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यूक्रेन से लौटी ग्रेनो की छात्रा ने कहा,खत्म हो गई थी वापसी की उम्मीद
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एयरपोर्ट पर बेटी को गले लगाकर भावुक होती संस्कृति की माँ।
- फोटो : Grnoida
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ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो वेस्ट की हैबिटेट पंचतत्व सोसाइटी निवासी संस्कृति सिंह बुधवार को यूक्रेन से लौट आई। माता-पिता बेटी को लेने दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे। जैसे ही संस्कृति एयरपोर्ट से बाहर निकली तो मां संगीता सिंह ने बेटी को गले लगा लिया। संस्कृति और मां दोनों भावुक हो गए। संस्कृति ने कहा कि रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचकर एक पल ऐसा लगा था कि वह वापस कभी घर नहीं जा सकेगी।
संस्कृति सिंह यूक्रेन के इवोना शहर में थी। रूस का हमला होने के बाद वह विश्वविद्यालय के हॉस्टल में थी। संस्कृति ने बताया कि 26 फरवरी की सुबह रोमानिया बॉर्डर पर पहुंच गई थी। बॉर्डर पर बड़ी संख्या में लोग थे। तब बॉर्डर भारतीय छात्रों के लिए बंद था। उन्हें बताया गया था कि बॉर्डर अगले दिन खुलेगा। तब ऐसा लगने लगा था कि वह घर वापस नहीं पहुंच सकेंगी। लेकिन कंस्लटेंट कंपनी के डॉ. मसूर अहमद दूतावास से बातचीत कर रहे थे। रविवार की सुबह बॉर्डर पार करने के बाद उसकी जान में जान आई। संस्कृति ने बताया कि बॉर्डर पर रोमानिया के लोगों ने काफी मदद की। वहां तापमान माइनस 6 डिग्री तक था। उसकी तैयारी नहीं थी। रोमानिया के लोग बॉर्डर पर भारतीय छात्रों को कंबल उपलब्ध करा रहे थे। साथ ही खाना, चाय और पानी भी उपलब्ध कराया।
टीम बनाकर जरूरतों को किया था पूरा, 100 रुपये में मिल रहा था पानी
संस्कृति के मुताबिक इवोना शहर में हमले का ज्यादा असर नहीं था। केवल एयरपोर्ट बंद कर दिया गया था। हमला होने के बाद मेस में खाना बनना बंद हो गया था। दुकान और एटीएम पर लंबी लाइन लगी थी। इसे देखते हुए विद्यार्थियों ने अलग-अलग ग्रुप बनाए। हर ग्रुप को अलग-अलग काम करने की जिम्मेदारी दी। किसी को खाना बनाने तो किसी को बाजार से सामान लाने की जिम्मेदारी दी थी। पानी महंगा हो गया था। सामान्य तौर पर पांच लीटर पानी की बोतल 40 से 45 रुपये मिलती थी, लेकिन वह 100 रुपये से अधिक की हो गई थी।
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माता पिता को देती थी दिलासा
संस्कृति ने बताया कि फोन पर माता-पिता से बातचीत में हालात के समान्य होेने की बात बताती थी। हालांकि मां इसे सच नहीं मानती थी। माता-पिता को हर बार दिलासा देती थी। ताकि वो परेशान नहीं हो। वहीं बेटी के घर आने की खुशी में मां संगीता सिंह व पिता उमेश ने घर को सजाया। तिलक लगाकर संस्कृति का घर में स्वागत किया। उसके बाद शाम को मंदिर जाकर भगवान का आशीर्वाद लिया। पिता उमेश सिंह का कहना है कि बेटी के आने की खुशी में रविवार को यज्ञ किया जाएगा। उसके बाद भंडारा करेंगे। उधर सोसाइटी के लोग भी संस्कृति के आने से काफी खुश है।
व्यवस्था में सुधार की जरूरत, 10 घंटे तक नहीं मिला खाना
संस्कृति मंगलवार दोपहर 1 बजे रोमानिया के एयरपोर्ट पर पहुंच गई थी। चार से पांच घंटे बाहर की खड़ी रही। अंदर पहुंचने पर भी काफी समय लगा। करीब दस बजे तक वहां खाने नहीं मिला। रात दस बजे अधिकारियों की तरफ से खाना दिया गया। एयरपोर्ट पर खाना था, लेकिन ज्यादा विकल्प नहीं थे। सरकार को इसमें सुधार करना चाहिए। वहीं शेल्टर होम में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।
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संस्कृति सिंह यूक्रेन के इवोना शहर में थी। रूस का हमला होने के बाद वह विश्वविद्यालय के हॉस्टल में थी। संस्कृति ने बताया कि 26 फरवरी की सुबह रोमानिया बॉर्डर पर पहुंच गई थी। बॉर्डर पर बड़ी संख्या में लोग थे। तब बॉर्डर भारतीय छात्रों के लिए बंद था। उन्हें बताया गया था कि बॉर्डर अगले दिन खुलेगा। तब ऐसा लगने लगा था कि वह घर वापस नहीं पहुंच सकेंगी। लेकिन कंस्लटेंट कंपनी के डॉ. मसूर अहमद दूतावास से बातचीत कर रहे थे। रविवार की सुबह बॉर्डर पार करने के बाद उसकी जान में जान आई। संस्कृति ने बताया कि बॉर्डर पर रोमानिया के लोगों ने काफी मदद की। वहां तापमान माइनस 6 डिग्री तक था। उसकी तैयारी नहीं थी। रोमानिया के लोग बॉर्डर पर भारतीय छात्रों को कंबल उपलब्ध करा रहे थे। साथ ही खाना, चाय और पानी भी उपलब्ध कराया।
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टीम बनाकर जरूरतों को किया था पूरा, 100 रुपये में मिल रहा था पानी
संस्कृति के मुताबिक इवोना शहर में हमले का ज्यादा असर नहीं था। केवल एयरपोर्ट बंद कर दिया गया था। हमला होने के बाद मेस में खाना बनना बंद हो गया था। दुकान और एटीएम पर लंबी लाइन लगी थी। इसे देखते हुए विद्यार्थियों ने अलग-अलग ग्रुप बनाए। हर ग्रुप को अलग-अलग काम करने की जिम्मेदारी दी। किसी को खाना बनाने तो किसी को बाजार से सामान लाने की जिम्मेदारी दी थी। पानी महंगा हो गया था। सामान्य तौर पर पांच लीटर पानी की बोतल 40 से 45 रुपये मिलती थी, लेकिन वह 100 रुपये से अधिक की हो गई थी।
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माता पिता को देती थी दिलासा
संस्कृति ने बताया कि फोन पर माता-पिता से बातचीत में हालात के समान्य होेने की बात बताती थी। हालांकि मां इसे सच नहीं मानती थी। माता-पिता को हर बार दिलासा देती थी। ताकि वो परेशान नहीं हो। वहीं बेटी के घर आने की खुशी में मां संगीता सिंह व पिता उमेश ने घर को सजाया। तिलक लगाकर संस्कृति का घर में स्वागत किया। उसके बाद शाम को मंदिर जाकर भगवान का आशीर्वाद लिया। पिता उमेश सिंह का कहना है कि बेटी के आने की खुशी में रविवार को यज्ञ किया जाएगा। उसके बाद भंडारा करेंगे। उधर सोसाइटी के लोग भी संस्कृति के आने से काफी खुश है।
व्यवस्था में सुधार की जरूरत, 10 घंटे तक नहीं मिला खाना
संस्कृति मंगलवार दोपहर 1 बजे रोमानिया के एयरपोर्ट पर पहुंच गई थी। चार से पांच घंटे बाहर की खड़ी रही। अंदर पहुंचने पर भी काफी समय लगा। करीब दस बजे तक वहां खाने नहीं मिला। रात दस बजे अधिकारियों की तरफ से खाना दिया गया। एयरपोर्ट पर खाना था, लेकिन ज्यादा विकल्प नहीं थे। सरकार को इसमें सुधार करना चाहिए। वहीं शेल्टर होम में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।