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26 सौ करोड़ के टैक्स मामले में डायल पर कड़ी कार्रवाई न करने का निर्देश
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने 26 सौ करोड़ रुपये के टैक्स मामले में दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली छावनी बोर्ड (डीसीबी) को उस पर फिलहाल कोई कड़ी कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है। डायल ने 2016-19 की अवधि के लिए बोर्ड की ओर से भेजे गए 26 सौ करोड़ रुपये के संपत्ति कर नोटिस को चुनौती दी है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल तथा न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की खंडपीठ ने डायल की याचिका पर जवाब के लिए बोर्ड को एक और सप्ताह का समय देते हुए उक्त निर्देश दिया है। खंडपीठ ने इस बात पर गौर किया कि याचिका पर केंद्र तथा बोर्ड ने जवाब देने के लिए समय मांगा है। खंडपीठ ने समय प्रदान करते हुए सुनवाई के लिए 14 सितंबर की तारीख तय की है।
खंडपीठ ने केंद्र व बोर्ड को 22 जुलाई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था लेकिन तब बोर्ड के 15 जून के आदेश पर कोई अंतरिम आदेश जारी करने या जुर्माना न भरने पर कड़ी कार्रवाई पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था। डायल ने याचिका दायर कर 2589 करोड़ रुपये के टैक्स नोटिस को रद करने की मांग की है। याची ने यह घोषणा करने की मांग है कि आईजीआई एयरपोर्ट की जमीन दिल्ली छावनी बोर्ड की नहीं है।
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डायल ने इसके अलावा बोर्ड के उन पत्रों को रद करने की मांग की है जो उसने उस जमीन पर कर के संबंध में जारी किए हैं जो इंटरनेशनल एयरपोर्ट अथोरिटी ऑफ इंडिया ने 1940 में डिफेंस एस्टेट अथोरिटीज (अब डीसीबी) से 4.61 करोड़ रुपये का भुगतान कर खरीदी थी।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल तथा न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की खंडपीठ ने डायल की याचिका पर जवाब के लिए बोर्ड को एक और सप्ताह का समय देते हुए उक्त निर्देश दिया है। खंडपीठ ने इस बात पर गौर किया कि याचिका पर केंद्र तथा बोर्ड ने जवाब देने के लिए समय मांगा है। खंडपीठ ने समय प्रदान करते हुए सुनवाई के लिए 14 सितंबर की तारीख तय की है।
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खंडपीठ ने केंद्र व बोर्ड को 22 जुलाई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था लेकिन तब बोर्ड के 15 जून के आदेश पर कोई अंतरिम आदेश जारी करने या जुर्माना न भरने पर कड़ी कार्रवाई पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था। डायल ने याचिका दायर कर 2589 करोड़ रुपये के टैक्स नोटिस को रद करने की मांग की है। याची ने यह घोषणा करने की मांग है कि आईजीआई एयरपोर्ट की जमीन दिल्ली छावनी बोर्ड की नहीं है।
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डायल ने इसके अलावा बोर्ड के उन पत्रों को रद करने की मांग की है जो उसने उस जमीन पर कर के संबंध में जारी किए हैं जो इंटरनेशनल एयरपोर्ट अथोरिटी ऑफ इंडिया ने 1940 में डिफेंस एस्टेट अथोरिटीज (अब डीसीबी) से 4.61 करोड़ रुपये का भुगतान कर खरीदी थी।