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Noida News: ग्रेप-2 से हवाई अड्डे को जोड़ने वाली सड़कों के निर्माण पर पड़ेगा असर

Tue, 21 Oct 2025 09:35 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 21 Oct 2025 09:35 PM IST
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Grape-2 will affect the construction of roads connecting the airport.
-ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे इंटरचेंज, फिल्म सिटी के पास रैंप समेत कार्य होंगे प्रभावित
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माई सिटी रिपोर्टर
यमुना सिटी। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शुरू होने के साथ-साथ इसे जोड़ने के लिए चल रही सड़क परियोजनाओं का भी तेजी से निर्माण कार्य चल रहा है। अब दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप-2) के लगने से धूल-मिट्टी के बचाव के चलते इनके निर्माण की रफ्तार पर ब्रेक लग जाएगा। इन परियोजनाओं में सड़क बनाने में धूल-मिट्टी उड़ने के खतरे के कारण रफ्तार पर असर पड़ सकता है। इनमें कई बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

यमुना सिटी क्षेत्र में मंगलवार को प्रदूषण का स्तर ऑरेंज जोन में लगभग 282 दर्ज किया गया। दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 302 पहुंचने के साथ-साथ रेड जोन में पहुंच गया। ऐसे में एनजीटी की ओर से ग्रेप-2 के प्रतिबंधों को लागू कर दिया गया है। ग्रैप-2 लागू होने पर निर्माण कार्यों पर सभी तरह के निर्माण और विध्वंस कार्य रोक दिए जाते हैं, क्योंकि इससे धूल और वायुमंडल में कणों का प्रदूषण बढ़ता है।
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नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में तो लगभग फिनिशिंग वर्क का कार्य बचा हुआ है। हालांकि, एयरपोर्ट पर पहुंचने के लिए कई बड़ी सड़क परियोजनाओं का निर्माण कार्य चल रहा है। इनमें नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को हरियाणा के फरीदाबाद से जोड़ने के लिए 31.4 किलोमीटर का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके अलावा ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे को यमुना एक्सप्रेस-वे जोड़ने के लिए बनाया जा रहा इंटरचेंज, यमुना सिटी के सेक्टर-21ए फिल्म सिटी के पास बनाया जा रहा रैंप और 60 मीटर रोड का काम पर भी पड़ेगा असर पड़ेगा। इसके अलावा लंबे समय से रुका हुआ मंझावली पुल प्रोजेक्ट में सड़क निर्माण के कार्य में निर्माण सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में ग्रेप-2 से निर्माण कार्य तेजी से करने में बाधा आ सकती है।
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कुछ शर्तों पर चल सकेंगे निर्माण कार्य
ग्रेप-2 के प्रतिबंधों में कुछ जरूरी निर्माण कार्य के लिए सशर्त कार्य करने की छूट देने के प्रावधान हैं। ग्रेप-2 के प्रतिबंधों के तहत धूल उड़ाने से बचने के लिए लगातार जल का छिड़काव, निर्माण स्थल पर धूल उड़ने से बचाने के लिए नेट लगाने समेत उपाय करने पर निर्माण कार्य में छूट का प्रावधान है। अब देखना यह है कि संबंधित एजेंसियां या ठेकेदार इनका कितना पालन करते हैं।
प्रदूषण का स्तर अधिक बढ़ा तो पूरी तरह निर्माण कार्य पर होगी पाबंदी
एनजीटी के नियमों के अनुसार यदि वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 के पार चला जाता है तो ग्रेप-3 के अनुसार लगभग सभी तरह के निर्माण कार्यों (अस्पताल या बेहद जरूरी निर्माण कार्य को छोड़कर) पर प्रतिबंध लगाया जाता है। यदि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण में इजाफा हुआ तो निर्माण कार्य में अधिक बाधाएं आएंगी।

एनजीटी के नियमों के अनुसार ग्रेप-2 के अंतर्गत प्रतिबंधों का पालन करते हुए तैयारी की गई है। ऐसे में नियमों का पालन करते हुए निर्माण कार्य जारी रखने का प्रयास किया जाएगा।
शफी मोहम्मद, सीजीएम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण

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