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Noida News: उप संचालक चकबंदी की तैनाती नहीं होने से सैकड़ों वाद लंबित
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संभल। 31 जुलाई को उप संचालक चकबंदी सुरेश कुमार जायसवाल सेवानिवृत्त हो गए लेकिन फिर इस पर अधिकारी की तैनाती नहीं हो सकी। न्यायालय में करीब 800 वाद लंबित हैं। वादकारियों को सिर्फ तारीख ही मिल रही है। वादकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच अधिवक्ताओं ने उप संचालक चकबंदी की तैनाती किए जाने की मांग उठाई है। हालांकि डीएम ने खुद और एडीएम द्वारा सुनवाई करने का निर्णय लिया है। डीएम ने शुक्रवार को कुछ फाइलों की सुनवाई भी की है।
उप संचालक चकबंदी के न्यायालय में लंबित चल रहे वादों में सुनवाई नहीं हो पा रही है। मामलों में सिर्फ तारीख लगा दी जाती है। वादकारी तारीख लेकर चले जाते हैं और परेशान हैं। वहीं उप संचालक चकबंदी की तैनाती नहीं होने के कारण गांवों में चकबंदी प्रक्रिया से संबंधित कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि अधिवक्ताओं की ओर से कई बार शासन को ज्ञापन भेजकर उप संचालक चकबंदी की तैनाती किए जाने की मांग की गई लेकिन पूरी नहीं हो सकी है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि पद पर अधिकारी की जल्द तैनाती की जानी चाहिए। ताकि वादों का सुनवाई के आधार पर निस्तारण हो सकेगा। वादकारियों को न्याय मिलेगा तो वह राहत महसूस करेंगे। वहीं चकबंदी प्रक्रिया को लेकर लक्ष्य भी पूरे हो जाएंगे।
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संभल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता का कहना है कि डीएम ने वादकारियों की समस्या को देखते हुए सप्ताह में तीन दिन खुद और तीन दिन एडीएम द्वारा सुनवाई कराने का निर्णय लिया है लेकिन डीएम की प्रशासनिक कार्याें की व्यस्तता के चलते यह सुनवाई तेजी से नहीं हो सकेगी। इसलिए विभागीय अधिकारी की तैनाती की जानी आवश्यक है।
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.जुलाई महीने में उप संचालक चकबंदी सेवानिवृत्त हुए थे। तब से किसी भी अधिकारी की तैनाती नहीं हो सकी है। कई ज्ञापन चकबंदी आयुक्त को भेजे जा चुके हैं। समस्या के समाधान के लिए किसी विभागीय अधिकारी की तैनाती जल्द कराई जाए।
-प्रदीप कुमार गुप्ता एडवोकेट
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.उप संचालक चकबंदी का पद रिक्त चल रहा है। न्यायालय में काफी संख्या में वाद लंबित हैं। वादकारियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री से मांग करते हैं कि उप संचालक चकबंदी की तैनात कराई जाए। जिससे वादों का निस्तारण हो सके।
-शरद भारद्वाज एडवोकेट
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.उप संचालक चकबंदी का पद रिक्त चलने से वादकारियों को परेशानी हो रही है। बार एसोसिएशन द्वारा कई बार शासन से नियुक्ति करने की मांग की जा चुकी है। पद पर तैनाती कराकर वादकारियों को राहत दी जानी चाहिए।
-मुस्तकीम अहमद एडवोकेट
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.इस समय किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। डीडीसी की नियुक्ति जल्द कराई जाए। जिससे किसानों को चकबंदी प्रक्रियाओं का समुचित लाभ मिल सके। वादों का निस्तारण भी हो जाएगा।
-नीतू सिंह सैनी एडवोकेट
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उप संचालक चकबंदी के न्यायालय में लंबित चल रहे वादों में सुनवाई नहीं हो पा रही है। मामलों में सिर्फ तारीख लगा दी जाती है। वादकारी तारीख लेकर चले जाते हैं और परेशान हैं। वहीं उप संचालक चकबंदी की तैनाती नहीं होने के कारण गांवों में चकबंदी प्रक्रिया से संबंधित कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि अधिवक्ताओं की ओर से कई बार शासन को ज्ञापन भेजकर उप संचालक चकबंदी की तैनाती किए जाने की मांग की गई लेकिन पूरी नहीं हो सकी है।
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अधिवक्ताओं का कहना है कि पद पर अधिकारी की जल्द तैनाती की जानी चाहिए। ताकि वादों का सुनवाई के आधार पर निस्तारण हो सकेगा। वादकारियों को न्याय मिलेगा तो वह राहत महसूस करेंगे। वहीं चकबंदी प्रक्रिया को लेकर लक्ष्य भी पूरे हो जाएंगे।
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संभल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता का कहना है कि डीएम ने वादकारियों की समस्या को देखते हुए सप्ताह में तीन दिन खुद और तीन दिन एडीएम द्वारा सुनवाई कराने का निर्णय लिया है लेकिन डीएम की प्रशासनिक कार्याें की व्यस्तता के चलते यह सुनवाई तेजी से नहीं हो सकेगी। इसलिए विभागीय अधिकारी की तैनाती की जानी आवश्यक है।
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.जुलाई महीने में उप संचालक चकबंदी सेवानिवृत्त हुए थे। तब से किसी भी अधिकारी की तैनाती नहीं हो सकी है। कई ज्ञापन चकबंदी आयुक्त को भेजे जा चुके हैं। समस्या के समाधान के लिए किसी विभागीय अधिकारी की तैनाती जल्द कराई जाए।
-प्रदीप कुमार गुप्ता एडवोकेट
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.उप संचालक चकबंदी का पद रिक्त चल रहा है। न्यायालय में काफी संख्या में वाद लंबित हैं। वादकारियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री से मांग करते हैं कि उप संचालक चकबंदी की तैनात कराई जाए। जिससे वादों का निस्तारण हो सके।
-शरद भारद्वाज एडवोकेट
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.उप संचालक चकबंदी का पद रिक्त चलने से वादकारियों को परेशानी हो रही है। बार एसोसिएशन द्वारा कई बार शासन से नियुक्ति करने की मांग की जा चुकी है। पद पर तैनाती कराकर वादकारियों को राहत दी जानी चाहिए।
-मुस्तकीम अहमद एडवोकेट
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.इस समय किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। डीडीसी की नियुक्ति जल्द कराई जाए। जिससे किसानों को चकबंदी प्रक्रियाओं का समुचित लाभ मिल सके। वादों का निस्तारण भी हो जाएगा।
-नीतू सिंह सैनी एडवोकेट