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Rewa Accident: भीषण बस हादसे में बचे लोगों ने बताई उस रात की कंपा देने वाली कहानी
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मध्य प्रदेश के रीवा में हुए सड़क हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई है। आठ लोग अब भी जिंदगी से जंग लड़ रहे हैं। हृदय विदारक समाचार पढ़कर हम सिर्फ महसूस कर सकते हैं कि हादसे की पीड़ा क्या रही होगी, पर हादसे में बचे लोगों की जुबा से जब पता चलता है कि क्या मंजर रहा होगा वो। हमने ऐसे ही कुछ लोगों से बात की, जिन्होंने घटना का आंखों देखा हाल बयां किया।
गोरखपुर जिले में रहने वाले सत्येंद्र प्रसाद उनमें से एक हैं। वे हैदराबाद में रहकर काम करते हैं। वे अपने चचेरे भाई और साथ काम करने वाले सात-आठ लोगों के साथ हैदराबाद से गोरखपुर जाने के लिए बस में बैठे थे। तीन दिन पहले शाम 6 बजे हैदराबाद से निकली थी। सत्येंद्र ने बताया कि हम वहां एक कंपनी में काम करते हैं। मैं और मेरा छोटा चचेरा भाई रघुवीर हैदराबाद से बस में बैठे थे। हमारे साथ काम करने वाले 8 लोग थे। जबलपुर में बस बदली थी। गोरखपुर जा रहे थे। बस में भीड़ बहुत थी। हम सबसे पीछे ऊपर वाली सीट पर बैठे थे। बस के कैबिन में 12-15 लोग होंगे। हम लोग जाग रहे थे, बातें कर रहे थे तभी जोरदार झटका लगा और तेज आवाज आई। हम लोग भी बुरी तरह कैबिन में ही एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। पता चल गया था कि कोई एक्सीडेंट हो गया है। चंद सेकेंड बाद ही चीखे सुनाई देने लगीं। हम लोगों ने निकलने की कोशिश की पर बस की स्थिति ऐसी नहीं थी दरवाजे तक भी पहुंचा जा सके। हमने खिड़की तोड़ी और बाहर निकले। पीछे बैठे हम आठ-दस लोग ही थे जो चलने-फिरने की स्थिति में थे। हमने पहले खुद को संभाला फिर बस की स्थिति देखी। बस 42 पहियों वाले बड़े ट्रॉले से पीछे से टकराई थी। बस का आगे का हिस्सा पूरी तरह टूट गया था। ड्राइवर के पीछे वाला कैबिन भी टूट गया था। बस की सभी सीटें निकल चुकी थी। हर तरफ खून और चीखें थीं। लग रहा था कि बस के आगे वाले हिस्से में बैठे किसी का भी बचना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा। फिर पुलिस और एंबलेंस आ गई, हमने मिलकर लोगों को निकाला। सत्येंद्र बताते हैं कि इतना खून देखकर मैं बुरी तरह डर गया था। फिर मुझे भी चक्कर आ गए। सड़क किनारे लेटा रहा। मुझे भी अस्पताल ले जाया गया। मेरी रीढ़ की हड्डी में चोट है पर घरवाले परेशान हो रहे हैं इसलिए मैं यहां नहीं रुकना चाहता। दूसरी बस से घर पहुंचना चाहता हूं बस। बता दें कि सत्येंद्र गोरखपुर जिले के पिपराई थाना क्षेत्र के ग्राम टिपरही में रहते हैं।
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गोरखपुर जिले में रहने वाले सत्येंद्र प्रसाद उनमें से एक हैं। वे हैदराबाद में रहकर काम करते हैं। वे अपने चचेरे भाई और साथ काम करने वाले सात-आठ लोगों के साथ हैदराबाद से गोरखपुर जाने के लिए बस में बैठे थे। तीन दिन पहले शाम 6 बजे हैदराबाद से निकली थी। सत्येंद्र ने बताया कि हम वहां एक कंपनी में काम करते हैं। मैं और मेरा छोटा चचेरा भाई रघुवीर हैदराबाद से बस में बैठे थे। हमारे साथ काम करने वाले 8 लोग थे। जबलपुर में बस बदली थी। गोरखपुर जा रहे थे। बस में भीड़ बहुत थी। हम सबसे पीछे ऊपर वाली सीट पर बैठे थे। बस के कैबिन में 12-15 लोग होंगे। हम लोग जाग रहे थे, बातें कर रहे थे तभी जोरदार झटका लगा और तेज आवाज आई। हम लोग भी बुरी तरह कैबिन में ही एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। पता चल गया था कि कोई एक्सीडेंट हो गया है। चंद सेकेंड बाद ही चीखे सुनाई देने लगीं। हम लोगों ने निकलने की कोशिश की पर बस की स्थिति ऐसी नहीं थी दरवाजे तक भी पहुंचा जा सके। हमने खिड़की तोड़ी और बाहर निकले। पीछे बैठे हम आठ-दस लोग ही थे जो चलने-फिरने की स्थिति में थे। हमने पहले खुद को संभाला फिर बस की स्थिति देखी। बस 42 पहियों वाले बड़े ट्रॉले से पीछे से टकराई थी। बस का आगे का हिस्सा पूरी तरह टूट गया था। ड्राइवर के पीछे वाला कैबिन भी टूट गया था। बस की सभी सीटें निकल चुकी थी। हर तरफ खून और चीखें थीं। लग रहा था कि बस के आगे वाले हिस्से में बैठे किसी का भी बचना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा। फिर पुलिस और एंबलेंस आ गई, हमने मिलकर लोगों को निकाला। सत्येंद्र बताते हैं कि इतना खून देखकर मैं बुरी तरह डर गया था। फिर मुझे भी चक्कर आ गए। सड़क किनारे लेटा रहा। मुझे भी अस्पताल ले जाया गया। मेरी रीढ़ की हड्डी में चोट है पर घरवाले परेशान हो रहे हैं इसलिए मैं यहां नहीं रुकना चाहता। दूसरी बस से घर पहुंचना चाहता हूं बस। बता दें कि सत्येंद्र गोरखपुर जिले के पिपराई थाना क्षेत्र के ग्राम टिपरही में रहते हैं।
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