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Noida News: आरोपियों की जानकारी देने वाले युवक को पीजी का अकाउंटेंट बताकर किया नामजद, अब नाम हटाने की तैयारी

Fri, 17 Jul 2026 08:56 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 08:56 PM IST
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man who provided information was named in the case by wrongly, steps are now being taken to have his name removed.
मामूरा अग्निकांड: तीन दिन बाद भी फरार केयरटेकर का सुराग नहीं, भवन के असली मालिक तक भी नहीं पहुंच सकी पुलिस
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। मामूरा स्थित पीजी में हुए भीषण अग्निकांड में दो लोगों की मौत के बाद पुलिस की जांच और कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। घटना के बाद पीजी संचालक और केयरटेकर से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति को एफआईआर में अकाउंटेंट बताकर आरोपी बना दिया गया। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि उसका पीजी के संचालन से सीधा संबंध नहीं था। अब पुलिस उसका नाम मुकदमे से निकालने की बात कह रही है। दूसरी ओर, घटना के तीन दिन बाद भी पुलिस न तो केयरटेकर को पकड़ सकी है और न ही बिल्डिंग के असली मालिक की भूमिका तय कर उसे मुकदमे में नामजद किया गया है।
आग लगने की घटना के बाद मामूरा चौकी प्रभारी की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में श्रीजन दास गुप्ता को पीजी का अकाउंटेंट बताते हुए आरोपी बनाया गया था। पुलिस की आगे की जांच में सामने आया कि श्रीजन कथित रूप से पीजी से जुड़े आरोपी का दोस्त है। मकान मालिक से विवाद के बाद वह अपने मित्र कृष्णा के पास रहने आया था। अग्निकांड के बाद श्रीजन ने ही पुलिस को पीजी संचालक, केयरटेकर और अन्य संबंधित लोगों के बारे में जानकारी दी थी। पुलिस अब तथ्यों की जांच के बाद श्रीजन का नाम मुकदमे से हटाने की प्रक्रिया अपनाने की बात कह रही है।
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ऐसे में सवाल उठ रहा है कि गंभीर हादसे में मुकदमा दर्ज करते समय आरोपियों की भूमिका की ठीक से पुष्टि क्यों नहीं की गई। हादसे में दो लोगों की जान गई है और एफआईआर में भवन में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था तथा आपातकालीन निकास नहीं होने जैसी गंभीर लापरवाही का उल्लेख किया गया है। मामले में नामजद केयरटेकर धर्मेंद्र घटना के बाद से भागा हुआ है। शुरुआती जांच में पता चला है कि वह करीब चार वर्षों से पीजी का संचालन कर रहा था हालांकि पीजी संचालन से संबंधित एग्रीमेंट करीब एक वर्ष पहले किया गया था। पुलिस उसकी तलाश में दबिश देने का दावा कर रही है, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है। जिस इमारत में आग लगी थी, उसके असली मालिक की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
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बताया जा रहा है कि बिल्डिंग मालिक नोएडा के चौड़ा गांव में रहता है। घटना के तीन दिन बाद तक पुलिस उसके खिलाफ किसी कार्रवाई तक नहीं पहुंच सकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम, आपातकालीन निकास और भवन के व्यावसायिक उपयोग की जिम्मेदारी की जांच किए बिना हादसे की पूरी जवाबदेही तय नहीं हो सकती। डीसीपी सेंट्रल नोएडा शैलेंद्र सिंह ने बताया कि मौके पर मिली जानकारी के आधार पर एफआईआर हुई है। इस मामले में विवेचना और साक्ष्य संकलन की जा रही है। मामले में विधिक राय ली जा रही है। आरोपियों पर जिम्मेदारी मेरिट के आधार पर तय होगी।

गांवों में बनी बहुमंजिला इमारतों पर सवाल
हादसे ने मामूरा और आसपास बड़ी संख्या में चल रहे पीजी और बहुमंजिला किराये के भवनों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि क्षेत्र में सौ से अधिक पीजी और किराये की इमारतें हैं। इनमें बड़ी संख्या में छात्र और नौकरीपेशा युवा रहते हैं। कई इमारतों में संकरी सीढि़यां और एक ही निकास होने के कारण आपात स्थिति में लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

स्नेहा की आखिरी कॉल .. बचा लो
इस हादसे में जान गंवाने वाली स्नेहा की आखिरी कॉल उसके मुंहबोले भाई आयुष जैन के पास आई थी। स्नेहा ने घबराई आवाज में बताया था कि चारों तरफ धुआं भर गया है और वह सांस नहीं ले पा रही है। उस समय आयुष नीचे मौजूद था। वह बहन को बचाने के लिए अंदर जाने दौड़ा लेकिन पार्किंग में खड़े वाहनों में हो रहे धमाकों और आग की तेज लपटों के कारण आगे नहीं बढ़ सका। कुछ देर बाद फोन पर स्नेहा की आवाज आनी बंद हो गई।

रहने खाने का संकट, नया कमरा लेने में 40 हजार तक का खर्च
अग्निकांड के बाद पीजी में रहने वाले लोगों के सामने रहने का संकट भी खड़ा हो गया है। हादसे के समय कई लोग जल्दबाजी में बाहर निकले थे। आग के कारण उनका सामान भी बिल्डिंग के अंदर ही छूट गया। हादसे के बाद से बिल्डिंग बंद होने के कारण लोग अपने कमरों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। अग्निकांड में जान बचाने वाले कई लोग तीन दिन बाद भी स्थायी ठिकाने की तलाश में हैं। मुरादाबाद निवासी श्रेया सेक्टर-10 की निजी कंपनी में 18 हजार रुपये महीने की नौकरी करती हैं। उनके मुताबिक नया कमरा लेने में एडवांस, ब्रोकर कमीशन और किराया मिलाकर 35 से 40 हजार रुपये की जरूरत है। प्रीति यादव ने मजबूरी में 10 हजार रुपये महीने पर दूसरा कमरा लिया है। पीड़ितों का आरोप है कि पीजी संचालक और केयरटेकर ने उनका एडवांस भी वापस नहीं किया।

दोस्तों के यहां गुजार रहे रात
मामूरा पीजी अग्निकांड के बाद वहां रहने वाले कई लोगों को अब तक नया ठिकाना नहीं मिल पाया है। बिल्डिंग बंद होने के कारण पीजी में रहने वाले लोग अपने कमरों में नहीं लौट सके हैं। इनमें से कई लोग फिलहाल अपने दोस्तों और परिचितों के घरों पर रुके हुए हैं।


अभी बंद है बिल्डिंग, अग्निशमन और पुलिस की जांच जारी
अग्निकांड के बाद से पीजी की बिल्डिंग को बंद रखा गया है। अग्निशमन विभाग और पुलिस की टीमें घटनास्थल की जांच कर रही हैं। हादसे से जुड़े साक्ष्यों को जुटाने के साथ आग फैलने के कारणों का पता लगाया जा रहा है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप चौबे ने बताया कि हमलोग जांच कर रहे हैं और जल्द ही जांच के बाद सभी चीजें सामने आ जाएगी।
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