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Noida News: यमुना प्रोजेक्ट के लिए अधिगृहीत भूमि के मुआवजे में बढ़ोतरी
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चैनलाइजेशन प्रोजेक्ट के लिए अधिगृहीत की गई भूमि के मालिकों को राहत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने यमुना के चैनलाइजेशन प्रोजेक्ट के लिए अधिगृहीत की गई भूमि के मालिकों को बड़ी राहत देते हुए मुआवजे की राशि में वृद्धि का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति तारा वितस्ता गंजू की एकल पीठ ने 26 सितंबर को दिए गए फैसले में किलोकरी, खिजराबाद, नंगली रजापुर और गढ़ी मेंडू गांवों की भूमि के लिए मुआवजा राशि को 89,600 रुपये प्रति बीघा से बढ़ाकर 2,07,500 रुपये प्रति बीघा कर दिया। यह फैसला 1989 की अधिसूचना के तहत अधिगृहीत की गई सभी भूमियों पर लागू होगा जिसमें कुल 6,674 बीघा से अधिक भूमि शामिल है।
मामला 1989 की भूमि अधिग्रहण अधिसूचना से जुड़ा है, जब केंद्र सरकार ने यमुना के चैनलाइजेशन के लिए दक्षिणी दिल्ली के इन गांवों की भूमि अधिगृहीत की थी। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर (एलएसी) ने शुरू में मुआवजा राशि 27,344 रुपये प्रति बीघा तय की थी जिसे रेफरेंस कोर्ट ने बढ़ाकर 89,600 रुपये प्रति बीघा कर दिया लेकिन भूमि मालिकों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर मुआवजे में और वृद्धि की मांग की जिसमें उन्होंने पास के गांवों जैसे बहलोलपुर खादर (2.5 लाख रुपये प्रति बीघा) और जसोला (लगभग 4,948 रुपये प्रति वर्ग गज) के मुआवजे से तुलना की।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ये चारों गांव समान स्थिति में हैं और एक ही अधिसूचना के तहत अधिगृहीत की गई भूमि के लिए समान मुआवजा मिलना चाहिए। अदालत ने 17 मार्च 1988 के एक बिक्री दस्तावेज को आधार मानते हुए मुआवजा तय किया जिसमें किलोकारी गांव की 1 बीघा भूमि 2,07,500 रुपये में बिकी थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के के. पेरियासामी मामले का हवाला देते हुए कहा कि एक ही अधिसूचना के तहत अधिगृहीत सभी भूमियों को समान दर पर मुआवजा मिलना चाहिए, भले ही कुछ मालिकों ने अपील न की हो। भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 28ए के तहत सभी प्रभावितों को यह लाभ मिलेगा।
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अपीलकर्ताओं के वकील ने अदालत में दलील दी कि ये भूमियां महारानी बाग, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, अक्षरधाम मंदिर और कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज जैसे विकसित इलाकों के पास हैं इसलिए मुआवजा ऊंचा होना चाहिए। वहीं, केंद्र सरकार और डीडीए के वकीलों ने तर्क दिया कि भूमि बाढ़ प्रभावित और कृषि योग्य है इसलिए कम मुआवजा उचित है लेकिन अदालत ने अपीलकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया। फैसले से अपीलकर्ताओं को पहले मिले 89,600 रुपये प्रति बीघा के अलावा बकाया राशि पर ब्याज और अन्य वैधानिक लाभ भी दिए जाएंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने यमुना के चैनलाइजेशन प्रोजेक्ट के लिए अधिगृहीत की गई भूमि के मालिकों को बड़ी राहत देते हुए मुआवजे की राशि में वृद्धि का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति तारा वितस्ता गंजू की एकल पीठ ने 26 सितंबर को दिए गए फैसले में किलोकरी, खिजराबाद, नंगली रजापुर और गढ़ी मेंडू गांवों की भूमि के लिए मुआवजा राशि को 89,600 रुपये प्रति बीघा से बढ़ाकर 2,07,500 रुपये प्रति बीघा कर दिया। यह फैसला 1989 की अधिसूचना के तहत अधिगृहीत की गई सभी भूमियों पर लागू होगा जिसमें कुल 6,674 बीघा से अधिक भूमि शामिल है।
मामला 1989 की भूमि अधिग्रहण अधिसूचना से जुड़ा है, जब केंद्र सरकार ने यमुना के चैनलाइजेशन के लिए दक्षिणी दिल्ली के इन गांवों की भूमि अधिगृहीत की थी। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर (एलएसी) ने शुरू में मुआवजा राशि 27,344 रुपये प्रति बीघा तय की थी जिसे रेफरेंस कोर्ट ने बढ़ाकर 89,600 रुपये प्रति बीघा कर दिया लेकिन भूमि मालिकों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर मुआवजे में और वृद्धि की मांग की जिसमें उन्होंने पास के गांवों जैसे बहलोलपुर खादर (2.5 लाख रुपये प्रति बीघा) और जसोला (लगभग 4,948 रुपये प्रति वर्ग गज) के मुआवजे से तुलना की।
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हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ये चारों गांव समान स्थिति में हैं और एक ही अधिसूचना के तहत अधिगृहीत की गई भूमि के लिए समान मुआवजा मिलना चाहिए। अदालत ने 17 मार्च 1988 के एक बिक्री दस्तावेज को आधार मानते हुए मुआवजा तय किया जिसमें किलोकारी गांव की 1 बीघा भूमि 2,07,500 रुपये में बिकी थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के के. पेरियासामी मामले का हवाला देते हुए कहा कि एक ही अधिसूचना के तहत अधिगृहीत सभी भूमियों को समान दर पर मुआवजा मिलना चाहिए, भले ही कुछ मालिकों ने अपील न की हो। भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 28ए के तहत सभी प्रभावितों को यह लाभ मिलेगा।
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अपीलकर्ताओं के वकील ने अदालत में दलील दी कि ये भूमियां महारानी बाग, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, अक्षरधाम मंदिर और कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज जैसे विकसित इलाकों के पास हैं इसलिए मुआवजा ऊंचा होना चाहिए। वहीं, केंद्र सरकार और डीडीए के वकीलों ने तर्क दिया कि भूमि बाढ़ प्रभावित और कृषि योग्य है इसलिए कम मुआवजा उचित है लेकिन अदालत ने अपीलकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया। फैसले से अपीलकर्ताओं को पहले मिले 89,600 रुपये प्रति बीघा के अलावा बकाया राशि पर ब्याज और अन्य वैधानिक लाभ भी दिए जाएंगे।