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पारिवारिक विवाद सुलझाना पुलिस के लिए कठिन चुनौतियों में से एक: लक्ष्मी सिंह
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। घर का विवाद जब थाने की चौखट तक पहुंचता है तो मामला सिर्फ कानून का नहीं रह जाता, उससे रिश्ते, बच्चों का भविष्य और परिवार का सुकून भी जुड़ जाता है। ऐसे मामलों में हर विवाद का समाधान कार्रवाई नहीं, कई बार बातचीत और समझदारी से भी निकल सकता है। इसी सोच के साथ शारदा यूनिवर्सिटी और गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट की पहल फैमिली डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन क्लिनिक (एफडीआरसी) छह साल से परिवारों के बीच सुलह की कोशिश कर रही है।
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने कहा कि पारिवारिक विवादों का सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है। काउंसलिंग और मध्यस्थता के जरिए सम्मान और शांति बहाल करने की कोशिश एफडीआरसी को उम्मीद की पहल बनाती है। वहीं पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा कि पारिवारिक और वैवाहिक विवाद सुलझाना पुलिस के लिए सबसे कठिन चुनौतियों में से एक है। अपराध के मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई से रास्ता निकल सकता है, लेकिन परिवार के विवाद में लोगों को फिर से बातचीत की मेज तक लाना जरूरी होता है। इसके लिए सहानुभूति, धैर्य और अलग-अलग विशेषज्ञों के सहयोग की जरूरत होती है। इस दौरान प्रो चांसलर वाईके गुप्ता, डीसीपी सुनीति, डीन डॉ. ऋषिकेश दवे समेत फैकल्टी, स्टाफ और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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ग्रेटर नोएडा। घर का विवाद जब थाने की चौखट तक पहुंचता है तो मामला सिर्फ कानून का नहीं रह जाता, उससे रिश्ते, बच्चों का भविष्य और परिवार का सुकून भी जुड़ जाता है। ऐसे मामलों में हर विवाद का समाधान कार्रवाई नहीं, कई बार बातचीत और समझदारी से भी निकल सकता है। इसी सोच के साथ शारदा यूनिवर्सिटी और गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट की पहल फैमिली डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन क्लिनिक (एफडीआरसी) छह साल से परिवारों के बीच सुलह की कोशिश कर रही है।
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने कहा कि पारिवारिक विवादों का सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है। काउंसलिंग और मध्यस्थता के जरिए सम्मान और शांति बहाल करने की कोशिश एफडीआरसी को उम्मीद की पहल बनाती है। वहीं पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा कि पारिवारिक और वैवाहिक विवाद सुलझाना पुलिस के लिए सबसे कठिन चुनौतियों में से एक है। अपराध के मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई से रास्ता निकल सकता है, लेकिन परिवार के विवाद में लोगों को फिर से बातचीत की मेज तक लाना जरूरी होता है। इसके लिए सहानुभूति, धैर्य और अलग-अलग विशेषज्ञों के सहयोग की जरूरत होती है। इस दौरान प्रो चांसलर वाईके गुप्ता, डीसीपी सुनीति, डीन डॉ. ऋषिकेश दवे समेत फैकल्टी, स्टाफ और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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