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बच्ची को अगवा कर दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद
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ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो वेस्ट में बच्ची से दुष्कर्म के दोषी बुलंदशहर निवासी सतेंद्र शर्मा उर्फ सचिन को अपर सत्र न्यायाधीश निरंजन कुमार ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। वर्ष 2017 में दोषी ने बच्ची को टॉफी का झांसा देकर अगवा कर दरिंदगी की थी। जिला अदालत ने दोषी पर 32 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन अधिकारी नीटू बिश्नोई ने बताया कि बिसरख कोतवाली क्षेत्र में घर के बाहर खेलती बच्ची को अगवा कर गाजियाबाद में सतेंद्र ने दुष्कर्म किया था। परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अदालत में कुल नौ गवाह सुनवाई के दौरान पेश हुए। गवाह एवं साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने सतेंद्र को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई दी।
जांच अधिकारी विनीत कुमार ने बताया कि जब घटना हुई थी उस दौरान आरोपी को पकड़ना चुनौती था। बच्ची के परिजनों की शिकायत पर जांच की तो पता चला कि सतेंद्र पहले उसी मकान में किराये पर रहता था। उसकी गलत हरकतों को देखकर पीड़ित के पिता ने उसे घर से निकाल दिया था। पुलिस के डर से सतेंद्र दुष्कर्म के बाद बच्ची को तिगरी गोल चक्कर पर छोड़कर फरार हो गया था।
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महिला मित्र की मदद से पुलिस ने दबोचा
जांच अधिकारी ने बताया कि पीड़ित परिजन केवल सतेंद्र को सचिन के नाम से ही जानते थे। जांच में पुलिस को पता चला कि सतेंद्र को पीड़ित परिवार के यहां एक किरायेदार महिला ने रखवाया था। महिला जो गौड़ सिटी में घरेलू सहायिका का काम करती थी। पुलिस पूछताछ में महिला ने बताया कि गलत हरकतों के कारण ही उसने सतेंद्र से अपने संबंध खत्म कर दिए। वह प्राइवेट बस चालक की नौकरी करता था जो गाजियाबाद से ग्रेटर नोएडा चलती है। महिला ने पुलिस को दोषी सतेंद्र का पता व मोबाइल नंबर दिया जिसके बाद पुलिस उसे दबोच लिया।
नहीं कराया था सत्यापन
घटना में भी पीड़ित परिवार की ओर से सतेंद्र को किराए पर रखने से पहले कोई दस्तावेज नहीं लिया। इस कारण घटना के बाद आरोपी तक पहुंचने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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अभियोजन अधिकारी नीटू बिश्नोई ने बताया कि बिसरख कोतवाली क्षेत्र में घर के बाहर खेलती बच्ची को अगवा कर गाजियाबाद में सतेंद्र ने दुष्कर्म किया था। परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अदालत में कुल नौ गवाह सुनवाई के दौरान पेश हुए। गवाह एवं साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने सतेंद्र को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई दी।
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जांच अधिकारी विनीत कुमार ने बताया कि जब घटना हुई थी उस दौरान आरोपी को पकड़ना चुनौती था। बच्ची के परिजनों की शिकायत पर जांच की तो पता चला कि सतेंद्र पहले उसी मकान में किराये पर रहता था। उसकी गलत हरकतों को देखकर पीड़ित के पिता ने उसे घर से निकाल दिया था। पुलिस के डर से सतेंद्र दुष्कर्म के बाद बच्ची को तिगरी गोल चक्कर पर छोड़कर फरार हो गया था।
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महिला मित्र की मदद से पुलिस ने दबोचा
जांच अधिकारी ने बताया कि पीड़ित परिजन केवल सतेंद्र को सचिन के नाम से ही जानते थे। जांच में पुलिस को पता चला कि सतेंद्र को पीड़ित परिवार के यहां एक किरायेदार महिला ने रखवाया था। महिला जो गौड़ सिटी में घरेलू सहायिका का काम करती थी। पुलिस पूछताछ में महिला ने बताया कि गलत हरकतों के कारण ही उसने सतेंद्र से अपने संबंध खत्म कर दिए। वह प्राइवेट बस चालक की नौकरी करता था जो गाजियाबाद से ग्रेटर नोएडा चलती है। महिला ने पुलिस को दोषी सतेंद्र का पता व मोबाइल नंबर दिया जिसके बाद पुलिस उसे दबोच लिया।
नहीं कराया था सत्यापन
घटना में भी पीड़ित परिवार की ओर से सतेंद्र को किराए पर रखने से पहले कोई दस्तावेज नहीं लिया। इस कारण घटना के बाद आरोपी तक पहुंचने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।