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Noida News: तरावड़ी के गोदामों में खराब गेहूं मामले की जांच शुरू

Sun, 07 Sep 2025 12:25 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 07 Sep 2025 12:25 AM IST
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Investigation begins into the case of spoiled wheat in Tarawadi godowns
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। तरावड़ी क्षेत्र के राइस मिल गोदामों में रखे लाखों बैग गेहूं के रखरखाव में भारी लापरवाही का खुलासा हुआ है। चार माह पहले मई में लगा गए गेहूं को बिना तिरपाल डाले और बिना दवा के ही खुले में रख दिया गया। बारिश में भीगने और कीड़े लगने से हजारों बैग खराब हो गए। अब तक 666 बैग पूरी तरह खराब मिले हैं। करीब 600 बैग 2025-26 सीजन के भी खराब पाए गए हैं।

मामला उस समय गंभीर हो गया, जब भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने खराब गेहूं लेने से इनकार कर दिया। शिकायत मिलने पर सीएम फ्लाइंग टीम ने छापा मारकर तीन राइस मिलों और विभिन्न गोदामों की जांच की। जांच में न केवल खराब गेहूं मिला, बल्कि करीब 20 हजार बैग ऐसे भी सामने आए, जिनका कोई रिकॉर्ड विभाग से साझा नहीं किया गया था। इनमें 2018 से 2025 के बीच का पुराना गेहूं भी शामिल बताया जा रहा है, जिसे न ढका गया और न ही उस पर दवाई का छिड़काव किया गया।
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सीएम फ्लाइंग टीम के अनुसार तरावड़ी क्षेत्र के गोदामों में पांच लाख सात हजार 430 बैग गेहूं रखा गया था। इसमें से करीब 36 हजार बैग उठवा लिए गए थे, जबकि चार लाख 71 हजार बैग अभी भी वहीं पड़े हैं। इनमें से काफी बैग भीगने और कीड़े लगने से खराब हो चुके हैं। प्राथमिक अनुमान के अनुसार इस लापरवाही से ढाई से तीन करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों खाद्य आपूर्ति निरीक्षक सुरेंद्र सैनी, अशोक व एएफएसओ राजीव के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। अब कार्रवाई करना विभाग पर निर्भर है।
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दूसरी ओर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले नियंत्रक (डीएफएससी) अनिल कुमार ने दावा किया है कि किसी भी गेहूं का रिकॉर्ड गायब नहीं है। सभी बैग का रिकॉर्ड विभाग के पास है और हर साल उठान भी होता है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि सरकार से तिरपाल और कीटनाशक दवा देर से मिलीं, जिसके चलते गेहूं की ऊपरी व निचली लेयर भीगकर खराब हो गई। कीड़े भी लग गए। उनका कहना है कि पूरा गेहूं खराब नहीं हुआ है, छंटाई के बाद इसका उठान कराया जाएगा।
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