राष्ट्रीय बालिका दिवस: देखे बड़े सपने, भरी ऊंची उड़ान... किसी ने थामा बल्ला तो किसी ने अखाड़े मे आजमाए दांव
देश में हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। इस बार 14वां राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जा रहा है। राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का उद्देश्य देश की बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ ही उन्हें बराबरी का हक दिलाना है।
विस्तार
ग्रेटर नोएडा की प्लुमेरिया गार्डन एस्टेट सोसाइटी की रहने वाली पार्श्वी चोपड़ा को 11 साल की उम्र में दादा ने बल्ला पकड़ाया था, लेकिन उसको गेंदबाजी करना ज्यादा पसंद था। पार्श्वी ने उसी पर मेहनत की और आज अंडर-19 टी-20 महिला विश्व कप में भारत की तरफ से खेल रही हैं। उसकी सफलता ने जिले के साथ देश की अन्य लड़कियों के लिए एक मिसाल पेश की है।
पार्श्वी का परिवार मूलरूप से बुलंदशहर के सिकंदराबाद का रहने वाला है। परिवार काफी समय से ग्रेटर नोएडा में रह रहा है। पार्श्वी के दादा परशुराम चोपड़ा जोनल स्तर के क्रिकेट खिलाड़ी रह चुके हैं। पिता भी क्रिकेट खेलते थे। उन्हीं को देखकर पार्श्वी की क्रिकेट में दिलचस्पी बढ़ गई। इस पर दादा ने उसे बल्ला थमा दिया और किट लाकर दी, तब पार्श्वी की उम्र 11 वर्ष थी।
शुरुआत में पार्श्वी घर पर ही क्रिकेट खेलती थी, बाद में दादा ने क्रिकेट कोचिंग लगा दी। पार्श्वी को कोचिंग ले जाने की जिम्मेदारी पिता को दी। एक साल प्रशिक्षण के बाद पार्श्वी ने यूपी की अंडर-14 टीम का ट्रायल दिया, लेकिन चयन नहीं हो सका। उससे उसकी उम्मीद टूट गई लेकिन परिजनों ने हौसला बढ़ाया। 13 साल की उम्र में पार्श्वी ने फिर ट्रायल दिया तो उसका अंडर-14 टीम में चयन हो गया। एक वर्ष बाद वह अंडर-16 टीम का हिस्सा बनी। साथ ही अंडर-19 टीम के कैंप में भी हिस्सा लेती थी। पिछले साल पार्श्वी ने यूपी की अंडर-19 टीम के साथ भारत की अंडर-19 टीम में भी जगह बना ली। अब वह भारतीय टीम के साथ दक्षिण अफ्रीका में अंडर-19 महिला टी-20 विश्वकप खेल रही हैं।
शेन वार्न की वीडियो देखती थी पार्श्वी
पार्श्वी ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर शेन वार्न की गेंदबाजी की वीडियो यूट्यूब पर देखती थी। वीडियो देख-देखकर लेग स्पिन गेंदबाजी के गुर सीखे। जिनका वह नेट्स पर अभ्यास करती थी। गेंदबाजी के दौरान उसकी कलाई में सूजन आ गई थी, लेकिन उसने हार नहीं मानी और गेंदबाजी जारी रखी। अब वह गेंदबाजी में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। विश्व कप में छह विकेट ले चुकी हैं। श्रीलंका के खिलाफ चार ओवर में पांच रन देकर चार विकेट चटकाए।
कुश्ती में रौनक नागर दिखा रही दमखम
बंबावड़ गांव निवासी रौनक नागर छोटी सी उम्र में कुश्ती की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपना दमखम दिखा रही हैं। अब तक वह छह राष्ट्रीय प्रतियोगिता खेल चुकी हैं, जहां तीन स्वर्ण समेत छह पदक हासिल किया है। बहरीन में हुई एशियन चैंपियनशिप में रजत जीता था। अब वह खेलो इंडिया के यूथ गेम्स की तैयारी कर रही हैं।
रौनक की कहानी दंगल फिल्म से काफी मिलती है। पिता दीपक नागर ने बताया कि वह पढ़ने में अच्छी नहीं थी, लेकिन उसमें लड़कों जैसी ताकत थी। जिसे देखकर कुश्ती का प्रशिक्षण दिलाना शुरू किया। एक साल धूममानिकपुर स्थित कॉलेज में प्रशिक्षण लिया। वहां सुविधा अच्छी नहीं होने के कारण रौनक और उसकी छोटी बहन रिया को लेकर दिल्ली आ गए। पिता दिसंबर, 2019 से दिल्ली में किराए का मकान लेकर बेटियों के साथ रह रहे हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य गांव में रहते हैं। दिल्ली में प्रशिक्षण ले रही रौनक ने नेशनल चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण और तीन रजत पदक जीते हैं। अब उसका लक्ष्य वर्ष 2028 के ओलंपिक गेम्स पर है। उससे पहले कॉमनवेल्थ गेम्स, विश्व चैंपियनशिप और खेलो इंडिया के यूथ गेम्स पर ध्यान है।
12वीं सीबीएसई साइंस में देशभर में वैष्णवी रहीं अव्वल
डीपीएस ग्रेनो की वैष्णवी जैसवाल ने वर्ष 2021-22 में सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में साइंस स्ट्रीम में 500 में से 499 अंक हासिल कर 99.8 प्रतिशत लेकर देशभर में प्रथम स्थान हासिल किया था। नीट में भी बाजी मारते हुए वैष्णवी वर्तमान में एमबीबीएस कर रही हैं।
दसवीं में वैष्णवी कापसे ने देश में नाम किया रोशन
वर्ष 2021-22 की हाईस्कूल परीक्षा में वैष्णवी विनोद कापसे ने 500 में से 500 नंबर हासिल करते हुए सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। वह दिल्ली पब्लिक स्कूल ग्रेटर नोएडा की छात्रा हैं। इसके अलावा वह कई खेलों में भी हिस्सा लेकर शहर का नाम रोशन कर रही हैं।