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Noida News: मां बाहर की दुनिया तो बहुत रंगीन है, फिर हम क्यों रहते हैं यहां
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लुक्सर जेल में मां के गुनाह की पांच बच्चे भी काट रहे सजा, उम्र एक से चार साल
नेहा शर्मा
नोएडा। जब मैं चार महीने की गर्भवती थी, तब मुझे जेल हो गई थी। डिलीवरी के लिए जेल से ही अस्पताल गई और फिर वापस जेल आ गई। इन चहारदीवारी के बाहर की दुनिया तो मेरा बच्चा देख ही नहीं पाया है। अब तो वह जेल को ही घर समझता है। यह एक महिला बंदी की कहानी है, वह करीब दो साल से जेल में बंद है। अब उसकी रिहाई के लिए कोर्ट में केस चल रहा है। उसे उम्मीद है कि वह निर्दोष साबित होगी और परिजनों के साथ रह सकेगी।
वहीं, जब एक अपहरण की आरोपी महिला जेल आई थी, तब उसका बच्चा एक साल का था। अब बच्चा तीन साल का हो गया है। हर रोज वह मां से पूछता है कि हम कब यहां से बाहर जाएंगे। हालांकि अब वह दूसरे बच्चों के साथ बैरक में जेल-जेल खेलता है। यह कहानी सिर्फ इन दो बंदियों की नहीं है। लुक्सर जेल में ऐसी पांच महिला बंदी हैं, जिनके बच्चे भी साथ रह रहे हैं। इनकी उम्र एक से पांच साल के बीच है। इसमें से तीन अपहरण, एक मर्डर और एक ठगी के आरोप में बंद हैं।
लुक्सर जेल में 79 महिला बंदी हैं। इसमें कुछ का जुर्म साबित हो चुका है और कुछ का मामला कोर्ट में चल रहा है। हालांकि जेल प्रशासन की ओर से महिला बंदियों के बच्चों के लिए क्रेच और स्कूल चल रहा है। यह बच्चे स्कूल जाते हैं, एक-दूसरे के साथ खेलते हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि इन बच्चों को अच्छा माहौल देने की हरसंभव कोशिश की जा रही है।
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मां को छोड़कर जाने का मन नहीं करता
जेल में बच्चों को परिवार के सदस्य लेने आते हैं, लेकिन बच्चे साथ जाने से मना कर देते हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि बच्चे मां को छोड़कर जाने को तैयार नहीं हैं। कुछ बच्चे तो पिता से जिद तक करते हैं कि पापा कुछ दिन हमारे साथ रहो न, या मुझे मां के साथ बाहर ले चलो। 6 साल की उम्र तक बच्चे यहां रह सकते हैं।
टीवी देखकर जान रहे बाहर की दुनिया
यह बच्चे टीवी में देखकर बाहर की दुनिया जान रहे हैं। अक्सर रात को मां से लिपटकर पूछते हैं कि मां बाहर की दुनिया तो बहुत रंगीन हैं। फिर हम लोग यहां पर क्यों रहते हैं।
अभी 79 महिला बंदी हैं। इसमें से 5 महिलाओं के बच्चे हैं। बच्चों के लिए क्रेच है और खेलने और पढ़ने की व्यवस्था भी है। बच्चों को अच्छा माहौल देने की कोशिश की जाती है।
-जेपी तिवारी, जेलर, लुक्सर जेल
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नेहा शर्मा
नोएडा। जब मैं चार महीने की गर्भवती थी, तब मुझे जेल हो गई थी। डिलीवरी के लिए जेल से ही अस्पताल गई और फिर वापस जेल आ गई। इन चहारदीवारी के बाहर की दुनिया तो मेरा बच्चा देख ही नहीं पाया है। अब तो वह जेल को ही घर समझता है। यह एक महिला बंदी की कहानी है, वह करीब दो साल से जेल में बंद है। अब उसकी रिहाई के लिए कोर्ट में केस चल रहा है। उसे उम्मीद है कि वह निर्दोष साबित होगी और परिजनों के साथ रह सकेगी।
वहीं, जब एक अपहरण की आरोपी महिला जेल आई थी, तब उसका बच्चा एक साल का था। अब बच्चा तीन साल का हो गया है। हर रोज वह मां से पूछता है कि हम कब यहां से बाहर जाएंगे। हालांकि अब वह दूसरे बच्चों के साथ बैरक में जेल-जेल खेलता है। यह कहानी सिर्फ इन दो बंदियों की नहीं है। लुक्सर जेल में ऐसी पांच महिला बंदी हैं, जिनके बच्चे भी साथ रह रहे हैं। इनकी उम्र एक से पांच साल के बीच है। इसमें से तीन अपहरण, एक मर्डर और एक ठगी के आरोप में बंद हैं।
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लुक्सर जेल में 79 महिला बंदी हैं। इसमें कुछ का जुर्म साबित हो चुका है और कुछ का मामला कोर्ट में चल रहा है। हालांकि जेल प्रशासन की ओर से महिला बंदियों के बच्चों के लिए क्रेच और स्कूल चल रहा है। यह बच्चे स्कूल जाते हैं, एक-दूसरे के साथ खेलते हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि इन बच्चों को अच्छा माहौल देने की हरसंभव कोशिश की जा रही है।
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मां को छोड़कर जाने का मन नहीं करता
जेल में बच्चों को परिवार के सदस्य लेने आते हैं, लेकिन बच्चे साथ जाने से मना कर देते हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि बच्चे मां को छोड़कर जाने को तैयार नहीं हैं। कुछ बच्चे तो पिता से जिद तक करते हैं कि पापा कुछ दिन हमारे साथ रहो न, या मुझे मां के साथ बाहर ले चलो। 6 साल की उम्र तक बच्चे यहां रह सकते हैं।
टीवी देखकर जान रहे बाहर की दुनिया
यह बच्चे टीवी में देखकर बाहर की दुनिया जान रहे हैं। अक्सर रात को मां से लिपटकर पूछते हैं कि मां बाहर की दुनिया तो बहुत रंगीन हैं। फिर हम लोग यहां पर क्यों रहते हैं।
अभी 79 महिला बंदी हैं। इसमें से 5 महिलाओं के बच्चे हैं। बच्चों के लिए क्रेच है और खेलने और पढ़ने की व्यवस्था भी है। बच्चों को अच्छा माहौल देने की कोशिश की जाती है।
-जेपी तिवारी, जेलर, लुक्सर जेल