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21 जुलाई राष्ट्रीय आइस्क्रीम दिवस पर विशेष..... आइसक्रीम : जायके का कारोबार दे रहा हजारों को रोजगार
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आइसक्रीम : जायके का कारोबार दे रहा हजारों को रोजगार
- एक दर्जन से अधिक डिस्ट्रीव्यूटरों से जुड़े हैं दो हजार से ज्यादा लोग
- प्रतिदिन 10 लाख रुपये तक का कारोबार, 60 हजार से ज्यादा आइसक्रीम की खपत
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। शिक्षा का हब कहे जाने वाले ग्रेटर नोएडा में आइस्क्रीम का कारोबार भी अच्छी बढ़त हासिल कर रहा है। यहां के एक दर्जन से अधिक डिस्ट्रीब्यूटर से दो हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है। कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि एक दिन में 60 से 70 हजार आइसक्रीम की खपत हो जाती है। (इसमें वेंडिंग के जरिए बिकने वाली आइस्क्रीम शामिल है। ब्रिक्स नहीं) जिनसे 10 लाख रुपये प्रतिदिन (अनुमानित) कारोबार होता है। (स्रोत- कारोबारियों से मिली जानकारी)
आइसक्रीम के लिए दूध व अन्य सामग्री आसपास से ही आती है तो एक प्रकार से यह कारोबार स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सहयोग कर रहा है। जानकार कहते हैं कि यहां के डिस्ट्रीब्यूटरों के पास गाजियाबाद, सिकंद्राबाद, बुलंदशहर समेत आसपास के कारखानों से अलग-अलग तरह की आइसक्रीम आती है। इन कारखानों में आसपास के गांवों से दूध पहुंचता है। इसका सीधा लाभ दूध आपूर्ति करने वालों को होता है
पांच चरणों से होकर ग्राहक तक पहुंचती है आइसक्रीम
डिस्ट्रीव्यूटर सतेंद्र नागर कहते हैं कि प्लांट से आइसक्रीम पहले सीएंडएफ (कोल्ड एंड फ्रीजिंग) तक पहुंचती है। इसके बाद डिस्ट्रीव्यूटर से ठेकेदार तक खेप पहुंचती है। यहां से वेंडर के जरिए जायके का सफर ग्राहक तक पहुंच कर समाप्त होता है।
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हजारों परिवारों के रोजगार का जरिया
ठेकेदार अमित नागर कहते हैं कि उनके 80 स्टाल हैं। इनके जरिए वह करीब 50 परिवारों को रोजगार दे रहे हैं। यह वेंडिंग व्हीकल रात में चार्ज होते हैं। इसमें लगी बैटरी दिन में कूलिंग करती है, जिससे आइसक्रीम मेंटेन रहती है। यहां वेंडिंग के काम में मैनपुरी, इटावा, उन्नाव, एटा सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग लगे हुए हैं।
दूध और क्रीम से बनती है आइसक्रीम
आइसक्रीम डेयरी दूध या क्रीम से बनाया जाती है और एक स्वीटनर या तो चीनी या इसका विकल्प और एक मसाला जैसे कोको या वेनिला या स्ट्रॉबेरी या आड़ू जैसे फलों के साथ स्वाद होता है। इसे फ्लेवर्ड क्रीम बेस साथ मिलाकर भी बनाया जाता है
डेयरी उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए की थी शुरुआत
1984 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने अपने यहां डेयरी उद्योग और उत्पादों को प्रोत्साहन देने के लिए आइसक्रीम दिवस की शुरुआत की। इसके बाद यह दिवस मनाए जाने की परंपरा पड़ गई।
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- एक दर्जन से अधिक डिस्ट्रीव्यूटरों से जुड़े हैं दो हजार से ज्यादा लोग
- प्रतिदिन 10 लाख रुपये तक का कारोबार, 60 हजार से ज्यादा आइसक्रीम की खपत
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। शिक्षा का हब कहे जाने वाले ग्रेटर नोएडा में आइस्क्रीम का कारोबार भी अच्छी बढ़त हासिल कर रहा है। यहां के एक दर्जन से अधिक डिस्ट्रीब्यूटर से दो हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है। कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि एक दिन में 60 से 70 हजार आइसक्रीम की खपत हो जाती है। (इसमें वेंडिंग के जरिए बिकने वाली आइस्क्रीम शामिल है। ब्रिक्स नहीं) जिनसे 10 लाख रुपये प्रतिदिन (अनुमानित) कारोबार होता है। (स्रोत- कारोबारियों से मिली जानकारी)
आइसक्रीम के लिए दूध व अन्य सामग्री आसपास से ही आती है तो एक प्रकार से यह कारोबार स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सहयोग कर रहा है। जानकार कहते हैं कि यहां के डिस्ट्रीब्यूटरों के पास गाजियाबाद, सिकंद्राबाद, बुलंदशहर समेत आसपास के कारखानों से अलग-अलग तरह की आइसक्रीम आती है। इन कारखानों में आसपास के गांवों से दूध पहुंचता है। इसका सीधा लाभ दूध आपूर्ति करने वालों को होता है
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पांच चरणों से होकर ग्राहक तक पहुंचती है आइसक्रीम
डिस्ट्रीव्यूटर सतेंद्र नागर कहते हैं कि प्लांट से आइसक्रीम पहले सीएंडएफ (कोल्ड एंड फ्रीजिंग) तक पहुंचती है। इसके बाद डिस्ट्रीव्यूटर से ठेकेदार तक खेप पहुंचती है। यहां से वेंडर के जरिए जायके का सफर ग्राहक तक पहुंच कर समाप्त होता है।
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हजारों परिवारों के रोजगार का जरिया
ठेकेदार अमित नागर कहते हैं कि उनके 80 स्टाल हैं। इनके जरिए वह करीब 50 परिवारों को रोजगार दे रहे हैं। यह वेंडिंग व्हीकल रात में चार्ज होते हैं। इसमें लगी बैटरी दिन में कूलिंग करती है, जिससे आइसक्रीम मेंटेन रहती है। यहां वेंडिंग के काम में मैनपुरी, इटावा, उन्नाव, एटा सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग लगे हुए हैं।
दूध और क्रीम से बनती है आइसक्रीम
आइसक्रीम डेयरी दूध या क्रीम से बनाया जाती है और एक स्वीटनर या तो चीनी या इसका विकल्प और एक मसाला जैसे कोको या वेनिला या स्ट्रॉबेरी या आड़ू जैसे फलों के साथ स्वाद होता है। इसे फ्लेवर्ड क्रीम बेस साथ मिलाकर भी बनाया जाता है
डेयरी उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए की थी शुरुआत
1984 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने अपने यहां डेयरी उद्योग और उत्पादों को प्रोत्साहन देने के लिए आइसक्रीम दिवस की शुरुआत की। इसके बाद यह दिवस मनाए जाने की परंपरा पड़ गई।