है। इसलिए इस केस की जांच सीबीआई को सौंपनी चाहिए।
शाहबेरी में पुलिस कार्रवाई कर रही है। 77 केस दर्ज किए गए हैं। 19 केस में गैंगस्टर और दो बिल्डरों पर रासुका लगाई गई है। इसके अलावा 32 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है। अधिकांश केस में चार्जशीट लगाई गई है। अन्य बिल्डरों की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई शीघ्र शुरू की जाएगी। सूची तैयार की जा रही है।
- राजीव कुमार सिंह, एसीपी
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ग्रेटर नोएडा। दो साल पहले शाहबेरी हादसे में 9 निर्दोषों की जान चली गई। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश के बाद पुलिस ने प्राधिकरण के अधिकारियों की शिकायत पर 77 केस दर्ज किए। इनमें 19 में गैंगस्टर लगाया और सबसे बड़े गुनहगार माने गए शाहबुद्दीन और जसबीर मान पर रासुका लगाया गया, लेकिन हकीकत यह भी है कि 1453 अवैध भवनों के निर्माण में दर्जनों बिल्डरों को शह देने वाले सरकारी नुमाइंदों पर अब तक कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में खरीदारों को लगता है कि जिम्मेदार सरकारी नुमाइंदे बच निकले तो उनका संघर्ष अधूरा रहेगा। हालांकि, खरीदारों का संघर्ष अभी जारी है, वह रोजाना विभिन्न माध्यमों से इस प्रकरण की शिकायत करते हैं।
खरीदारों का कहना है कि ग्रेनो प्राधिकरण क्षेत्र में फुटपाथ पर अतिक्रमण करने वालों का भी सामान जब्त करने की कार्रवाई अधिकारियों द्वारा की जाती है। शाहबेरी में अवैध निर्माण में लगभग चार साल लगे। इस दौरान अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिस, प्राधिकरण और प्रशासन आदि विभागों के अधिकारी चुप्पी साधे रहे। बैंक वाले भी बिल्डरों के इशारे पर इसके लिए ऋण देते गए। हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवैध निर्माण के दौरान विभिन्न विभागों में तैनात रहे जिम्मेदार अधिकारियों की सूची शासन को भेजने की बात कही थी। स्थानीय अधिकारियों ने पुलिस, प्राधिकरण आदि के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची मंडलायुक्त को भेजने की बात की थी, लेकिन अब तक इन पर कार्रवाई नहीं हुई है।
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शत्रु-धार्मिक संस्थानों की भूमि की भी हुई खरीद-फरोख्त
देश में नियमानुसार शत्रु भूमि को खरीदा और बेचा नहीं जा सकता। यह वह भूमि है, जो देश के बंटवारे के दौरान पाकिस्तान गए लोगों की थी। इस पर सरकार का अधिकार होता है। खरीदारों के मुताबिक, शाहबेरी में लगभग 2.3190 हेक्टेअर शत्रु और 28.737 हेक्टेअर धार्मिक संस्थानों की भूमि की न केवल खरीद-फरोख्त की गई बल्कि इनकी रजिस्ट्री और इन पर ऋण भी दिए गए।
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बैंकों को भेजे नोटिस, फिर आरबीआई को रिपोर्ट
अवैध निर्माण पर करोड़ों के ऋण देने के संबंध में पुलिस ने नोटिस भेजे, लेकिन बैंक अधिकारियों की ओर से इसका जवाब दिया गया कि लीगल रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने ऋण दिया। सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने आरबीआई को अवैध भवन पर ऋण के मामले की रिपोर्ट भेजी है।
सीबीआई जांच से ही मिलेगा न्याय
खरीदार सचिन राघव ने बताया कि वर्ष 2016 से अधिकारियों के गठजोड़ से अवैध निर्माण का खेल शुरू हुआ। वह और अन्य खरीदार निष्पक्ष जांच और सभी दोषियों पर कार्रवाई के लिए हजारों शिकायतें कर चुके हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। दोषी अफसर व बैंक कर्मियों पर शिकंजा नहीं कसा गया। 60 खरीदारों ने बैंक किस्त रोक दी है, तो उन्हें धमकी मिल रही है। उन्हें निचली एजेंसियों से पूर्ण जांच की उम्मीद नहीं है। इसलिए इस केस की जांच सीबीआई को सौंपनी चाहिए।
शाहबेरी में पुलिस कार्रवाई कर रही है। 77 केस दर्ज किए गए हैं। 19 केस में गैंगस्टर और दो बिल्डरों पर रासुका लगाई गई है। इसके अलावा 32 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है। अधिकांश केस में चार्जशीट लगाई गई है। अन्य बिल्डरों की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई शीघ्र शुरू की जाएगी। सूची तैयार की जा रही है।
- राजीव कुमार सिंह, एसीपी