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फिल्म सिटी में बनेंगे होटल, दौड़ेगी ट्रेन
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फिल्म सिटी में बनेंगे होटल, दौड़ेगी ट्रेन
- सलाहकार कंपनी ने सौंपी ड्राफ्ट रिपोर्ट, एम्यूजमेंट पार्क और मॉल का भी सुझाव
- फिल्मी संग्रहालय भी बनाने का दिया सुझाव
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में प्रस्तावित फिल्म सिटी स्टूडियो में पांच सितारा होटल भी होंगे और रेलवे लाइन पर ट्रेन भी दौड़ेगी। साथ ही एम्यूजमेंट पार्क भी बनेगा। इन सुविधाओं को विकसित करने का सुझाव सलाहकार एजेंसी ने ड्राफ्ट रिपोर्ट में दिया है।
बीते माह सीबीआरई साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सेक्टर-21 में प्रस्तावित फिल्म सिटी की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। 1000 एकड़ में प्रस्तावित इस फिल्म सिटी स्टूडियो की ड्राफ्ट रिपोर्ट कंपनी ने एक माह में ही यीडा को सौंप दी। रिपोर्ट में फिल्म उद्योग बसाने के लिए कई सुविधाएं विकसित करने के सुझाव दिए गए हैं। मसलन, शूटिंग के लिए ट्रेन की जरूरत होगी। इसलिए रेलवे लाइन बनानी होगी। बड़े कलाकारों को ठहराने के लिए पांच सितारा, तीन सितारा होटल भी होंगे। फिल्म इंस्टीट्यूट भी खोलना होगा, जिससे नए कलाकार तकनीकों की बारीकी सीख सकें। एम्यूजमेंट पार्क, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च आदि भी बनेंगे। इसके साथ ही रिहायश की सुविधा भी विकसित की जाएगी। प्रस्तावित फिल्म सिटी में बाजार व मॉल भी बनेंगे। फिल्मकारों के लिए ऑफिस का विकल्प भी देना होगा। इसके अलावा यहां संग्रहालय भी बनेगा, जिसमें फिल्मों के इतिहास से भी संजोए जाएंगे। हेलीपैड भी बनाने का सुझाव है।
विकसित करने के लिए तीन मॉडल पर हो रही चर्चा
कंपनी की रिपोर्ट के आधार पर अगले एक माह में फाइनल रिपोर्ट आ जाएगी, जिसमें यह भी सुझाव होगा कि फिल्म सिटी को किस मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसे बसाने के लिए तीन विकल्प मॉडल पर चर्चा हो रही है। पहला पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल है। इसके अंतर्गत फिल्म सिटी बसाने के लिए किसी निजी कंपनी से करार हो जाएगा। वही इसे विकसित करेगी। यीडा और उस कंपनी की लाभ में हिस्सेदारी तय हो जाएगी। दूसरा, यमुना प्राधिकरण खुद से विकसित करे और खुद ही प्लॉट बेचे और तीसरा, सरकार से सब्सिडी मिले और यमुना प्राधिकरण नोडल एजेंसी के तौर उसे विकसित करे और आवंटित करे। सबसे ज्यादा जोर फिल्म पीपीपी मॉडल पर विकसित करने पर है। नोएडा की फिल्म सिटी का हश्र देखते हुए यमुना प्राधिकरण प्लॉट काटकर नहीं बेचना चाहता।
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सीईओ से मिलीं फिल्म निर्माता अनुभूति वैद्य
प्रस्तावित फिल्म सिटी स्टूडियो पर चर्चा करने के लिए सोमवार को फिल्म निर्माता अनुभूति वैद्य भी सीईओ से मिलीं। उन्होंने कई सुझाव दिए। यीडा दफ्तर दोबारा आकर कई लिखित सुझाव देने की बात कहीं। बीते सप्ताह गुल पनाग भी यीडा दफ्तर आ चुकी हैं। अपने सुझाव प्राधिकरण को दिए थे।
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- सलाहकार कंपनी ने सौंपी ड्राफ्ट रिपोर्ट, एम्यूजमेंट पार्क और मॉल का भी सुझाव
- फिल्मी संग्रहालय भी बनाने का दिया सुझाव
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में प्रस्तावित फिल्म सिटी स्टूडियो में पांच सितारा होटल भी होंगे और रेलवे लाइन पर ट्रेन भी दौड़ेगी। साथ ही एम्यूजमेंट पार्क भी बनेगा। इन सुविधाओं को विकसित करने का सुझाव सलाहकार एजेंसी ने ड्राफ्ट रिपोर्ट में दिया है।
बीते माह सीबीआरई साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सेक्टर-21 में प्रस्तावित फिल्म सिटी की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। 1000 एकड़ में प्रस्तावित इस फिल्म सिटी स्टूडियो की ड्राफ्ट रिपोर्ट कंपनी ने एक माह में ही यीडा को सौंप दी। रिपोर्ट में फिल्म उद्योग बसाने के लिए कई सुविधाएं विकसित करने के सुझाव दिए गए हैं। मसलन, शूटिंग के लिए ट्रेन की जरूरत होगी। इसलिए रेलवे लाइन बनानी होगी। बड़े कलाकारों को ठहराने के लिए पांच सितारा, तीन सितारा होटल भी होंगे। फिल्म इंस्टीट्यूट भी खोलना होगा, जिससे नए कलाकार तकनीकों की बारीकी सीख सकें। एम्यूजमेंट पार्क, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च आदि भी बनेंगे। इसके साथ ही रिहायश की सुविधा भी विकसित की जाएगी। प्रस्तावित फिल्म सिटी में बाजार व मॉल भी बनेंगे। फिल्मकारों के लिए ऑफिस का विकल्प भी देना होगा। इसके अलावा यहां संग्रहालय भी बनेगा, जिसमें फिल्मों के इतिहास से भी संजोए जाएंगे। हेलीपैड भी बनाने का सुझाव है।
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विकसित करने के लिए तीन मॉडल पर हो रही चर्चा
कंपनी की रिपोर्ट के आधार पर अगले एक माह में फाइनल रिपोर्ट आ जाएगी, जिसमें यह भी सुझाव होगा कि फिल्म सिटी को किस मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसे बसाने के लिए तीन विकल्प मॉडल पर चर्चा हो रही है। पहला पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल है। इसके अंतर्गत फिल्म सिटी बसाने के लिए किसी निजी कंपनी से करार हो जाएगा। वही इसे विकसित करेगी। यीडा और उस कंपनी की लाभ में हिस्सेदारी तय हो जाएगी। दूसरा, यमुना प्राधिकरण खुद से विकसित करे और खुद ही प्लॉट बेचे और तीसरा, सरकार से सब्सिडी मिले और यमुना प्राधिकरण नोडल एजेंसी के तौर उसे विकसित करे और आवंटित करे। सबसे ज्यादा जोर फिल्म पीपीपी मॉडल पर विकसित करने पर है। नोएडा की फिल्म सिटी का हश्र देखते हुए यमुना प्राधिकरण प्लॉट काटकर नहीं बेचना चाहता।
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सीईओ से मिलीं फिल्म निर्माता अनुभूति वैद्य
प्रस्तावित फिल्म सिटी स्टूडियो पर चर्चा करने के लिए सोमवार को फिल्म निर्माता अनुभूति वैद्य भी सीईओ से मिलीं। उन्होंने कई सुझाव दिए। यीडा दफ्तर दोबारा आकर कई लिखित सुझाव देने की बात कहीं। बीते सप्ताह गुल पनाग भी यीडा दफ्तर आ चुकी हैं। अपने सुझाव प्राधिकरण को दिए थे।