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Noida News: पूर्वांचल में 50 से अधिक रेस जीत चुका है घोड़ा राजा
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कुछ लोग अपने घर पर शानों शौकत के लिए घोड़ा रखते हैं लेकिन कुछ ऐसे होते हैं जो अपने घोड़े को घुड़दौड़ प्रतियोगिता में दौड़ाते हैं। वो घोड़ा अपनी अलग पहचान बनाता हैं। कुछ ऐसा ही किया है, मऊ के राजा घोड़ा ने जिसने बीते दो साल में पूर्वांचल और बिहार में 50 से अधिक रेस प्रतियोगिताओं को जीता है।
नगर के चकमेंहदी निवासी पूर्व एमएलसी दयाराम पाल ने अपने शौक के चलते चार साल पहले एक घोड़ा राजस्थान से मंगवाया। जिसको अपने घर के अस्तबल में रखा। उन्होंने प्यार से उसका नाम राजा रखा। घोड़ा राजा ने बीते दो वर्ष में पूर्वांचल के मऊ, बलिया, गाजीपुर, गोरखपुर, आजमगढ़, देवरिया, जौनपुर, बनारस, चंदौली और बिहार में कई स्थानों पर पर घुड़दौड़ प्रतियोगिता को जीत चुका है। प्रतियोगिता जीतने के बाद राजा को प्यार से लोगों ने मऊ एक्सप्रेस नाम दिया। जिससे वे मशहूर होने लगा। दौड़ प्रतियोगिताओं में उसे देखने काफी दर्शक पहुंचते हैं।
सिंधी नस्ल का घोड़ा राजा रोज पीता है आठ लीटर दूध
61 इंच का घोड़ा राजा रोज आठ लीटर दूध पीता है। इसके साथ गुड़, काजू और बादाम को मिलाकर 200 ग्राम मेवा, दो किलो जई, कच्चा चना चार किलो सुबह-शाम खाता है। उसके खान-पान का विशेष ख्याल रखा जाता है।
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दो घुड़सवार करते हैं रोज सेवा
मऊ एक्सप्रेस के नाम से मशहूर राजा घोड़ा की सेवा के लिए पूर्व एमएलसी ने दो घुड़सवार धर्मराज और श्रवण को रखा है। जो प्रतिदिन घोड़े की मालिश और उसके खानपान का ध्यान रखते हैं। अछार निवासी धर्मराज और अहिरौली निवासी घुड़सवार श्रवण कई रेस प्रतियोगिताओं में राजा को दौड़ाकर रेस के विजेता बने हैं। उन्होंने बताया कि घोड़े के साथ उनका नाम घुड़सवार में आने से उन्हें भी शोहरत मिलती है।
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नगर के चकमेंहदी निवासी पूर्व एमएलसी दयाराम पाल ने अपने शौक के चलते चार साल पहले एक घोड़ा राजस्थान से मंगवाया। जिसको अपने घर के अस्तबल में रखा। उन्होंने प्यार से उसका नाम राजा रखा। घोड़ा राजा ने बीते दो वर्ष में पूर्वांचल के मऊ, बलिया, गाजीपुर, गोरखपुर, आजमगढ़, देवरिया, जौनपुर, बनारस, चंदौली और बिहार में कई स्थानों पर पर घुड़दौड़ प्रतियोगिता को जीत चुका है। प्रतियोगिता जीतने के बाद राजा को प्यार से लोगों ने मऊ एक्सप्रेस नाम दिया। जिससे वे मशहूर होने लगा। दौड़ प्रतियोगिताओं में उसे देखने काफी दर्शक पहुंचते हैं।
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सिंधी नस्ल का घोड़ा राजा रोज पीता है आठ लीटर दूध
61 इंच का घोड़ा राजा रोज आठ लीटर दूध पीता है। इसके साथ गुड़, काजू और बादाम को मिलाकर 200 ग्राम मेवा, दो किलो जई, कच्चा चना चार किलो सुबह-शाम खाता है। उसके खान-पान का विशेष ख्याल रखा जाता है।
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दो घुड़सवार करते हैं रोज सेवा
मऊ एक्सप्रेस के नाम से मशहूर राजा घोड़ा की सेवा के लिए पूर्व एमएलसी ने दो घुड़सवार धर्मराज और श्रवण को रखा है। जो प्रतिदिन घोड़े की मालिश और उसके खानपान का ध्यान रखते हैं। अछार निवासी धर्मराज और अहिरौली निवासी घुड़सवार श्रवण कई रेस प्रतियोगिताओं में राजा को दौड़ाकर रेस के विजेता बने हैं। उन्होंने बताया कि घोड़े के साथ उनका नाम घुड़सवार में आने से उन्हें भी शोहरत मिलती है।