{"_id":"627803d0bff9a42a50484dba","slug":"making-the-society-green-by-making-manure-from-the-garbage-from-the-kitchen-noida-news-noi6474011126","type":"story","status":"publish","title_hn":"रसोई से निकले कूड़े से खाद बनाकर सोसाइटी को कर रहीं हरा-भरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रसोई से निकले कूड़े से खाद बनाकर सोसाइटी को कर रहीं हरा-भरा
विज्ञापन
सोसाइटी में रसोई से निकले कूड़े से बनी खाद दिखातीं बबीता सिंह ।
- फोटो : Faridabad
फरीदाबाद (अवध किशोर श्रीवास्तव)। किचन से निकले कूड़े से खाद बनाकर सोसाइटी पार्क और घरों में लगे पौधों को हराभरा किया जा रहा है। घर से निकलने वाले गीले और सूखे कूड़े से प्रत्येक महीने करीब 100 किलो खाद तैयार की जाती है। खाद के प्रयोग से सोसाइटी के बाहर बने पार्क को भी विकसित किया जा रहा है। बचे हुए खाद को खुले बाजार में सस्ते दर पर बेच दिया जाता है। जिससे कर्मचारियों का खर्च निकाला जा सके। यह कहना है कि इस खाद को तैयार करने वाली बबीता सिंह का।
सेक्टर-86 के समर पाम सोसाइटी निवासी बबीता सिंह ने करीब दो वर्ष पहले घरों से निकलने वाले गीले और सूखे कूड़े का उचित प्रबंधन का प्रयास शुरू किया था। शुरू में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि कूड़ा एकत्रित करने में सोसाइटी के लोगों की रुचि बहुत कम थी। इसलिए उन्होंने सोसाइटी की प्रत्येक ब्लॉक में दो लोगों की टीम बनाकर किचन से निकलने वाले कूड़े को एकत्रित करने के लिए जागरूक करना शुरू किया। धीरे-धीरे लोग जुड़ने लगें। उनका कहना है सोसाइटी में करीब तीन हजार परिवार हैं। गर्मी के दिनों में रोजाना करीब 150 किलो गीला और सूखा कूड़ा निकलता है। जबकि सर्दी के दिनों में यह बढ़कर 150 से 200 किलो हो जाता है। इसके बाद गीले, सूखे और प्लास्टिक के कूड़े को अलग-अगल किया जाता है। वहीं, प्लास्टिक को अलग कर एक संस्था को रिसाइकल कारने के लिए भेज दिया जाता है।
25 से 30 दिनों में तैयार होती है खाद
कूड़े से खाद तैयार होने में करीब 25 से 30 दिनों का समय लगता है। कूड़ा एकत्रित कर प्लास्टिक के ड्रम में रखा जाता है। इसमें लकड़ी के बुरादे और कुछ अन्य पदार्थ मिलाए जाते हैं। इसे रोजाना तीन से चार बार मिक्स किया जाता है। इस खाद में नाइट्रोजन की मात्रा भरपूर होती है। सब कुछ ठीक होने के बाद इसे सुखाकर मशीन के माध्यम से मिक्स कर दिया जाता है। जिसे पौधों में डाला जाता है।
विज्ञापन
कर्मचारियों के माध्यम से घरों से कूड़ा एकत्रित किया जाता है। शुरू में काफी परेशानी हुई, लेकिन अब ठीक चल रहा है। सोसाइटी के प्रधान सुशील कुुमार और अन्य लोगों का बहुत सहयोग मिला। - बबीता सिंह
विज्ञापन
सेक्टर-86 के समर पाम सोसाइटी निवासी बबीता सिंह ने करीब दो वर्ष पहले घरों से निकलने वाले गीले और सूखे कूड़े का उचित प्रबंधन का प्रयास शुरू किया था। शुरू में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि कूड़ा एकत्रित करने में सोसाइटी के लोगों की रुचि बहुत कम थी। इसलिए उन्होंने सोसाइटी की प्रत्येक ब्लॉक में दो लोगों की टीम बनाकर किचन से निकलने वाले कूड़े को एकत्रित करने के लिए जागरूक करना शुरू किया। धीरे-धीरे लोग जुड़ने लगें। उनका कहना है सोसाइटी में करीब तीन हजार परिवार हैं। गर्मी के दिनों में रोजाना करीब 150 किलो गीला और सूखा कूड़ा निकलता है। जबकि सर्दी के दिनों में यह बढ़कर 150 से 200 किलो हो जाता है। इसके बाद गीले, सूखे और प्लास्टिक के कूड़े को अलग-अगल किया जाता है। वहीं, प्लास्टिक को अलग कर एक संस्था को रिसाइकल कारने के लिए भेज दिया जाता है।
विज्ञापन
25 से 30 दिनों में तैयार होती है खाद
कूड़े से खाद तैयार होने में करीब 25 से 30 दिनों का समय लगता है। कूड़ा एकत्रित कर प्लास्टिक के ड्रम में रखा जाता है। इसमें लकड़ी के बुरादे और कुछ अन्य पदार्थ मिलाए जाते हैं। इसे रोजाना तीन से चार बार मिक्स किया जाता है। इस खाद में नाइट्रोजन की मात्रा भरपूर होती है। सब कुछ ठीक होने के बाद इसे सुखाकर मशीन के माध्यम से मिक्स कर दिया जाता है। जिसे पौधों में डाला जाता है।
विज्ञापन
कर्मचारियों के माध्यम से घरों से कूड़ा एकत्रित किया जाता है। शुरू में काफी परेशानी हुई, लेकिन अब ठीक चल रहा है। सोसाइटी के प्रधान सुशील कुुमार और अन्य लोगों का बहुत सहयोग मिला। - बबीता सिंह