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1984 के सिख विरोधी दंगा मामला: सज्जन कुमार के खिलाफ में लिखित दलीलें दाखिल करने के निर्देश
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-27 नवंबर और 4 दिसंबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को अभियोजन पक्ष को पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार के खिलाफ 1984 के सिख दंगों के एक मामले में लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया। सज्जन कुमार जनकपुरी और विकास पुरी पुलिस थानों में दर्ज एफआईआर से जुड़े एक मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।
जनकपुरी मामला 1 नवंबर, 1984 को दो सिखों, सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से संबंधित है। दूसरा मामला 2 नवंबर, 1984 को गुरचरण सिंह को जलाने से संबंधित विकासपुरी पुलिस थाने में दर्ज किया गया था। विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने अभियोजन पक्ष को लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही, मामले की सुनवाई 27 नवंबर और 4 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध की। 7 जुलाई को अपना बयान दर्ज कराते समय सज्जन कुमार ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इन्कार किया। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा था कि वह दंगा स्थल पर मौजूद नहीं थे और उन्हें झूठा फंसाया गया है।
अदालत ने सज्जन कुमार को 23 अगस्त, 2023 को हत्या के अपराध से मुक्त कर दिया था। अदालत ने सज्जन कुमार के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 147 (दंगा करने की सजा), 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा करना), 149 (उस सभा के सामान्य उद्देश्य के अभियोजन में गैरकानूनी सभा के किसी भी सदस्य द्वारा किया गया अपराध), 153 (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295 (किसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना), 307 (हत्या का प्रयास), 308 (गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाने की सजा), 395 (डकैती की सजा) और 426 (शरारत की सजा) आदि के तहत आरोप तय किए थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को अभियोजन पक्ष को पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार के खिलाफ 1984 के सिख दंगों के एक मामले में लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया। सज्जन कुमार जनकपुरी और विकास पुरी पुलिस थानों में दर्ज एफआईआर से जुड़े एक मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।
जनकपुरी मामला 1 नवंबर, 1984 को दो सिखों, सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से संबंधित है। दूसरा मामला 2 नवंबर, 1984 को गुरचरण सिंह को जलाने से संबंधित विकासपुरी पुलिस थाने में दर्ज किया गया था। विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने अभियोजन पक्ष को लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही, मामले की सुनवाई 27 नवंबर और 4 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध की। 7 जुलाई को अपना बयान दर्ज कराते समय सज्जन कुमार ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इन्कार किया। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा था कि वह दंगा स्थल पर मौजूद नहीं थे और उन्हें झूठा फंसाया गया है।
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अदालत ने सज्जन कुमार को 23 अगस्त, 2023 को हत्या के अपराध से मुक्त कर दिया था। अदालत ने सज्जन कुमार के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 147 (दंगा करने की सजा), 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा करना), 149 (उस सभा के सामान्य उद्देश्य के अभियोजन में गैरकानूनी सभा के किसी भी सदस्य द्वारा किया गया अपराध), 153 (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295 (किसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना), 307 (हत्या का प्रयास), 308 (गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाने की सजा), 395 (डकैती की सजा) और 426 (शरारत की सजा) आदि के तहत आरोप तय किए थे।
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