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पिता की नौकरी छूटी तो 12वीं का छात्र बेचने लगा मास्क
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पिता की नौकरी छूटी तो 12वीं का छात्र बेचने लगा मास्क
ग्रेटर नोएडा। कोरोना संकट के कारण लॉकडाउन होने पर पिता की नौकरी छूट गई। परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। इस परेशानी से निपटने के लिए 12वीं में पढ़ने वाले बेटे ने परिवार को संकट से उबारने का जिम्मा संभाला। वह दादरी के बाजारों व सड़कों पर मास्क बेचकर परिवार की जरूरतों को पूरी करने लगा। वर्तमान में वह रोज करीब 500 रुपये कमा लेता है। इससे परिवार की आवश्यकताएं पूरी हो रही हैं।
दादरी की एक कॉलोनी में रहने वाले राहुल ने इसी साल इंटरमीडिएट की परीक्षा दी है और अब रिजल्ट का इंतजार है। उसके पिता ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनी में नौकरी करते थे। कोरोना संकट के कारण लॉकडाउन के दौरान कंपनी बंद हुई तो पिता की नौकरी चली गई। परिवार के सामने पैसों की दिक्कत आने लगी। रोजमर्रा की जरूरतें भी नहीं पूरी हो पा रहीं थीं। परिवार को आर्थिक संकट से उबारने के लिए राहुल ने मास्क बेचना शुरू कर दिया। केंद्र व प्रदेश सरकार की कोविड-19 की गाइडलाइन है कि प्रत्येक व्यक्ति को मास्क लगाना जरूरी है। इसी को देखते हुए राहुल ने मास्क बेचना शुरू किया। अब उसके पिता भी उसकी मदद करने लगे हैं। वे दिल्ली से थोक रेट पर कई किस्म के मास्क लेकर आते हैं और उनको दुकानों में बेचते हैं। राहुल बैग में मास्क भरकर सुबह 7 बजे घर से निकल जाता है। दोनों हाथों में अलग-अलग किस्म के मास्क लेकर आवाज लगाते हुए सड़कों, बाजारों व चौराहों पर बेचता है। उसके पास 10 से लेकर 30 रुपये तक के मास्क हैं। दिनभर में 500 से 1000 रुपये तक जुटा लेता है। जब से वह इस काम में लगा है, उसके परिवार की भी स्थिति सुधर गई है। कई बार गर्मी अधिक होने के कारण वह सुबह और शाम के समय ही मास्क बेच पाता है।
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ग्रेटर नोएडा। कोरोना संकट के कारण लॉकडाउन होने पर पिता की नौकरी छूट गई। परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। इस परेशानी से निपटने के लिए 12वीं में पढ़ने वाले बेटे ने परिवार को संकट से उबारने का जिम्मा संभाला। वह दादरी के बाजारों व सड़कों पर मास्क बेचकर परिवार की जरूरतों को पूरी करने लगा। वर्तमान में वह रोज करीब 500 रुपये कमा लेता है। इससे परिवार की आवश्यकताएं पूरी हो रही हैं।
दादरी की एक कॉलोनी में रहने वाले राहुल ने इसी साल इंटरमीडिएट की परीक्षा दी है और अब रिजल्ट का इंतजार है। उसके पिता ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनी में नौकरी करते थे। कोरोना संकट के कारण लॉकडाउन के दौरान कंपनी बंद हुई तो पिता की नौकरी चली गई। परिवार के सामने पैसों की दिक्कत आने लगी। रोजमर्रा की जरूरतें भी नहीं पूरी हो पा रहीं थीं। परिवार को आर्थिक संकट से उबारने के लिए राहुल ने मास्क बेचना शुरू कर दिया। केंद्र व प्रदेश सरकार की कोविड-19 की गाइडलाइन है कि प्रत्येक व्यक्ति को मास्क लगाना जरूरी है। इसी को देखते हुए राहुल ने मास्क बेचना शुरू किया। अब उसके पिता भी उसकी मदद करने लगे हैं। वे दिल्ली से थोक रेट पर कई किस्म के मास्क लेकर आते हैं और उनको दुकानों में बेचते हैं। राहुल बैग में मास्क भरकर सुबह 7 बजे घर से निकल जाता है। दोनों हाथों में अलग-अलग किस्म के मास्क लेकर आवाज लगाते हुए सड़कों, बाजारों व चौराहों पर बेचता है। उसके पास 10 से लेकर 30 रुपये तक के मास्क हैं। दिनभर में 500 से 1000 रुपये तक जुटा लेता है। जब से वह इस काम में लगा है, उसके परिवार की भी स्थिति सुधर गई है। कई बार गर्मी अधिक होने के कारण वह सुबह और शाम के समय ही मास्क बेच पाता है।
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