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बिना इलेक्ट्रिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के नहीं पास होगा नक्शा
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नोएडा। नोएडा में प्राधिकरण के तहत आने आवासीय, कॉमर्शियल कॉप्लेक्स, हाईराइज सोसाइटियों, उद्योगों और कार्यालयों के लिए नक्शा पास कराना अब आसान नहीं होगा। सभी तरह के नक्शों में इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन को शामिल करना होगा। भविष्य की जरूरतों को देखकर ऐसा किया गया है। नोएडा में इलेक्ट्रिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पॉलिसी लागू की गई है। भविष्य में आने वाले नक्शों में इसे जरूरी किया गया है।
प्राधिकरण के अधिकारी का कहना है कि आने वाला समय इलेक्ट्रिक वाहनों का है। लिहाजा पहले से तैयारी करने पर ही भविष्य में इसकी जरूरतें पूरी होंगी। यही वजह है कि इस पॉलिसी को नोएडा में लागू किया गया है। इसमें पुरानी सोसाइटियों को भी अनुमति लेनी होगी, जो 2000 से भी ज्यादा हैं। पॉलिसी दो श्रेणियों में लागू की जाएगी। एक श्रेणी निजी चार्जिंग की होगी जो कोठी या घर के लिए होगी। इसका स्वामी मकान मालिक होगा। दूसरी श्रेणी में ऐसी सोसाइटी या भवन होंगे, जहां एक से ज्यादा लोग रहते हैं।
स्थल का मानक तय
चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए स्थल का मानक तय किया गया है। आम लोगों के लिए प्रत्येक 25 किमी पर, वहीं राजमार्गों पर प्रत्येक 100 किमी पर होना चाहिए। हालांकि प्राधिकरण ने शहर में 160 स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन लगाने की योजना बनाई है। इसी कड़ी में करीब 60 स्थानों पर इसे लगाया गया है। ऐसे चार्जिंग स्टेशन काफी कम दूरी पर हैं। इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन पर चार्ज होने के बाद एक वाहन 120 किमी तक का सफर तय कर सकेगा।
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कार्बन उत्सर्जन कम करने पर जोर
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने का मकसद कार्बन उत्सर्जन कम करने पर जोर है। मानक के अनुसार 1000 की जनसंख्या पर आठ कारें होनी चाहिए, लेकिन दिल्ली में 85 कारें हैं। इस लिहाज से कार्बन उत्सर्जन काफी ज्यादा है। नोएडा में भी यही हाल है। यहां रोजाना हजारों वाहनों का आना-जाना होता है। ऐसे में कार्बन उत्सर्जन की रोकथाम जरूरी है।
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प्राधिकरण के अधिकारी का कहना है कि आने वाला समय इलेक्ट्रिक वाहनों का है। लिहाजा पहले से तैयारी करने पर ही भविष्य में इसकी जरूरतें पूरी होंगी। यही वजह है कि इस पॉलिसी को नोएडा में लागू किया गया है। इसमें पुरानी सोसाइटियों को भी अनुमति लेनी होगी, जो 2000 से भी ज्यादा हैं। पॉलिसी दो श्रेणियों में लागू की जाएगी। एक श्रेणी निजी चार्जिंग की होगी जो कोठी या घर के लिए होगी। इसका स्वामी मकान मालिक होगा। दूसरी श्रेणी में ऐसी सोसाइटी या भवन होंगे, जहां एक से ज्यादा लोग रहते हैं।
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स्थल का मानक तय
चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए स्थल का मानक तय किया गया है। आम लोगों के लिए प्रत्येक 25 किमी पर, वहीं राजमार्गों पर प्रत्येक 100 किमी पर होना चाहिए। हालांकि प्राधिकरण ने शहर में 160 स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन लगाने की योजना बनाई है। इसी कड़ी में करीब 60 स्थानों पर इसे लगाया गया है। ऐसे चार्जिंग स्टेशन काफी कम दूरी पर हैं। इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन पर चार्ज होने के बाद एक वाहन 120 किमी तक का सफर तय कर सकेगा।
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कार्बन उत्सर्जन कम करने पर जोर
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने का मकसद कार्बन उत्सर्जन कम करने पर जोर है। मानक के अनुसार 1000 की जनसंख्या पर आठ कारें होनी चाहिए, लेकिन दिल्ली में 85 कारें हैं। इस लिहाज से कार्बन उत्सर्जन काफी ज्यादा है। नोएडा में भी यही हाल है। यहां रोजाना हजारों वाहनों का आना-जाना होता है। ऐसे में कार्बन उत्सर्जन की रोकथाम जरूरी है।