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शराब नहीं मिली तो कर दिया किडनी रैकेट का भंडाफोड़

Sun, 24 Jan 2021 01:53 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 24 Jan 2021 01:53 AM IST
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Kidney racket busted if alcohol is not found
नोएडा। किडनी ट्रांसप्लांट मामले में पुलिस की जांच में अभी तक सामने आया है कि साढ़े 4 लाख टका में सौदा होने के बावजूद बेटा बीमार होने से डोनर अहमद शरीफ वापस बांग्लादेश जाना चाहता था। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने जांच की तो उन्हें कुछ तथ्य और मिले। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शरीफ शराब पीना चाहता था। जब उसने मरीज कबीर हुसैन के भाई सगीर से शराब मांगी तो उसने किडनी प्रत्यारोपण का हवाला देते हुए मना कर दिया। इस पर दोनों में विवाद बढ़ गया। इसके बाद गुस्साए शरीफ ने पुलिस को तुरंत ही फोन कर बुला लिया और पूरे खेल का भंडाफोड़ हो गया।
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वहीं, किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया के लिए 4 सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। इसमें प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के प्रतिनिधि के रूप में सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी, निदेशक स्वास्थ्य की प्रतिनिधि के रूप में डॉ. शशि व अन्य दो सदस्य रहे। सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी ने बताया कि करीब 5 दिन पहले ही कमेटी के सामने डोनर अहमद शरीफ पेश हुआ। कमेटी ने शरीफ से पूछा कि किडनी देने में किसी दबाव में तो नहीं है तो उसने कहा कि कोई दबाव नहीं। किसी तरह का प्रलोभन तो नहीं दिया, जवाब नहीं में मिला। पीड़ित परिचित हैं या नहीं तो उसने कहा कि भली भांति जानता हूं। किडनी देने संबंधी अन्य जवाबाें से संतुष्ट होकर ही कमेटी ने ट्रांसप्लांट को हरी झंडी दे दी।
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दिल्ली व बंगलूरू में नहीं, नोएडा में हुए तैयार
आरोपी मेडिकल वीजा पर भारत आए थे। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बताया कि मेडिकल वीजा पर कहीं भी प्रत्यारोपण किया जा सकता है। पहले बंगलूरू स्थित एक नामी अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण की तैयारी थी। फिर दिल्ली स्थित अस्पताल के लिए योजना बनी। बाद में नोएडा के सेक्टर-62 फोर्टिस में किडनी प्रत्यारोपण की सहमति बनी।
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बांग्लादेश उच्चायोग की मिली एनओसी
फोर्टिस अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज 23 दिसंबर को अस्पताल आया। अस्पताल में उसके सभी आवश्यक परीक्षण हुए। इसके बाद मरीज के रिश्तेदारों ने बांग्लादेश उच्चायोग में किडनी प्रत्यारोपण की एनओसी के लिए आवेदन किया। 11 जनवरी को एनओसी अस्पताल में जमा कराई गई। अस्पताल ने भी क्रॉस वेरिफिकेशन किया गया।
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