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आगरा के ध्यानार्थ:::: बटेश्वर के नंदी 1200 साल से जैसे उनकी ही प्रतीक्षा कर रहे थे - पद्मश्री केके मुहम्मद

Fri, 19 May 2023 10:15 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 19 May 2023 10:15 PM IST
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Nandi of Bateshwar was waiting for him for 1200 years - Padmashree KK Muhammad
-अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर आईजीएनसीए में पुरातत्वविद् पद्मश्री ने दिया व्याख्यान
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने पुरातत्वविद् पद्मश्री केके मुहम्मद के व्याख्यान का आयोजन किया। इसका विषय था- टेंपल कंजर्वेशन: चैलेंजेस इन चंबल- अ स्टोरी ऑफ फॉलेन टेंपल्स एंड ह्यूमन इंजीनियरिंग। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक केके मुहम्मद ने इस व्याख्यान में मुरैना जिले के बटेश्वर में मंदिरों के समूह के पुनरुद्धार की कहानी सुनाई।
उन्होंने बटेश्वर में मंदिर श्रृंखला के पुनरुद्धार के समय एक मंदिर के बाहर नंदी की प्रतिमा तलाशे का किस्सा सुनाते हुए कहा कि उस समय ऐसा लगा जैसे छोटे से नंदी 1200 साल से उनकी ही प्रतिक्षा कर रहे थे। यहां आईजीएनसीए के संरक्षण प्रभाग के अध्यक्ष डॉ. अचल पंड्या, शैक्षणिक इकाई के प्रभारी प्रोफेसर अरुण कुमार भारद्वाज व रांची के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक व पुरालेखपाल डॉ. कुमार संजय झा सहित अनेक विद्वान कार्यक्रम में मौजूद रहे। यहां यूएनस्को के 50 साल पूरे होने और भारत को जी-20 की अध्यक्षता मिलने के उपलक्ष्य में यूनेस्को के पोस्टरों की एक प्रदर्शनी हेरिटेज अक्रॉस द वर्ल्ड का उद्घाटन भी यहां किया गया।
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दरअसल आईजीएनसीए के अभिलेखागार ने प्रदर्शनी लगाई है। इसमें 44 यूनेस्को पोस्टर हैं, जो जी20 देशों और विशेष आमंत्रित देशों के साथ-साथ दुनिया के अन्य देशों के संरक्षित स्थलों के बारे में सार्वजनिक जानकारी देते हैं। गौरतलब है कि अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग कर डेटा के मानकीकरण, आदान-प्रदान और प्रसार के लिए आईजीएनसीए को यूनेस्को द्वारा दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में कला, सांस्कृतिक विरासत और जीवनशैली पर क्षेत्रीय डेटाबेस के विकास के लिए नोडल एजेंसी के रूप में भी चिन्हित किया गया है।
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आसान नहीं था मंदिरों का पुनरुद्धार:


केके मुहम्मद ने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के बटेश्वर में करीब 1,250 वर्ष पुराने मंदिर समूह के 2004 से 2012 तक हुए पुनरुद्धार के बारे में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया। उन्होंने दिखाया कि बटेश्वर में वे सारे मंदिर किस अवस्था में थे और पुनरुद्धार के बाद कैसे पुनः एक मंदिर समूह में परिणत हो गए। उनके दस्यु प्रभावित चंबल के इलाके में यह कार्य शुरू करना कितना चुनौतीपूर्ण और खतरों से भरा था। लेकिन डकैतों को इन मंदिरों के महत्त्व के बारे में समझाने में सफल रहे। इसके बाद तो डकैतों ने भी इन मंदिरों के पुनर्निर्माण में सहयोग किया। जब मंदिरों का पुनरुद्धार कर रहे थे तो एक मंदिर में कोई प्रतिमा नहीं थी। उन्होंने कुछ शास्त्रीय लक्षणों के मुताबिक उसके शिव मंदिर होने का निश्चय किया। लेकिन एक समस्या थी कि शिव मंदिर है, तो उसका नंदी कहां है। फिर उन्होंने मंदिर के आसपास देखा तो एक छोटे-से नंदी दिखाई दिए। ऐसा लगा जैसे 1,200 सालों से वे उनकी ही प्रतीक्षा कर रहे थे।
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