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Noida News: पांच फीसदी के स्लैब में आया हैंडीक्राफ्ट उद्योग, निर्यातकों की बढ़ी उम्मीद
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कारोबारी आरिफ खान
- जिले से प्रतिवर्ष 1100 करोड़ रुपये से अधिक का होता है विदेश को निर्यात
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। केंद्र सरकार ने जीएसटी में कई सुधार किए हैं। विभिन्न उत्पादों पर लगने वाले टैक्स की दर को कम किया है। दो स्लैब को खत्म कर आमजन और उद्योग को राहत दी है। नए जीएसटी में हैंडीक्राफ्ट उत्पादों पर लगने वाला टैक्स अब पांच फीसदी कर दिया गया है। इससे निर्यातकों को राहत की उम्मीद है। हालांकि अभी भी उन्हें सरकार से कुछ और कदम उठाने की आस है।
जिले का वुडन हैंडीक्राफ्ट उद्योग टैरिफ की मार से जूझ रहा है। जिले से विदेशों को करीब 1100 करोड़ रुपये का निर्यात होता है। ट्रंप के टैरिफ से निर्यातकों को झटका लगा है। उत्पाद महंगा हुआ है। खरीदार पीछे हट रहे हैं। नए ऑर्डर मिलने में परेशानी हो रही है। इसी बीच सरकार ने जीएसटी में 12 और 18 फीसदी के स्लैब खत्म किया है। इससे कई उत्पाद जो पहले 12 फीसदी के स्लैब में आते थे, वे अब पांच फीसदी स्लैब में किए गए हैं। इससे जिले के निर्यातकों को राहत मिली है। इसके अलावा उनकी एक और मांग है। हैंडीक्राफ्ट उद्योगपतियों का कहना है कि सरकार कच्चे माल पर लगने वाले टैक्स को भी कम करें। इसके अलावा फर्नीचर पर अभी भी 18 फीसदी टैक्स है। इसे कम किए जाने की दरकार है।
- बोले कारोबारी
- सरकार ने जीएसटी को कम किया है। इससे फायदा होगा। घरेलू बाजार में मांग बढ़ेगी। टैरिफ के बाद यह एक अच्छी पहल है। जिले के वुडकार्विंग उद्योग को उबरने में सहूलियत होगी। - आरिफ खान, महासचिव हैंडीक्राफ्ट आर्टीजन एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन
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- सरकार ने तैयार माल पर तो जीएसटी कम की है, लेकिन कच्चे माल पर अभी भी टैक्स की दर अधिक है। सरकार को चाहिए कि वह कच्चे माल पर भी टैक्स की दर को कम करे। चीन तकनीक और इनोवेशन में हमसे कई वर्ष आगे हैं। हमें भी नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है। - साबिर अली खान, निर्यातक
- पहले जीएसटी की दर बढ़ने से उद्योग को नुकसान हुआ था। सरकार ने टैक्स की दर कम की है। इससे उद्योग को निश्चय ही फायदा होगा। फर्नीचर पर भी सरकार को टैक्स की दर कम करनी चाहिए। इससे मांग में बढ़ोत्तरी होगी। त्योहारी सीजन में इससे फायदा होगा। - शारिक सिद्दकी, निर्यातक
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। केंद्र सरकार ने जीएसटी में कई सुधार किए हैं। विभिन्न उत्पादों पर लगने वाले टैक्स की दर को कम किया है। दो स्लैब को खत्म कर आमजन और उद्योग को राहत दी है। नए जीएसटी में हैंडीक्राफ्ट उत्पादों पर लगने वाला टैक्स अब पांच फीसदी कर दिया गया है। इससे निर्यातकों को राहत की उम्मीद है। हालांकि अभी भी उन्हें सरकार से कुछ और कदम उठाने की आस है।
जिले का वुडन हैंडीक्राफ्ट उद्योग टैरिफ की मार से जूझ रहा है। जिले से विदेशों को करीब 1100 करोड़ रुपये का निर्यात होता है। ट्रंप के टैरिफ से निर्यातकों को झटका लगा है। उत्पाद महंगा हुआ है। खरीदार पीछे हट रहे हैं। नए ऑर्डर मिलने में परेशानी हो रही है। इसी बीच सरकार ने जीएसटी में 12 और 18 फीसदी के स्लैब खत्म किया है। इससे कई उत्पाद जो पहले 12 फीसदी के स्लैब में आते थे, वे अब पांच फीसदी स्लैब में किए गए हैं। इससे जिले के निर्यातकों को राहत मिली है। इसके अलावा उनकी एक और मांग है। हैंडीक्राफ्ट उद्योगपतियों का कहना है कि सरकार कच्चे माल पर लगने वाले टैक्स को भी कम करें। इसके अलावा फर्नीचर पर अभी भी 18 फीसदी टैक्स है। इसे कम किए जाने की दरकार है।
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- बोले कारोबारी
- सरकार ने जीएसटी को कम किया है। इससे फायदा होगा। घरेलू बाजार में मांग बढ़ेगी। टैरिफ के बाद यह एक अच्छी पहल है। जिले के वुडकार्विंग उद्योग को उबरने में सहूलियत होगी। - आरिफ खान, महासचिव हैंडीक्राफ्ट आर्टीजन एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन
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- सरकार ने तैयार माल पर तो जीएसटी कम की है, लेकिन कच्चे माल पर अभी भी टैक्स की दर अधिक है। सरकार को चाहिए कि वह कच्चे माल पर भी टैक्स की दर को कम करे। चीन तकनीक और इनोवेशन में हमसे कई वर्ष आगे हैं। हमें भी नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है। - साबिर अली खान, निर्यातक
- पहले जीएसटी की दर बढ़ने से उद्योग को नुकसान हुआ था। सरकार ने टैक्स की दर कम की है। इससे उद्योग को निश्चय ही फायदा होगा। फर्नीचर पर भी सरकार को टैक्स की दर कम करनी चाहिए। इससे मांग में बढ़ोत्तरी होगी। त्योहारी सीजन में इससे फायदा होगा। - शारिक सिद्दकी, निर्यातक

कारोबारी आरिफ खान

कारोबारी आरिफ खान