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हाईकोर्ट ने सौतेली बेटी से दुष्कर्म के दोषी एचआईवी पीड़ित की सजा रखी बरकरार

Wed, 09 Dec 2020 12:16 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 09 Dec 2020 12:16 AM IST
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high court hold the conviction of HIV patient in rape with step daughter
नई दिल्ली। एचआईवी पीड़ित शख्स द्वारा दुष्कर्म करने से हत्या के प्रयास का मामला नहीं बनेगा। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी नाबालिग सौतेली बेटी से दुष्कर्म के दोषी की सजा को बरकरार रखते हुए की है। हालांकि कोर्ट ने दुष्कर्म की सजा को बरकरार रखा लेकिन हत्या के प्रयास के आरोप से याची को बरी कर दिया।
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निचली अदालत ने दुष्कर्म व हत्या के प्रयास में याची को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। अदालत ने कहा कि दोषी को पता था कि वह एचआईवी पीड़ित है और उसके दुष्कर्म करने से पीड़िता को भी संक्रमण हो सकता जिससे उसकी मौत भी हो सकती है। इसलिए दोषी पर हत्या के प्रयास का मामला भी बनता है।
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वहीं हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याची पर हत्या के प्रयास का मामला नहीं बनता क्योंकि उसकी मंशा पीड़िता को मारने की नहीं थी। इसके अलावा पुलिस ने आरोपपत्र के साथ ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया कि पीड़िता को एड्स हुआ या वह एचआईवी संक्रमित हुई। हालांकि वह एचआईवी जांच में निगेटिव पाई गई थी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के इस मुद्दे पर फैसले को खारिज कर दिया।
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न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने अपने फैसले में कहा कि हाईकोर्ट इस मुद्दे पर निचली अदालत के विचार से सहमति नहीं रखता कि याची हत्या के प्रयास का दोषी है। इसे मानने का अर्थ होगा कि एचआईवी पीड़ित शख्स द्वारा दुष्कर्म का प्रत्येक मामले में हत्या के प्रयास की भी सजा दी जाएगी चाहे पीड़ित की इसमें सहमति थी या नहीं।

निचली अदालत ने याची को 2015 में 15 साल की सौतेली बेटी से दुष्कर्म व हत्या के प्रयास का दोषी मानते हुए कैद की सजा सुनाई थी। इससे पहले पीड़िता का जबरन गर्भपात कराने के अपराध के लिए याची को 2012 में 25 साल कैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने इस आरोप से भी याची को बरी कर दिया। अब उसे दुष्कर्म के अपराध के लिए 10 साल की सजा काटनी होगी। -एजेंसी
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