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Noida News: सड़कों की धूल का समाधान निकालने में जुटी सरकार
सार
नई दिल्ली में डीपीसीसी और 15 एजेंसियों ने 170 से अधिक इंजीनियरों को धूल प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रशिक्षित किया। सड़कों के रीडिजाइन व सर्वे कार्यशाला का आयोजन हुआ। इससे प्रदूषण नियंत्रण व स्थायी विकास की उम्मीद जगी है।
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विस्तार
डीपीसीसी ने 15 सिविक एजेंसियों के साथ की कार्यशाला
170 से ज्यादा इंजीनियर और टेक्नीशियन को दी गई ट्रेनिंग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
सड़कों की धूल दिल्लीवासियों की सांसों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत है। ऐसे में दिल्ली सरकार ने इसका समाधान खोजने के लिए कमर कस ली है। शुक्रवार को डीपीसीसी ने ब्रेथ ऑफ चेंज कार्यशाला आयोजित की। इसमें वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम), राहगिरी फाउंडेशन ने एमसीडी, डीडीए, एनडीएमसी, पुलिस, एनएचएआई, सीपीडब्ल्यूडी, पीडब्ल्यूडी, डीएमआरसी, डीएसआईआईडीसी, डीजेपी, बीएसईएस, टीपीडीडीएल, आईजीएल सहित 15 एजेंसियों के 170 से अधिक इंजीनियर और टेक्नीशियन को धूल प्रदूषण से निपटने की ट्रेनिंग दी गई।
कार्यशाला में समझा गया कि कैसे सड़कों के री-डिजाइन से धूल प्रदूषण कम कैसे लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। सड़कों के इंटरसेक्शन, खाली जमीन और जल स्रोतों की भौगोलिक व भौतिक स्थिति के विस्तृत अध्ययन के लिए मंथन हुआ। इसके अलावा जमीन की सतह की जांच, पानी की सप्लाई, सीवरेज, ड्रेनेज, बिजली, स्ट्रीट लाइटिंग व सीसीटीवी आदि के लिए सर्वे होगा। पेड़-पौधों, जैव विविधता और खास प्राकृतिक इलाकों की पहचान होगी। फिर सीएक्यूएम की गाइडलाइंस के लिहाज से सड़कों के रीडिजाइन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनेगी।
सीएक्यूएम रिसोर्स लैब की अहम भूमिका
अधिकारियों ने बताया कि सीएक्यूएम रिसोर्स लैब ने खास भूमिका निभाई है। तकनीकी विशेषज्ञों को डिजाइन ड्रॉइंग बनाने, पेश करने और एनसीआर के शहरों के इंजीनियरों व हितधारकों को ट्रेनिंग देने के लिए तैयार किया। यह लैब आगे भी एनसीआर के शहरों को स्थायी रोड डेवलपमेंट मॉडल अपनाने के लिए मदद करेगी।
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सीएक्यूएम से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली : सिरसा
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली सरकार को इस पहल पर सीएक्यूएम से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। प्रदूषण घटाने के लिए ये कार्यशाला महत्वपूर्ण रही। सड़कों के स्थायी विकास परियोजना में धूल नियंत्रण के साथ कचरा जलाने व गाड़ियों के धुएं को कम करने पर जोर दिया जाएगा।
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170 से ज्यादा इंजीनियर और टेक्नीशियन को दी गई ट्रेनिंग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
सड़कों की धूल दिल्लीवासियों की सांसों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत है। ऐसे में दिल्ली सरकार ने इसका समाधान खोजने के लिए कमर कस ली है। शुक्रवार को डीपीसीसी ने ब्रेथ ऑफ चेंज कार्यशाला आयोजित की। इसमें वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम), राहगिरी फाउंडेशन ने एमसीडी, डीडीए, एनडीएमसी, पुलिस, एनएचएआई, सीपीडब्ल्यूडी, पीडब्ल्यूडी, डीएमआरसी, डीएसआईआईडीसी, डीजेपी, बीएसईएस, टीपीडीडीएल, आईजीएल सहित 15 एजेंसियों के 170 से अधिक इंजीनियर और टेक्नीशियन को धूल प्रदूषण से निपटने की ट्रेनिंग दी गई।
कार्यशाला में समझा गया कि कैसे सड़कों के री-डिजाइन से धूल प्रदूषण कम कैसे लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। सड़कों के इंटरसेक्शन, खाली जमीन और जल स्रोतों की भौगोलिक व भौतिक स्थिति के विस्तृत अध्ययन के लिए मंथन हुआ। इसके अलावा जमीन की सतह की जांच, पानी की सप्लाई, सीवरेज, ड्रेनेज, बिजली, स्ट्रीट लाइटिंग व सीसीटीवी आदि के लिए सर्वे होगा। पेड़-पौधों, जैव विविधता और खास प्राकृतिक इलाकों की पहचान होगी। फिर सीएक्यूएम की गाइडलाइंस के लिहाज से सड़कों के रीडिजाइन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनेगी।
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सीएक्यूएम रिसोर्स लैब की अहम भूमिका
अधिकारियों ने बताया कि सीएक्यूएम रिसोर्स लैब ने खास भूमिका निभाई है। तकनीकी विशेषज्ञों को डिजाइन ड्रॉइंग बनाने, पेश करने और एनसीआर के शहरों के इंजीनियरों व हितधारकों को ट्रेनिंग देने के लिए तैयार किया। यह लैब आगे भी एनसीआर के शहरों को स्थायी रोड डेवलपमेंट मॉडल अपनाने के लिए मदद करेगी।
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सीएक्यूएम से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली : सिरसा
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली सरकार को इस पहल पर सीएक्यूएम से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। प्रदूषण घटाने के लिए ये कार्यशाला महत्वपूर्ण रही। सड़कों के स्थायी विकास परियोजना में धूल नियंत्रण के साथ कचरा जलाने व गाड़ियों के धुएं को कम करने पर जोर दिया जाएगा।