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Noida News: धूम्रपान की बढ़ रही आदत दे रही फेफड़ों का कैंसर
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धूम्रपान की बढ़ रही आदत लंग कैंसर की बड़ी वजह
सेक्टर-137 स्थित फेलिक्स अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम, युवाओं को खतरे से कराया अवगत
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। फेफड़ों का कैंसर (लंग कैंसर) पूरी दुनिया में तेजी से पांव पसार रहा है। धूम्रपान की बढ़ रही आदत इस बीमारी की सबसे बड़ी वजह बन रही है। युवा इसकी गिरफ्त में तेजी से आ रहे हैं। सोमवार को लंग कैंसर दिवस के उपलक्ष्य में सेक्टर-137 स्थित फेलिक्स अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें युवाओं को धूम्रपान की वजह से बढ़ रहे खतरे के बारे में अवगत कराया गया।
ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अनिल ठकवानी ने बताया कि फेफड़ों के कैंसर की मुख्य वजह धूम्रपान है। इसके अलावा कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं, जिनमें तंबाकू चबाना और धूम्रपान वाले धुएं के संपर्क में आना भी एक वजह है। सिगरेट पीना फेफड़ों के जोखिम के लिए सबसे आम और गंभीर कारकों में से एक है। हालांकि, धूम्रपान नहीं करने वालों में भी कैंसर का यह रूप विकसित हो सकता है। लंग कैंसर तब होता है, जब कैंसर पैदा करने वाले एजेंट फेफड़ों में असामान्य कोशिकाएं बनाने लगते हैं। शुरुआती स्टेज में कैंसर का पता लग जाने से उपचार की दर 80 से 90 प्रतिशत तक होती है जो दूसरे अंगों में फैलने के कारण कम होती जाती है। फेफड़ों के कैंसर में मेटास्टेसिस अक्सर मस्तिष्क, लिम्फ नोड्स, लिवर और एड्रेनल ग्लैंड्स को प्रभावित करता है।
अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ. डीके गुप्ता ने कहा कि अगर लगातार बलगम वाली खांसी आ रही हो और खांसी में खून आने लगे तो तुरंत डॉक्टरी जांच करवाने की जरूरत है। हालांकि, खांसी के आधार पर कैंसर की पुष्टि नहीं होती क्योंकि इसे हिडेन स्टेज कहा जाता है। अगर खांसी चार सप्ताह से ज्यादा समय तक बनी हुई है तो डॉक्टर से जांच करवाने की जरूरत हो जाती है। छाती में दर्द होना और किसी भी वक्त सांस लेने में दिक्कत महसूस होना भी फेफड़ों के कैंसर का लक्षण हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति ज्यादा धूम्रपान करता है तो उसे और उसके नजदीकी लोगों को यह लक्षण अनदेखा नहीं करने चाहिए। इसके लक्षणों में बिना वजह थकान महसूस होना भी शामिल है। ज्यादा कामकाज किए बिना भी हर वक्त थकान का जारी होना भी इसका लक्षण हो सकता है।
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फेफड़ों के कैंसर के प्रमुख लक्षण
- लगातार खांसी
- वजन में कमी
- भूख की कमी
- सांस लेने में दिक्कत
- बिना किसी कारण के वजन कम होना
- खून के साथ खांसी या जंग के रंग वाला बलगम
- सीने में दर्द-गहरी सांस लेने या खांसी होने पर बढ़ जाता है
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सेक्टर-137 स्थित फेलिक्स अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम, युवाओं को खतरे से कराया अवगत
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। फेफड़ों का कैंसर (लंग कैंसर) पूरी दुनिया में तेजी से पांव पसार रहा है। धूम्रपान की बढ़ रही आदत इस बीमारी की सबसे बड़ी वजह बन रही है। युवा इसकी गिरफ्त में तेजी से आ रहे हैं। सोमवार को लंग कैंसर दिवस के उपलक्ष्य में सेक्टर-137 स्थित फेलिक्स अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें युवाओं को धूम्रपान की वजह से बढ़ रहे खतरे के बारे में अवगत कराया गया।
ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अनिल ठकवानी ने बताया कि फेफड़ों के कैंसर की मुख्य वजह धूम्रपान है। इसके अलावा कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं, जिनमें तंबाकू चबाना और धूम्रपान वाले धुएं के संपर्क में आना भी एक वजह है। सिगरेट पीना फेफड़ों के जोखिम के लिए सबसे आम और गंभीर कारकों में से एक है। हालांकि, धूम्रपान नहीं करने वालों में भी कैंसर का यह रूप विकसित हो सकता है। लंग कैंसर तब होता है, जब कैंसर पैदा करने वाले एजेंट फेफड़ों में असामान्य कोशिकाएं बनाने लगते हैं। शुरुआती स्टेज में कैंसर का पता लग जाने से उपचार की दर 80 से 90 प्रतिशत तक होती है जो दूसरे अंगों में फैलने के कारण कम होती जाती है। फेफड़ों के कैंसर में मेटास्टेसिस अक्सर मस्तिष्क, लिम्फ नोड्स, लिवर और एड्रेनल ग्लैंड्स को प्रभावित करता है।
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अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ. डीके गुप्ता ने कहा कि अगर लगातार बलगम वाली खांसी आ रही हो और खांसी में खून आने लगे तो तुरंत डॉक्टरी जांच करवाने की जरूरत है। हालांकि, खांसी के आधार पर कैंसर की पुष्टि नहीं होती क्योंकि इसे हिडेन स्टेज कहा जाता है। अगर खांसी चार सप्ताह से ज्यादा समय तक बनी हुई है तो डॉक्टर से जांच करवाने की जरूरत हो जाती है। छाती में दर्द होना और किसी भी वक्त सांस लेने में दिक्कत महसूस होना भी फेफड़ों के कैंसर का लक्षण हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति ज्यादा धूम्रपान करता है तो उसे और उसके नजदीकी लोगों को यह लक्षण अनदेखा नहीं करने चाहिए। इसके लक्षणों में बिना वजह थकान महसूस होना भी शामिल है। ज्यादा कामकाज किए बिना भी हर वक्त थकान का जारी होना भी इसका लक्षण हो सकता है।
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फेफड़ों के कैंसर के प्रमुख लक्षण
- लगातार खांसी
- वजन में कमी
- भूख की कमी
- सांस लेने में दिक्कत
- बिना किसी कारण के वजन कम होना
- खून के साथ खांसी या जंग के रंग वाला बलगम
- सीने में दर्द-गहरी सांस लेने या खांसी होने पर बढ़ जाता है