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Noida News: झुंड में बंटे नेपाली हाथी... एक ने मड़हा तो दूसरे ने देबीपुर जंगल में डेरा डाला
Tue, 11 Nov 2025 12:21 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Tue, 11 Nov 2025 12:21 AM IST
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किशनपुर अभयारण्य के मड़हा जंगल में नेपाल के हाथी। स्रोत : वन विभाग
बांकेगंज। नेपाल से आए हाथी दो झुंड में बंट गए हैं। इसके बाद एक ने महड़ा तो दूसरे ने देबीपुर के जंगल में डेरा जमा लिया है। किशनपुर अभयारण्य में शनिवार को हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। फेंसिंग तोड़कर कटैया गांव के किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद चलतुआ बीट जंगल की ओर कूच कर गए।
करीब 15 दिन पहले नेपाल से आए चार टस्कर हाथी किशनपुर अभयारण्य के मड़हा वन ब्लॉक में डेरा डाला था। इस बीच इन हाथियों ने मड़हा से लेकर बफरजोन मैलानी रेंज और मोहम्मदी जंगल में पहुंचकर उत्पात मचाया।
किसानों की फसलों को रौंदने के बाद चरकर तबाह कर डाला। तीन दिन पहले माेहम्मदी रेंज की निगरानी टीमों के खदेड़ने से गुस्साए दो हाथी वहां से चलकर फिर मड़हा वन ब्लॉक जा पहुंचे, जबकि दो टस्कर देबीपुर जंगल में ही रुक गए। इस बीच दोनों हाथियों ने जंगल बाहर की ओर रुख नहीं किया और किसानों की फसलों को कोई नुकसान हुआ।
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निगरानी टीमों के मुताबिक, सोमवार को दोनों झुंडों की लोकेशन अलग-अलग मड़हा और देबीपुर जंगलों में मिली है। रेंजर मोहम्मदी निर्भय प्रताप शाही ने बताया कि देबीपुर जंगल में रुके दोनों हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। जंगल से सटे गांवों में अभियान चलाकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
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करीब 15 दिन पहले नेपाल से आए चार टस्कर हाथी किशनपुर अभयारण्य के मड़हा वन ब्लॉक में डेरा डाला था। इस बीच इन हाथियों ने मड़हा से लेकर बफरजोन मैलानी रेंज और मोहम्मदी जंगल में पहुंचकर उत्पात मचाया।
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किसानों की फसलों को रौंदने के बाद चरकर तबाह कर डाला। तीन दिन पहले माेहम्मदी रेंज की निगरानी टीमों के खदेड़ने से गुस्साए दो हाथी वहां से चलकर फिर मड़हा वन ब्लॉक जा पहुंचे, जबकि दो टस्कर देबीपुर जंगल में ही रुक गए। इस बीच दोनों हाथियों ने जंगल बाहर की ओर रुख नहीं किया और किसानों की फसलों को कोई नुकसान हुआ।
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निगरानी टीमों के मुताबिक, सोमवार को दोनों झुंडों की लोकेशन अलग-अलग मड़हा और देबीपुर जंगलों में मिली है। रेंजर मोहम्मदी निर्भय प्रताप शाही ने बताया कि देबीपुर जंगल में रुके दोनों हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। जंगल से सटे गांवों में अभियान चलाकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है।