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Noida News: पौवारी गोशाला में बायोगैस संयंत्र को लेकर 4 को होगी बैठक
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-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण गोशाला में लगाएगा 50 टीपीडी क्षमता का बायो गैस संयंत्र
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। प्राधिकरण ने पौवारी गोशाला में बायो गैस संयंत्र लगाने की कार्रवाई शुरू की है। जल्द ही प्राधिकरण निविदा जारी करेगा। हालांकि उससे पहले 4 अगस्त को बैठक बुलाई है। जिसमें इच्छुक कंपनियों से सुझाव और अन्य बिंदुओं पर चर्चा होंगी। उसके बाद निववाद जारी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पौवारी गांव में प्राधिकरण की गोशाला है। यहां 500 से अधिक गोवंश हैं। वहां पर प्राधिकरण ने 50 टन प्रतिदिन क्षमता का बायो गैस संयंत्र लगाने का फैसला लिया था। गोबर और अन्य अपशिष्ट को प्रोसेस करने से प्राप्त बायो सीएनजी गैस को बेचने से प्राधिकरण को कमाई होगी। अफसरों ने बताया कि उस कमाई को गोशाला के रखरखाव पर खर्च किया जाएगा। संयंत्र को लगाने में करीब 17 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। चयनित कंपनी इस रकम को खुद वहन करेगी। कई कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गए थे। काफी कंपनियों ने रुचि ली है। अब इन कंपनियों के साथ 4 अगस्त को बैठक बुलाई गई है। जहां उनको प्रोजेक्ट के नियम व शर्तों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही उनके सुझाव भी लिए जाएंगे। अगर रोजाना 50 टन गोबर नहीं मिलता है तो फिर आसपास के गांवों से गोबर लाया जाएगा। निविदा की प्रक्रिया जल्द पूरी कर संयंत्र का काम शुरू किया जाएगा।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। प्राधिकरण ने पौवारी गोशाला में बायो गैस संयंत्र लगाने की कार्रवाई शुरू की है। जल्द ही प्राधिकरण निविदा जारी करेगा। हालांकि उससे पहले 4 अगस्त को बैठक बुलाई है। जिसमें इच्छुक कंपनियों से सुझाव और अन्य बिंदुओं पर चर्चा होंगी। उसके बाद निववाद जारी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पौवारी गांव में प्राधिकरण की गोशाला है। यहां 500 से अधिक गोवंश हैं। वहां पर प्राधिकरण ने 50 टन प्रतिदिन क्षमता का बायो गैस संयंत्र लगाने का फैसला लिया था। गोबर और अन्य अपशिष्ट को प्रोसेस करने से प्राप्त बायो सीएनजी गैस को बेचने से प्राधिकरण को कमाई होगी। अफसरों ने बताया कि उस कमाई को गोशाला के रखरखाव पर खर्च किया जाएगा। संयंत्र को लगाने में करीब 17 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। चयनित कंपनी इस रकम को खुद वहन करेगी। कई कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गए थे। काफी कंपनियों ने रुचि ली है। अब इन कंपनियों के साथ 4 अगस्त को बैठक बुलाई गई है। जहां उनको प्रोजेक्ट के नियम व शर्तों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही उनके सुझाव भी लिए जाएंगे। अगर रोजाना 50 टन गोबर नहीं मिलता है तो फिर आसपास के गांवों से गोबर लाया जाएगा। निविदा की प्रक्रिया जल्द पूरी कर संयंत्र का काम शुरू किया जाएगा।
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