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जेएनयू : धरने पर लगेगा 30 हजार का जुर्माना, हिंसा करने पर दाखिला होगा रद्द

Thu, 02 Mar 2023 08:55 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 02 Mar 2023 08:55 PM IST
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JNU: Fine of 30 thousand will be imposed on protest, admission will be canceled for violence
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Iनोट-यह फैसला विवि प्रशासन स्तर से रद्द हो गया है। कृपया इस खबर का इस्तेमाल न करें। I
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I-- विवि प्रशासन ने प्रोक्टोरियल जांच के आधार पर तीन फरवरी से लागू किए हैं नए नियम I
Iअमर उजाला ब्यूरोI

Iनई दिल्ली। IIजवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में अब अगर किसी छात्र ने धरना दिया तो उसे 20 हजार से 30 हजार रुपये का जुर्माना देना होगा। इसके अलावा कैंपस, हाॅस्टल, क्लासरूम में तोड़फोड़, मारपीट या हिंसा पर दाखिला रद्द हो जाएगा। संशोधित जेएनयू एक्ट 2023 तीन फरवरी से लागू हो चुका है। इसमें छह बिंदुओं पर छात्रों के लिए नए नियम निर्धारित किए गए हैं। यह फुल टाइम डिग्री प्रोग्राम के अलावा शॉर्ट टाइम कोर्स वाले सभी छात्रों पर लागू होंगे। यदि कोई छात्र फर्जी सर्टिफिकेट और दस्तावेज देता है तो उसपर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। I
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Iजेएनयू कैंपस में अक्सर विरोध धरना, प्रदर्शन और मारपीट व हिंसा की घटनाएं होती रहती हैं। इसी कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्ती से निपटने को लेकर जेएनयू नियमों में संशोधन किया गया है। विवि प्रशासन ने बुधवार देर शाम ‘रूल्स ऑफ डिसिप्लिन एंड प्रॉपर कंडक्ट ऑॅफ स्टूडेंट ऑफ जेएनयू ’ नाम से नए नियम की सूचना जारी की गयी है। यह नए नियम कार्यकारी परिषद द्वारा अनुमोदित किए गए हैं। दस्तावेज़ में कहा गया है कि नियम विश्वविद्यालय के सभी छात्रों पर लागू होंगे, जिनमें अंशकालिक छात्र भी शामिल हैं। 10 पन्नों में प्रस्तावित नए नियमों में विभिन्न प्रकार के कृत्यों जैसे विरोध और जालसाजी के लिए दंड और प्रॉक्टोरियल जांच और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है। I
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Iसीधे अभिभावकों को भेजी जाएगी शिकायतI
Iजेएनयू कैंपस में बवाल करने पर शिकायत संबंधित छात्र के माता-पिता को भेजी जाएगी। इसका मकसद छात्र की सभी जानकारियां अभिभावकों को देना है, ताकि वे अपने बच्चे को समझा सकें। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुल 17 अपराधों के लिए दंड सूचीबद्ध किए गए हैं। इनमें रुकावट, जुआ, छात्रावास के कमरों पर अनधिकृत कब्जा, अभद्र और अपमानजनक भाषा का उपयोग और धोखाधड़ी या जालसाजी करना शामिल है। I

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Iशिकायत निवारण समिति देखेगी छात्रों और शिक्षकों के मामले I
Iचीफ प्रॉक्टर रजनीश मिश्रा ने बताया कि नए नियम प्रॉक्टोरियल जांच के बाद पुराने नियमों में बदलाव कर नए नियम तैयार किए गए हैं। इनमें हिंसा और ज़बरदस्ती के सभी कृत्यों जैसे घेराव, धरना-प्रदर्शन या किसी भी भिन्नता के लिए दंड का प्रस्ताव किया है, जो सामान्य शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज को बाधित करता है । इसके अलावा कोई भी कार्य जो हिंसा को उकसाता है या उसकी ओर ले जाता हो। नए नियमों में शिक्षकों और छात्रों दोनों से जुड़े मामलों को विश्वविद्यालय, स्कूल और केंद्र स्तर की शिकायत निवारण समिति को भेजा जाएगा। यौन शोषण, छेड़खानी, रैगिंग और सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा करने वाले मामले चीफ प्रॉक्टर के कार्यालय के दायरे में आएंगे। I
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Iतुगलकी फरमान वापिस हो :एबीवीपीI
Iएबीवीपी जेएनयू इकाई के सचिव विकास पटेल ने कहा कि नई अधिनायकवादी आचार संहिता की कोई आवश्यकता नहीं है। पुरानी आचार संहिता पर्याप्त रूप से प्रभावी थी। विश्व विद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था में सुधार पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय हितधारकों, विशेष रूप से छात्र समुदाय के साथ बिना किसी चर्चा के इस कठोर आचार संहिता को लागू कर दिया है। हम इसे वापस लेने की मांग करते हैं।I
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