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हाईकोर्ट ने जेएनयू को दिया शिक्षकों के दो पदों पर नियुक्ति न करने का निर्देश
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने जेएनयू को प्रोफेसर तथा एसोसिएट प्रोफेसर के उन दो पदों पर फिलहाल नियुक्ति न करने का निर्देश दिया है क्योंकि कुछ शिक्षकों ने नियुक्ति को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने यह निर्देश दो सहायक प्रोफसरों की ओर से दायर याचिका पर दिया है। इनका कहना है कि वह इन पदों पर आरक्षित श्रेणी में आवेदन करना चाहते थे लेकिन इनमें से एक पद को एससी से एसटी श्रेणी तथा दूसरे को अनारक्षित में बदल दिया गया।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल तथा न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की खंडपीठ ने यह निर्देश एकल पीठ के विरोध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। खंडपीठ ने एकल पीठ से याचिका पर सात अक्तूबर के बजाय 31 अगस्त से बिना किसी गैरजरूरी स्थगन के सुनवाई का आग्रह किया। एकल पीठ ने याचिका पर जेएनयू से जवाब मांगते हुए सुनवाई सात अक्तूबर के लिए तय की थी। हालांकि याचिका पर कोई स्टे नहीं दिया था।
खंडपीठ ने याचिका पर दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है और इसके एक सप्ताह में याचिकाकर्ता शिक्षकों को अपना जवाब दाखिल करना है। इनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिबल ने कहा कि जेएनयू के 2017 के विज्ञापन में जो पद आरक्षित श्रेणी में थे। वही पद 2019 के विज्ञापन में एसटी तथा अनारक्षित श्रेणी में दिखाए गए हैं।
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याची के वकील ने कहा कि इन पदों पर नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की बैठक कुछ दिन में होने वाली है और अगर ये नियुक्ति कर दी गई तो यह याचिका बेकार हो जाएगी। सहायक प्रोफेसरों ने याचिका दायर कर 19 अगस्त 2019 के नियुक्ति के विज्ञापनों को चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार वह इन आरक्षित पदों पर नियुक्ति के लिए योग्य थे लेकिन इन पदों की श्रेणी में परिवर्तन से उनका उम्मीदवारी प्रभावित हुई है। एकल पीठ के समक्ष जेएनयू की ओर से केंद्र की स्थाई अधिवक्ता ने नोटिस स्वीकार करते हुए कहा था कि पदों की श्रेणी में परिवर्तन इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2017 के एक निर्णय के अनुसार किया गया है।
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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल तथा न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की खंडपीठ ने यह निर्देश एकल पीठ के विरोध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। खंडपीठ ने एकल पीठ से याचिका पर सात अक्तूबर के बजाय 31 अगस्त से बिना किसी गैरजरूरी स्थगन के सुनवाई का आग्रह किया। एकल पीठ ने याचिका पर जेएनयू से जवाब मांगते हुए सुनवाई सात अक्तूबर के लिए तय की थी। हालांकि याचिका पर कोई स्टे नहीं दिया था।
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खंडपीठ ने याचिका पर दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है और इसके एक सप्ताह में याचिकाकर्ता शिक्षकों को अपना जवाब दाखिल करना है। इनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिबल ने कहा कि जेएनयू के 2017 के विज्ञापन में जो पद आरक्षित श्रेणी में थे। वही पद 2019 के विज्ञापन में एसटी तथा अनारक्षित श्रेणी में दिखाए गए हैं।
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याची के वकील ने कहा कि इन पदों पर नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की बैठक कुछ दिन में होने वाली है और अगर ये नियुक्ति कर दी गई तो यह याचिका बेकार हो जाएगी। सहायक प्रोफेसरों ने याचिका दायर कर 19 अगस्त 2019 के नियुक्ति के विज्ञापनों को चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार वह इन आरक्षित पदों पर नियुक्ति के लिए योग्य थे लेकिन इन पदों की श्रेणी में परिवर्तन से उनका उम्मीदवारी प्रभावित हुई है। एकल पीठ के समक्ष जेएनयू की ओर से केंद्र की स्थाई अधिवक्ता ने नोटिस स्वीकार करते हुए कहा था कि पदों की श्रेणी में परिवर्तन इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2017 के एक निर्णय के अनुसार किया गया है।