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हाईकोर्ट ने वर्चुअल सुनवाई के लिंक मीडिया को देने पर लगाई रोक
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये होने वाली सुनवाई के लिंक मीडिया तथा बाहरी लोगों को देने पर सोमवार को रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने कहा कि यह लिंक केवल याचिका से जुड़े वकीलों तथा जांच अधिकारी को ही दिए जाएं।
न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने अपने निर्देश में ये भी स्पष्ट दिया कि कोई भी वकील सुनवाई का लिंक उनके लिए पेश होने वाले वरिष्ठों तथा अन्य वकीलों के अलावा किसी के साथ साझा नहीं करेंगे। न्यायमूर्ति कैत ने निर्देश दिया कि रजिस्टरी अथवा कोर्ट मास्टर वर्चुअल सुनवाई का लिंक किसी बाहरी व्यक्ति या मीडिया संवाददाता को नहीं देंगे। यह लिंक केवल संबंधित वकीलों तथा जांच अधिकारी को ही दिया जाएगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि इसके अलावा एफआईआर खारिज करने की मांग वाली याचिका दायर करने वाले याची या कोर्ट के आदेश पर ही सुनवाई में शामिल होने के लिए लिंक दिया जाएगा। कोर्ट ने यह आदेश एक मामले की सुनवाई में बाहरी लोगों के शामिल होने तथा लगातार उनकी बातचीत से उत्पन्न बाधा के बाद दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि केस की सुनवाई के दौरान बेहद अप्रिय स्थित सामने आई क्योंकि कई अज्ञात लोग लिंक के जरिये इसमें शामिल हो गए और यह लोग लगातार बात कर रहे थे जिससे सुनवाई और वकीलों की दलीलें सुनने में बाधा हो रही थी।
हाईकोर्ट ने कोरोना महामारी के मद्देनजर 20 जून को आम लोगों को भी वर्चुअल सुनवाई देखने का अधिकार दिया था और इसमें शामिल होने के लिए लिंक दिये जाते थे। हाईकोर्ट ने 25 मार्च को हुए लॉकडाउन के बाद व्यक्तिगत सुनवाई पर प्रतिबंध लगा दिया था। - एजेंसी
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न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने अपने निर्देश में ये भी स्पष्ट दिया कि कोई भी वकील सुनवाई का लिंक उनके लिए पेश होने वाले वरिष्ठों तथा अन्य वकीलों के अलावा किसी के साथ साझा नहीं करेंगे। न्यायमूर्ति कैत ने निर्देश दिया कि रजिस्टरी अथवा कोर्ट मास्टर वर्चुअल सुनवाई का लिंक किसी बाहरी व्यक्ति या मीडिया संवाददाता को नहीं देंगे। यह लिंक केवल संबंधित वकीलों तथा जांच अधिकारी को ही दिया जाएगा।
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कोर्ट ने यह भी कहा कि इसके अलावा एफआईआर खारिज करने की मांग वाली याचिका दायर करने वाले याची या कोर्ट के आदेश पर ही सुनवाई में शामिल होने के लिए लिंक दिया जाएगा। कोर्ट ने यह आदेश एक मामले की सुनवाई में बाहरी लोगों के शामिल होने तथा लगातार उनकी बातचीत से उत्पन्न बाधा के बाद दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि केस की सुनवाई के दौरान बेहद अप्रिय स्थित सामने आई क्योंकि कई अज्ञात लोग लिंक के जरिये इसमें शामिल हो गए और यह लोग लगातार बात कर रहे थे जिससे सुनवाई और वकीलों की दलीलें सुनने में बाधा हो रही थी।
हाईकोर्ट ने कोरोना महामारी के मद्देनजर 20 जून को आम लोगों को भी वर्चुअल सुनवाई देखने का अधिकार दिया था और इसमें शामिल होने के लिए लिंक दिये जाते थे। हाईकोर्ट ने 25 मार्च को हुए लॉकडाउन के बाद व्यक्तिगत सुनवाई पर प्रतिबंध लगा दिया था। - एजेंसी