{"_id":"5f35831a8ebc3e3cf67f6f03","slug":"high-court-impose-50-lack-environment-compensation-on-dda-noida-news-noi5296558110","type":"story","status":"publish","title_hn":"पर्यावरण को क्षति पहुंचाने के लिए डीडीए पर हाईकोर्ट ने लगाया 50 लाख का हर्जाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पर्यावरण को क्षति पहुंचाने के लिए डीडीए पर हाईकोर्ट ने लगाया 50 लाख का हर्जाना
विज्ञापन
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कथित रूप से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए 50 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) के पास जमा कराने का निर्देश डीडीए को दिया है। मामला समालखा- द्वारका रोड पर बरसाती नाले के पानी को प्रदूषित करने से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति नवीन चावला ने जुर्माना राशि दो सप्ताह के भीतर जमा कराने का निर्देश दिया है। इस राशि के संबंध में फैसला डीडीए की याचिका के निपटारे के अनुरूप किया जाएगा। हाईकोर्ट ने यह निर्देश डीडीए की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। डीडीए ने डीपीसीसी के 10 जुलाई के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उस पर नाले में प्रदूषण के लिए 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
याचिका में डीपीसीसी के फैसले को अवैध, मनमाना तथा अतार्किक बताया गया है। डीडीए का तर्क है कि डीपीसीसी को पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत जुर्माना या हर्जाना लगाने का अधिकार नहीं है। इसलिए जुर्माने से संबंधित आदेश को रद किया जाए। हाईकोर्ट ने डीडीए की याचिका पर डीपीसीसी से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी।
विज्ञापन
डीडीए का कहना है कि उस पर डीपीसीसी ने यह जुर्माना पर्यावरण संरक्षण कानून तथा जल अधिनियम के तहत लगाया है जबकि इनमें से कोई भी कानून डीपीसीसी को जुर्माना या हर्जाना लगाने का अधिकार नहीं देता। इसके अलावा 50 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाने के लिए उचित कारण नहीं बताया गया है।
याचिका में डीडीए ने कहा यह मामला समालखा से भरथल रोड क्षेत्र से जुड़ा है, वह उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। इस क्षेत्र में सीवेज के निस्तारण की जिम्मेदारी दक्षिण दिल्ली नगर निगम तथा दिल्ली जल बोर्ड की है। वह एनजीटी के आदेश पर दिसंबर 2019 में ही समालखा-द्वारका रोड के बरसाती नाले पर लगे सभी वर्षा जल संचयन संयंत्र बंद कर चुका है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति नवीन चावला ने जुर्माना राशि दो सप्ताह के भीतर जमा कराने का निर्देश दिया है। इस राशि के संबंध में फैसला डीडीए की याचिका के निपटारे के अनुरूप किया जाएगा। हाईकोर्ट ने यह निर्देश डीडीए की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। डीडीए ने डीपीसीसी के 10 जुलाई के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उस पर नाले में प्रदूषण के लिए 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
विज्ञापन
याचिका में डीपीसीसी के फैसले को अवैध, मनमाना तथा अतार्किक बताया गया है। डीडीए का तर्क है कि डीपीसीसी को पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत जुर्माना या हर्जाना लगाने का अधिकार नहीं है। इसलिए जुर्माने से संबंधित आदेश को रद किया जाए। हाईकोर्ट ने डीडीए की याचिका पर डीपीसीसी से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी।
विज्ञापन
डीडीए का कहना है कि उस पर डीपीसीसी ने यह जुर्माना पर्यावरण संरक्षण कानून तथा जल अधिनियम के तहत लगाया है जबकि इनमें से कोई भी कानून डीपीसीसी को जुर्माना या हर्जाना लगाने का अधिकार नहीं देता। इसके अलावा 50 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाने के लिए उचित कारण नहीं बताया गया है।
याचिका में डीडीए ने कहा यह मामला समालखा से भरथल रोड क्षेत्र से जुड़ा है, वह उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। इस क्षेत्र में सीवेज के निस्तारण की जिम्मेदारी दक्षिण दिल्ली नगर निगम तथा दिल्ली जल बोर्ड की है। वह एनजीटी के आदेश पर दिसंबर 2019 में ही समालखा-द्वारका रोड के बरसाती नाले पर लगे सभी वर्षा जल संचयन संयंत्र बंद कर चुका है।