फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   labour violence

Noida News: हिंसक श्रमिक प्रदर्शन मामले में सत्यम वर्मा व आकृति के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई

Wed, 13 May 2026 09:12 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 13 May 2026 09:12 PM IST
विज्ञापन
labour violence
हिंसक श्रमिक प्रदर्शन मामले में सत्यम वर्मा व आकृति के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई
विज्ञापन

- दोनों मजदूर बिगुल दस्ता से जुड़े हुए हैं, पुलिस मामले की जांच कर रही

माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। शहर में हिंसक श्रमिक आंदोलन को भड़काने के आरोपी सत्यम वर्मा और आकृति पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) की कार्रवाई की है। दोनों आरोपी मजदूर बिगुल दस्ता के सक्रिय सदस्य हैं और फिलहाल जेल में हैं। पुलिस का कहना है कि श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, आगजनी में इनकी अहम भूिमका थी। पुलिस अब आगे की कार्रवाई करेगी।

वेतन बढ़ोत्तरी की मांग को लेकर 13 अप्रैल को नोएडा में श्रमिकों ने हिंसक प्रदर्शन किया था। इसमें 300 से अधिक कंपनियों के शीशे तोड़ दिए गए थे और दो दर्जन से अधिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया था। इस दौरान शहर में 42 हजार से अधिक मजदूरों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया था। इस हिंसक प्रदर्शन मामले में बीते माह सत्यम वर्मा और आकृति को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का कहना है कि दोनों ने लोगों को उकसा कर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास किया था। जांच के दौरान पुलिस ने कई लोगों की भूमिका की पड़ताल की, जिनमें सत्यम वर्मा और आकृति की गतिविधियां संदिग्ध और भड़काऊ पाई गईं।
विज्ञापन

पुलिस का यह भी कहना है कि श्रमिक आंदोलन की आड़ में कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल खराब करने की कोशिश की थी। प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अफवाहें फैलाने, लोगों को भड़काने और प्रशासन के खिलाफ उकसाने की भी कोशिश की गई। सत्यम वर्मा और आकृति ने न्यायालय के समक्ष जमानत की अर्जी भी लगाई थी। दोनों के साथी आदित्य आनंद और रुपेश रॉय समेत अन्य अभी जेल में हैं। इन दोनों पर भी आगे बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


वकीलों ने कहा ठोस सबूत नहीं : वहीं इस मामले में आकृति के वकील रजनीश यादव का कहना है कि एनएसए लगाने को लेकर पुलिस के पास कोई ठोस सबूत नहीं है। पुलिस केवल सरकार की आलोचना करने वालों पर अतिरिक्त धाराएं लगा रही है। मंगलवार को अभियोजन पक्ष ने आकृति के घर से बरामद एक किताब को ही सबूत के रूप में पेश किया। वहीं पुलिस की कार्रवाई के बाद बिगुल दस्ता के सदस्यों ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि पुलिस की ओर से जो कार्रवाई की गई है वह निराधार है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article