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Noida News: चाइल्ड पीजीआई में तीन महीने में शुरू होगा मिल्क बैंक
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- बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने के लिए शुरू हुआ काम
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। चाइल्ड पीजीआई में मिल्क बैंक की स्थापना की प्रक्रिया एक बार फिर तेज हो गई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि तीन महीने के भीतर सभी आवश्यक उपकरण आ जाएंगे। इसके बाद मिल्क बैंक शुरू हो जाएगा। शिशुओं को संक्रमण से बचाने और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से यह पहल की गई है।
इसी क्रम में संस्थान में स्तनपान प्रबंधन इकाई की शुरुआत हो चुकी है। यह इकाई सुषेना हेल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) और धात्री मदर्स मिल्क बैंक के सहयोग से शुरू की गई है। स्तनपान प्रबंधन इकाई स्तनपान कराने वाली माताओं की सहायता करेगी और उन्हें स्तनपान की उचित तकनीक व इसके लाभों के बारे में परामर्श देगी। अब मिल्क बैंक की स्थापना की प्रक्रिया भी धात्री मदर्स मिल्क बैंक के सहयोग से आगे बढ़ रही है। अस्पताल की एक रिसर्च के अनुसार, चाइल्ड पीजीआई के एनआईसीयू (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) में भर्ती 40 से 50 प्रतिशत बच्चे सेप्टिसीमिया से पीड़ित होते हैं। इनमें से कई को वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ती है।
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70 फीसदी बच्चे डिब्बाबंद या फॉर्मूला मिल्क पर निर्भर
डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे 70 प्रतिशत बच्चे पूरी तरह से डिब्बाबंद दूध या मां के दूध के साथ साथ फॉर्मूला मिल्क पर निर्भर रहते हैं, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर बनी रहती है। इसी कारण मिल्क बैंक शुरू करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए मार्च 2023 में संस्थान और संबंधित संस्था के बीच समझौता हुआ था, लेकिन कुछ कारणों से इसमें देरी हो गई।
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मार्च 2024 में दोबारा हुआ समझौता
मिल्क बैंक का उद्देश्य यह है कि जो माताएं किसी कारणवश अपने शिशु को दूध नहीं पिला पा रही हैं, वे मिल्क बैंक से सुरक्षित ढंग से उपलब्ध दूध प्राप्त कर सकें। इसलिए मार्च 2024 में एक बार फिर समझौता किया गया था, जिसके तहत अक्टूबर में मिल्क बैंक शुरू होना था, कुछ कारणों के चलते फिर से देरी हुई। लेकिन अब पीजीआई ने फिर से प्रक्रिया तेज की है। इसको लेकर संस्था के साथ बैठक भी हुई।
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वर्जन
कुछ उपकरण संस्थान में पहुंच चुके हैं और शेष उपकरण भी शीघ्र ही उपलब्ध करा दिए जाएंगे। उम्मीद है कि आगामी तीन से चार महीने में मिल्क बैंक पूरी तरह से कार्यशील हो जाएगा।
डॉ. अरुण कुमार सिंह, निदेशक, चाइल्ड पीजीआई
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। चाइल्ड पीजीआई में मिल्क बैंक की स्थापना की प्रक्रिया एक बार फिर तेज हो गई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि तीन महीने के भीतर सभी आवश्यक उपकरण आ जाएंगे। इसके बाद मिल्क बैंक शुरू हो जाएगा। शिशुओं को संक्रमण से बचाने और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से यह पहल की गई है।
इसी क्रम में संस्थान में स्तनपान प्रबंधन इकाई की शुरुआत हो चुकी है। यह इकाई सुषेना हेल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) और धात्री मदर्स मिल्क बैंक के सहयोग से शुरू की गई है। स्तनपान प्रबंधन इकाई स्तनपान कराने वाली माताओं की सहायता करेगी और उन्हें स्तनपान की उचित तकनीक व इसके लाभों के बारे में परामर्श देगी। अब मिल्क बैंक की स्थापना की प्रक्रिया भी धात्री मदर्स मिल्क बैंक के सहयोग से आगे बढ़ रही है। अस्पताल की एक रिसर्च के अनुसार, चाइल्ड पीजीआई के एनआईसीयू (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) में भर्ती 40 से 50 प्रतिशत बच्चे सेप्टिसीमिया से पीड़ित होते हैं। इनमें से कई को वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ती है।
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70 फीसदी बच्चे डिब्बाबंद या फॉर्मूला मिल्क पर निर्भर
डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे 70 प्रतिशत बच्चे पूरी तरह से डिब्बाबंद दूध या मां के दूध के साथ साथ फॉर्मूला मिल्क पर निर्भर रहते हैं, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर बनी रहती है। इसी कारण मिल्क बैंक शुरू करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए मार्च 2023 में संस्थान और संबंधित संस्था के बीच समझौता हुआ था, लेकिन कुछ कारणों से इसमें देरी हो गई।
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मार्च 2024 में दोबारा हुआ समझौता
मिल्क बैंक का उद्देश्य यह है कि जो माताएं किसी कारणवश अपने शिशु को दूध नहीं पिला पा रही हैं, वे मिल्क बैंक से सुरक्षित ढंग से उपलब्ध दूध प्राप्त कर सकें। इसलिए मार्च 2024 में एक बार फिर समझौता किया गया था, जिसके तहत अक्टूबर में मिल्क बैंक शुरू होना था, कुछ कारणों के चलते फिर से देरी हुई। लेकिन अब पीजीआई ने फिर से प्रक्रिया तेज की है। इसको लेकर संस्था के साथ बैठक भी हुई।
वर्जन
कुछ उपकरण संस्थान में पहुंच चुके हैं और शेष उपकरण भी शीघ्र ही उपलब्ध करा दिए जाएंगे। उम्मीद है कि आगामी तीन से चार महीने में मिल्क बैंक पूरी तरह से कार्यशील हो जाएगा।
डॉ. अरुण कुमार सिंह, निदेशक, चाइल्ड पीजीआई