{"_id":"62854eef1abb416466512b72","slug":"nithari-case-search-for-a-sandal-and-the-secret-of-19-murders-exposed-noida-news-noi649354816","type":"story","status":"publish","title_hn":"निठारी कांड : एक चप्पल की तलाश... और खुल गया 19 हत्याओं का राज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निठारी कांड : एक चप्पल की तलाश... और खुल गया 19 हत्याओं का राज
विज्ञापन
नोएडा (योगेश शर्मा)। करीब डेढ़ दशक पुराने नोएडा के सबसे चर्चित और खौफनाक निठारी कांड के 14वें मामले में दोषी सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को बृहस्पतिवार को सजा सुनाई जाएगी। यह मामला उस लड़की से जुड़ा है जिसकी दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। निठारी कांड का खुलासा इसी लापता लड़की की वजह से हुआ था। खुलासा करने वाला कोई और नहीं, बल्कि वही राम किशन था जिसके ढाई साल के बेटे हर्ष को सेक्टर-31 की खूनी कोठी डी-5 में मार दिया गया था।
अमर उजाला संवाददाता से बातचीत में राम किशन ने बताया कि 29 दिसंबर 2006 की रात सुरेंद्र कोली को हिरासत में लेने के बाद सीबीआई की टीम 7 मई 2006 को लापता लड़की से जुड़े सबूत तलाश रही थी। कोली की निशानदेही पर डी-5 कोठी की चहारदीवारी में पड़ी चप्पल बरामद की जानी थी। इसके लिए मुझे छलांग लगाकर अंदर जाने के लिए कहा गया। जब मैं वहां पहुंचा तो देखा कि कई सारी चप्पलें और कपड़े वहां पड़े थे। मुझे शक हुआ, लेकिन उस समय तो मैं वापस लौट आया, लेकिन देर रात फिर उन लोगों के साथ वहां पहुंचा जिनके बच्चे गायब हुए थे। अंदर काफी सारा मलबा और कबाड़ पड़ा था, जिसे हटाने पर होश उड़ा देने वाली सच्चाई सामने आई। एक के बाद एक कई कंकाल मिलते चले गए।
बल्ब लेकर लौटा तो नहीं मिला जिगर का टुकड़ा
राम किशन ने बताया कि साल 1994 से निठारी में पानी की टंकी परिसर में बने मकान में रह रहा हूं। 23 अप्रैल 2006 की शाम अचानक घर का बल्ब फ्यूज हो गया। बल्ब लेने के बाहर मार्केट जाने से पहले बेटे हर्ष को देखा तो घर पर ही था। दस मिनट बाद लौटकर आया तो बेटा दिखाई नहीं दिया। आठ महीने तक उसे तलाश, लेकिन नहीं मिला। डी-5 कोठी में नर कंकाल मिलने के बाद जब्त सामान थाने ले जाया गया था। वहां बेटे की खून से लथपथ चप्पल दिखी। पहचान चप्पल की ब्लेड से कटी बद्दी से हुई जो मैंने खुद काटी थी।
विज्ञापन
दो साल बाद आदित्य के रूप में हर्ष लौटकर आया
डेढ़ दशक पहले हर्ष के बिछड़ने का गम आज भी राम किशन और पत्नी को परेशान करके रखता है। हालांकि, हर्ष के जाने के दो साल बाद आदित्य के रूप में घर में नया मेहमान आया। दिल को चैन मिला, क्योंकि जैसा हाव-भाव और शक्ल हर्ष की थी वैसा ही आदित्य भी दिखता है। हालांकि, आदित्य अब 14 साल का हो चुका है।
कोठी बनी खंडहर, कोई खरीदने वाला भी नहीं
डी-5 कोठी अब पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुकी है। लंबी झाड़ियों और टूटे मकान की मनहूसियत ऐसी है कि राह से गुजरने वाले इस तरह देखते तक नहीं। कुछ साल पहले पंजाब के जालंधर से कुछ लोग इस कोठी को देखने के लिए आए थे, लेकिन निठारी कांड के पीड़ितों ने उन्हें दौड़ा दिया था। गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए थे। हालांकि, अब निठारी कांड का इक्का-दुक्का पीड़ित ही गांव में रह रहा है।
विज्ञापन
अमर उजाला संवाददाता से बातचीत में राम किशन ने बताया कि 29 दिसंबर 2006 की रात सुरेंद्र कोली को हिरासत में लेने के बाद सीबीआई की टीम 7 मई 2006 को लापता लड़की से जुड़े सबूत तलाश रही थी। कोली की निशानदेही पर डी-5 कोठी की चहारदीवारी में पड़ी चप्पल बरामद की जानी थी। इसके लिए मुझे छलांग लगाकर अंदर जाने के लिए कहा गया। जब मैं वहां पहुंचा तो देखा कि कई सारी चप्पलें और कपड़े वहां पड़े थे। मुझे शक हुआ, लेकिन उस समय तो मैं वापस लौट आया, लेकिन देर रात फिर उन लोगों के साथ वहां पहुंचा जिनके बच्चे गायब हुए थे। अंदर काफी सारा मलबा और कबाड़ पड़ा था, जिसे हटाने पर होश उड़ा देने वाली सच्चाई सामने आई। एक के बाद एक कई कंकाल मिलते चले गए।
विज्ञापन
बल्ब लेकर लौटा तो नहीं मिला जिगर का टुकड़ा
राम किशन ने बताया कि साल 1994 से निठारी में पानी की टंकी परिसर में बने मकान में रह रहा हूं। 23 अप्रैल 2006 की शाम अचानक घर का बल्ब फ्यूज हो गया। बल्ब लेने के बाहर मार्केट जाने से पहले बेटे हर्ष को देखा तो घर पर ही था। दस मिनट बाद लौटकर आया तो बेटा दिखाई नहीं दिया। आठ महीने तक उसे तलाश, लेकिन नहीं मिला। डी-5 कोठी में नर कंकाल मिलने के बाद जब्त सामान थाने ले जाया गया था। वहां बेटे की खून से लथपथ चप्पल दिखी। पहचान चप्पल की ब्लेड से कटी बद्दी से हुई जो मैंने खुद काटी थी।
विज्ञापन
दो साल बाद आदित्य के रूप में हर्ष लौटकर आया
डेढ़ दशक पहले हर्ष के बिछड़ने का गम आज भी राम किशन और पत्नी को परेशान करके रखता है। हालांकि, हर्ष के जाने के दो साल बाद आदित्य के रूप में घर में नया मेहमान आया। दिल को चैन मिला, क्योंकि जैसा हाव-भाव और शक्ल हर्ष की थी वैसा ही आदित्य भी दिखता है। हालांकि, आदित्य अब 14 साल का हो चुका है।
कोठी बनी खंडहर, कोई खरीदने वाला भी नहीं
डी-5 कोठी अब पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुकी है। लंबी झाड़ियों और टूटे मकान की मनहूसियत ऐसी है कि राह से गुजरने वाले इस तरह देखते तक नहीं। कुछ साल पहले पंजाब के जालंधर से कुछ लोग इस कोठी को देखने के लिए आए थे, लेकिन निठारी कांड के पीड़ितों ने उन्हें दौड़ा दिया था। गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए थे। हालांकि, अब निठारी कांड का इक्का-दुक्का पीड़ित ही गांव में रह रहा है।