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Noida News: दिवाली की तिथि पर बैठक, 21 के पक्ष में निर्णय
Tue, 14 Oct 2025 12:49 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Tue, 14 Oct 2025 12:49 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। दिवाली 20 अक्तूबर को मनाएं या 21 अक्तूबर को अभी ये पूर्ण रूप से स्पष्ट तो नहीं हो सका है लेकिन विद्वानों के एक दल ने सामूहिक रूप से 21 अक्तूबर को दिवाली मनाने के पक्ष में निर्णय दिया है। सोमवार को जुंडला गेट के श्री बांके बिहारी मंदिर में पंडितों, ज्योतिषाचार्यों की इस संबंध में बैठक हुई।
बैठक में पंडित अमीर चंद, संजीव शास्त्री, एसी शर्मा, पंडित योगीराज योगी, पंडित नरेश कौशिक, पंडित कमलकांत शामिल रहे। इसमें सिंधु सहित कई अन्य शास्त्र सम्मत मतों पर विमर्श किया गया। तय किया गया कि दिवाली का त्योहार 21 अक्तूबर को ही मनाना शुभ रहेगा। विद्वानों ने तर्क रखे कि प्रदोष व्यापिनी, सूर्यास्त के बाद त्रिमुहूर्त्त कार्तिक अमावस्या के दिन दीपावली मनाने की शास्त्राज्ञा है। यह मूल प्रथम वचन है। इस वर्ष संवत् 2082 में 20 अक्तूबर के दिन कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि का समाप्ति काल 3 बजकर 45 मिनट है। अतः चतुर्दशी समाप्ति के साथ ही कार्तिक अमावस्या शुरु होकर अगले दिन 21 अक्तूबर, मंगलवार शाम 5 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। इससे अलग पंडित विनोद शास्त्री अभी भी 20 अक्तूबर को ही दिवाली मनाने के पक्षधर हैं।
हरियाणा सहित उत्तर भारत में 21 को दिवाली मनाना उचित
ज्योतिषाचार्य विकास नागपाल का कहना है कि बनारस ने पंचांग के अनुसार 20 अक्तूबर को अमावस्या पडती है, जबकि उत्तर भारत के पंचांग देखें तो अमावस्या 21 अक्तूबर को पड़ती है। हरियाणा राज्य में उत्तर भारत में ही आता है, इसलिए यहां दिवाली 21 अक्तूबर मनाया जाना उचित रहेगा। दिवाली की पूजा वृष लगन में की जाती है, जो इस साल वर्ष लगन का श्रेष्ठ समय शाम सात बजे से नौ बजे तक है, इसके बाद मिथुन लगन है, जो रात्रि 11 बजे तक रहेगी, ये समय भी दिवाली के लिए उत्तम है। इसलिए दिवाली पर लक्ष्मी पूजन सात बजे से रात्रि 11 बजे तक किया जा सकता है।
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करनाल। दिवाली 20 अक्तूबर को मनाएं या 21 अक्तूबर को अभी ये पूर्ण रूप से स्पष्ट तो नहीं हो सका है लेकिन विद्वानों के एक दल ने सामूहिक रूप से 21 अक्तूबर को दिवाली मनाने के पक्ष में निर्णय दिया है। सोमवार को जुंडला गेट के श्री बांके बिहारी मंदिर में पंडितों, ज्योतिषाचार्यों की इस संबंध में बैठक हुई।
बैठक में पंडित अमीर चंद, संजीव शास्त्री, एसी शर्मा, पंडित योगीराज योगी, पंडित नरेश कौशिक, पंडित कमलकांत शामिल रहे। इसमें सिंधु सहित कई अन्य शास्त्र सम्मत मतों पर विमर्श किया गया। तय किया गया कि दिवाली का त्योहार 21 अक्तूबर को ही मनाना शुभ रहेगा। विद्वानों ने तर्क रखे कि प्रदोष व्यापिनी, सूर्यास्त के बाद त्रिमुहूर्त्त कार्तिक अमावस्या के दिन दीपावली मनाने की शास्त्राज्ञा है। यह मूल प्रथम वचन है। इस वर्ष संवत् 2082 में 20 अक्तूबर के दिन कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि का समाप्ति काल 3 बजकर 45 मिनट है। अतः चतुर्दशी समाप्ति के साथ ही कार्तिक अमावस्या शुरु होकर अगले दिन 21 अक्तूबर, मंगलवार शाम 5 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। इससे अलग पंडित विनोद शास्त्री अभी भी 20 अक्तूबर को ही दिवाली मनाने के पक्षधर हैं।
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हरियाणा सहित उत्तर भारत में 21 को दिवाली मनाना उचित
ज्योतिषाचार्य विकास नागपाल का कहना है कि बनारस ने पंचांग के अनुसार 20 अक्तूबर को अमावस्या पडती है, जबकि उत्तर भारत के पंचांग देखें तो अमावस्या 21 अक्तूबर को पड़ती है। हरियाणा राज्य में उत्तर भारत में ही आता है, इसलिए यहां दिवाली 21 अक्तूबर मनाया जाना उचित रहेगा। दिवाली की पूजा वृष लगन में की जाती है, जो इस साल वर्ष लगन का श्रेष्ठ समय शाम सात बजे से नौ बजे तक है, इसके बाद मिथुन लगन है, जो रात्रि 11 बजे तक रहेगी, ये समय भी दिवाली के लिए उत्तम है। इसलिए दिवाली पर लक्ष्मी पूजन सात बजे से रात्रि 11 बजे तक किया जा सकता है।
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