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Nithari Kand: रोज 200 रुपये कमाते हैं, हमारी हैसियत कहां कि सुप्रीम कोर्ट जाएं, पीड़ित झब्बू लाल का फूटा दर्द
Wed, 18 Oct 2023 11:36 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 18 Oct 2023 11:36 AM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी नरसंहार में सीबीआई कोर्ट से फांसी की सजा पाए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को दोषमुक्त करार दिया है। कोर्ट ने कहा, पुलिस दोनों के खिलाफ आरोपी साबित करने में विफल रही।
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Nithari Case
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब कुछ नहीं कहना है। रोज पति-पत्नी मिलकर 100 से 200 रुपये कमाते हैं। कैसे जाएं सुप्रीम कोर्ट, कौन देगा खर्चा। यहां न्याय भी बहुत महंगा है। निठारी कांड के पीड़ित झब्बू लाल से जब आगे की कानूनी लड़ाई के बारे में पूछा गया तो उनका दर्द इस तरह फूट गया।
झब्बू लाल और पत्नी सुनीता बीस वर्षों से निठारी में कपड़ों पर इस्त्री करने का काम करते हैं। मोनिंदर पंढेर की कोठी डी-5 के आसपास ही इनकी दुकान लगती है और यहीं के लोग इनके ग्राहक हैं। इनकी 10 साल की बेटी ज्योति उस वक्त लापता हो गई थी और कुछ पता नहीं चला था। मंगलवार को जब झब्बू लाल और सुनीता से बातचीत की गई तो उनका गुस्सा सीबीआई पर फूट पड़ा।
दोनों ने एक स्वर से कहा कि सीबीआई ने अच्छी तरह से काम नहीं किया। हम लोग तो गरीब आदमी हैं। बेटी को न्याय दिलाने के लिए पैसों की जरूरत है। हर दिन कमाई कर सौ से दो सौ रुपये कमाते हैं और इसी में गुजारा चलता है। तो अब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में हम जैसे गरीब का कौन सुनेगा।
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झब्बू लाल कहते हैं कि पहले कोर्ट ने सुरेंद्र कोली और मोनिंदर पंढेर को दोषी बताया। अब वही कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया। अब ईश्वर पर ही भरोसा है। वह इस मामले में कहां जाएं। सुप्रीम कोर्ट जाने की हैसियत नहीं है।
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झब्बू लाल और पत्नी सुनीता बीस वर्षों से निठारी में कपड़ों पर इस्त्री करने का काम करते हैं। मोनिंदर पंढेर की कोठी डी-5 के आसपास ही इनकी दुकान लगती है और यहीं के लोग इनके ग्राहक हैं। इनकी 10 साल की बेटी ज्योति उस वक्त लापता हो गई थी और कुछ पता नहीं चला था। मंगलवार को जब झब्बू लाल और सुनीता से बातचीत की गई तो उनका गुस्सा सीबीआई पर फूट पड़ा।
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दोनों ने एक स्वर से कहा कि सीबीआई ने अच्छी तरह से काम नहीं किया। हम लोग तो गरीब आदमी हैं। बेटी को न्याय दिलाने के लिए पैसों की जरूरत है। हर दिन कमाई कर सौ से दो सौ रुपये कमाते हैं और इसी में गुजारा चलता है। तो अब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में हम जैसे गरीब का कौन सुनेगा।
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झब्बू लाल कहते हैं कि पहले कोर्ट ने सुरेंद्र कोली और मोनिंदर पंढेर को दोषी बताया। अब वही कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया। अब ईश्वर पर ही भरोसा है। वह इस मामले में कहां जाएं। सुप्रीम कोर्ट जाने की हैसियत नहीं है।
इस मामले में अब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पर भरोसा है कि इसे आगे ले जाएं। हम जैसे गरीब लोगों को न्याय दिलाएं। वहीं, सुनीता कहती हैं कि सीबीआई वालों ने निठारी पीड़ितों को यहां से भागने के लिए मजबूर कर दिया। ऐसे लोग क्या न्याय दिलाएंगे। जांच करने वाले बड़े लोगों के चक्कर में फंस गए और हम गरीब लोग न्याय से वंचित हो गए।
सीबीआई कोर्ट ने मोनिंदर पंढेर का जारी किया परवाना
नोएडा के निठारी कांड के मामले में मोनिंदर सिंह पंढेर के हाईकोर्ट से बरी होने के बाद अदालत का आदेश सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया। इसके बाद सीबीआई कोर्ट के न्यायाधीश परमेंद्र कुमार ने पंढेर का रिहाई परवाना जारी कर दिया। पंढेर के अधिवक्ता देवराज ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति सीबीआई कोर्ट में पेश करने के बाद परवाना जारी किया गया।
नोएडा के निठारी कांड के मामले में मोनिंदर सिंह पंढेर के हाईकोर्ट से बरी होने के बाद अदालत का आदेश सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया। इसके बाद सीबीआई कोर्ट के न्यायाधीश परमेंद्र कुमार ने पंढेर का रिहाई परवाना जारी कर दिया। पंढेर के अधिवक्ता देवराज ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति सीबीआई कोर्ट में पेश करने के बाद परवाना जारी किया गया।
निठारी नरसंहार मामले में सुरेंद्र कोली और पंढेर बरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी नरसंहार में सीबीआई कोर्ट से फांसी की सजा पाए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को दोषमुक्त करार दिया है। कोर्ट ने कहा, पुलिस दोनों के खिलाफ आरोपी साबित करने में विफल रही। न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने जांच पर नाखुशी जताते हुए कहा, जांच बेहद खराब थी सबूत जुटाने की मौलिक प्रक्रिया का पूरी तरह उल्लंघन किया गया। जांच एजेंसियों की नाकामी जनता के विश्वास से धोखाधड़ी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी नरसंहार में सीबीआई कोर्ट से फांसी की सजा पाए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को दोषमुक्त करार दिया है। कोर्ट ने कहा, पुलिस दोनों के खिलाफ आरोपी साबित करने में विफल रही। न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने जांच पर नाखुशी जताते हुए कहा, जांच बेहद खराब थी सबूत जुटाने की मौलिक प्रक्रिया का पूरी तरह उल्लंघन किया गया। जांच एजेंसियों की नाकामी जनता के विश्वास से धोखाधड़ी है।
हाईकोर्ट ने कहा, जांच एजेंसियों ने अंग व्यापार के गंभीर पहलुओं की जांच किए बिना एक गरीब नौकर को खलनायक की तरह पेश कर उसे फंसाने का आसान तरीका चुना। ऐसी गंभीर चूक के कारण मिलीभगत सहित कई तरह के निष्कर्ष संभव हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी अपीलकर्ताओं की निचली अदालत से स्पष्ट रूप से निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिला। सीबीआई की विशेष अदालत ने 13 फरवरी 2009 को दोनों को दुष्कर्म और हत्या का दोषी मानकर फांसी की सजा सुनाई थी। पंढेर और कोली पर 18 मासूमों और एक महिला से दुष्कर्म व हत्या का आरोप था। इस मामले अदालत में पहला केस 8 फरवरी, 2005 को दर्ज किया गया था।