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Noida News: जिम में लिए सप्लीमेंट पहुंचा रहे अस्पताल
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-जिम्स में हर माह पहुंचे रहे 30 मरीज, 70 प्रतिशत को करना पड़ रहा है भर्ती
-ज्यादातर लीवर, किडनी और कुशिंग सिंड्रोम की बीमारी आ रही सामने
-डॉक्टरों ने कहा, बिना सलाह के सप्लीमेंट लेने की प्रवृत्ति पर रोक की जरूरत
आशीष चौरसिया
ग्रेटर नोएडा। जिम में लिए सप्लीमेंट युवाओं को अस्पताल पहुंचा रहा है। अगर आप भी बॉडी बनाने के चक्कर में जिम में बिना डॉक्टरी सलाह के सप्लीमेंट में ग्रेनर, प्रोटीन या फिर क्रेएटीन ले रहे हैं तो सावधान हो जाइए। कहीं आप भी लीवर-किडनी फेल होने के शिकार हो जाएं, या फिर कुशिंग सिंड्रोम से ग्रसित हो जाएं। यह बातें ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हरदीप जोगी ने बताई हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पादों पर समय रहते रोक लगनी बहुत जरूरी है। डॉ. हरदीप जोगी ने बताया कि आज के समय में हर कोई जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में बिना डॉक्टरी सलाह के ही अप्रमाणित ऑनलाइन बिकने वाले या फिर जिम और बाजार में बिकने वाले सप्लीमेंट, पाउडर और कैप्सूल का युवा प्रयोग कर रहे हैं। जिस कारण उनके स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे ही मामले उनके पास हर महीने 20 से 30 आते हैं। जिनमें से 70 मरीजों को भर्ती करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। जोकि काफी चिंताजनक है।
जिम्स में आने वाले मामलों में देखा गया कि अधिकतर में लीवर-किडनी फेल होने की समस्या मिल रही है। इसके अलावा कुशिंग सिंड्रोम की भी बीमारी देखने को मिल रही है। इसके कारण युवाओं में हार्मोनल असुंतलन भी पाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जो भी ऐसे मामले आ रहे हैं जब उन मरीजों से बात की जा रही है तो 90 फीसदी बता रहे हैं कि उन लोगों ने जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में बिना डॉक्टरी सलाह के ही सप्लीमेंट, पाउडर जैसे गेनर, प्रोटीन-क्रेएटीन और कैप्सूल का प्रयोग किया है।
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तीन से छह माह में दिखने लगता है दुष्प्रभाव
उन्होंने बताया कि बिना डॉक्टरी सलाह और अप्रमाणित सप्लीमेंट, पाउडर (गेनर, प्रोटीन व क्रेएटीन) और कैप्सूल लेने वाले युवाओं में करीब तीन से छह महीने में दुष्प्रभाव अलग से ही दिखाई देने लगते हैं या फिर जैसे ही इन सभी चीजों को लेना छोड़ देता है तो 10 से 15 दिन में शरीर पर असर पड़ने लगता है। इस दौरान लोगों में लीवर-किडनी में इंफेक्शन और कुशिंग सिंड्रोम बीमारी का असर दिखाई देने लगता है।-- -- -- -- --
केस-1 जिम्स में अट्टा गुजरान निवासी 23 वर्षीय युवक आकाश (काल्पनिक नाम) को कुशिंग सिंड्रोम के गंभीर लक्षणों के साथ भर्ती किया गया। जिसके चेहरे की सूजन, उच्च रक्तचाप और हार्मोनल असंतुलन शामिल थे। जांच में मिला कि उसने स्टेरॉइड-युक्त सप्लीमेंट का लंबे समय तक सेवन किया था। जिससे न केवल कुशिंग सिंड्रोम हुआ, बल्कि लिवर व किडनी पर भी गहरा प्रभाव पड़ा।
केस-2
सूरजपुर निवासी 26 वर्षीय युवक मनीष (काल्पनिक नाम) जिम्स में भूख कम लगने और कमजोरी लगने की समस्या लेकर आए थे। जांच में पता चला कि लीवर-किडनी में इंफेक्शन हो चुका है। जब उनसे पूंछा गया तो उन्होंने बताया कि एक निजी जिम में सप्लीमेंट का प्रयोग किया था और छोड़ दिया है। हालांकि पहले से अब स्थिति ठीक है, लेकिन उपचार अभी भी चल रहा है।
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यह हैं लक्षण
चेहरे में सूजन आ जाना। त्वचा पर निशाना आने लगना और त्वचा पतली हो जाना। यूरिन में झाग आने लगना। भूख कम लगने लगना। कमजोरी महसूस होने लगना। शरीर में पीलापन आने लगना।
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खतरे
लीवर और किडनी फेल होना। कुशिंग सिंड्रोम जैसे हार्मोनल विकार। हृदय संबंधी रोगों के खतरा।
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सावधानी व सुझाव
सप्लीमेंट्स केवल चिकित्सक या प्रमाणित न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह से लें। एफएसएसएआई जैसे नियामक संस्थाओं से स्वीकृत उत्पादों का ही चयन करें।प्राकृतिक आहार और नियमित व्यायाम को अपनाएं।
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-जिम्स में हर माह पहुंचे रहे 30 मरीज, 70 प्रतिशत को करना पड़ रहा है भर्ती
-ज्यादातर लीवर, किडनी और कुशिंग सिंड्रोम की बीमारी आ रही सामने
-डॉक्टरों ने कहा, बिना सलाह के सप्लीमेंट लेने की प्रवृत्ति पर रोक की जरूरत
आशीष चौरसिया
ग्रेटर नोएडा। जिम में लिए सप्लीमेंट युवाओं को अस्पताल पहुंचा रहा है। अगर आप भी बॉडी बनाने के चक्कर में जिम में बिना डॉक्टरी सलाह के सप्लीमेंट में ग्रेनर, प्रोटीन या फिर क्रेएटीन ले रहे हैं तो सावधान हो जाइए। कहीं आप भी लीवर-किडनी फेल होने के शिकार हो जाएं, या फिर कुशिंग सिंड्रोम से ग्रसित हो जाएं। यह बातें ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हरदीप जोगी ने बताई हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पादों पर समय रहते रोक लगनी बहुत जरूरी है। डॉ. हरदीप जोगी ने बताया कि आज के समय में हर कोई जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में बिना डॉक्टरी सलाह के ही अप्रमाणित ऑनलाइन बिकने वाले या फिर जिम और बाजार में बिकने वाले सप्लीमेंट, पाउडर और कैप्सूल का युवा प्रयोग कर रहे हैं। जिस कारण उनके स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे ही मामले उनके पास हर महीने 20 से 30 आते हैं। जिनमें से 70 मरीजों को भर्ती करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। जोकि काफी चिंताजनक है।
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जिम्स में आने वाले मामलों में देखा गया कि अधिकतर में लीवर-किडनी फेल होने की समस्या मिल रही है। इसके अलावा कुशिंग सिंड्रोम की भी बीमारी देखने को मिल रही है। इसके कारण युवाओं में हार्मोनल असुंतलन भी पाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जो भी ऐसे मामले आ रहे हैं जब उन मरीजों से बात की जा रही है तो 90 फीसदी बता रहे हैं कि उन लोगों ने जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में बिना डॉक्टरी सलाह के ही सप्लीमेंट, पाउडर जैसे गेनर, प्रोटीन-क्रेएटीन और कैप्सूल का प्रयोग किया है।
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तीन से छह माह में दिखने लगता है दुष्प्रभाव
उन्होंने बताया कि बिना डॉक्टरी सलाह और अप्रमाणित सप्लीमेंट, पाउडर (गेनर, प्रोटीन व क्रेएटीन) और कैप्सूल लेने वाले युवाओं में करीब तीन से छह महीने में दुष्प्रभाव अलग से ही दिखाई देने लगते हैं या फिर जैसे ही इन सभी चीजों को लेना छोड़ देता है तो 10 से 15 दिन में शरीर पर असर पड़ने लगता है। इस दौरान लोगों में लीवर-किडनी में इंफेक्शन और कुशिंग सिंड्रोम बीमारी का असर दिखाई देने लगता है।
केस-1 जिम्स में अट्टा गुजरान निवासी 23 वर्षीय युवक आकाश (काल्पनिक नाम) को कुशिंग सिंड्रोम के गंभीर लक्षणों के साथ भर्ती किया गया। जिसके चेहरे की सूजन, उच्च रक्तचाप और हार्मोनल असंतुलन शामिल थे। जांच में मिला कि उसने स्टेरॉइड-युक्त सप्लीमेंट का लंबे समय तक सेवन किया था। जिससे न केवल कुशिंग सिंड्रोम हुआ, बल्कि लिवर व किडनी पर भी गहरा प्रभाव पड़ा।
केस-2
सूरजपुर निवासी 26 वर्षीय युवक मनीष (काल्पनिक नाम) जिम्स में भूख कम लगने और कमजोरी लगने की समस्या लेकर आए थे। जांच में पता चला कि लीवर-किडनी में इंफेक्शन हो चुका है। जब उनसे पूंछा गया तो उन्होंने बताया कि एक निजी जिम में सप्लीमेंट का प्रयोग किया था और छोड़ दिया है। हालांकि पहले से अब स्थिति ठीक है, लेकिन उपचार अभी भी चल रहा है।
यह हैं लक्षण
चेहरे में सूजन आ जाना। त्वचा पर निशाना आने लगना और त्वचा पतली हो जाना। यूरिन में झाग आने लगना। भूख कम लगने लगना। कमजोरी महसूस होने लगना। शरीर में पीलापन आने लगना।
खतरे
लीवर और किडनी फेल होना। कुशिंग सिंड्रोम जैसे हार्मोनल विकार। हृदय संबंधी रोगों के खतरा।
सावधानी व सुझाव
सप्लीमेंट्स केवल चिकित्सक या प्रमाणित न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह से लें। एफएसएसएआई जैसे नियामक संस्थाओं से स्वीकृत उत्पादों का ही चयन करें।प्राकृतिक आहार और नियमित व्यायाम को अपनाएं।