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जिले में बढ़ते जल-वायु प्रदूषण पर शासन सख्त
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नोएडा। जिले में बढ़ते जल और वायु प्रदूषण पर शासन भी सख्ती बरत रहा है। प्रदूषण रोकने के उपायों की तैयारियों को शासन के अधिकारी भी परख रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को यूपी पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह नोएडा पहुंचे और सभी विभागों को एक मंच पर बुलाकर समीक्षा की। इसका मकसद बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाना रहा। सेक्टर-6 स्थित प्राधिकरण कार्यालय में आयोजित बैठक में अपर मुख्य सचिव के अलावा प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी, प्राधिकरण के अन्य अधिकारी, मेरठ मंडल, खोड़ा नगर पालिका, जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग, एनजीटी, पुलिस विभाग के अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे।
सभी अधिकारियों ने करीब दो घंटे की बैठक में प्रदूषण से निपटने की तैयारियां बताईं। अपर मुख्य सचिव ने खास तौर पर एनजीटी के नियमों का सख्ती से पालन कराने को लेकर सभी अधिकारियों को आगाह किया। बैठक में कोंडली नाले के जल प्रदूषण को लेकर भी बातचीत हुई। इसके प्रदूषण के स्तर को कम करने को लेकर प्राधिकरण क्या कर रहा है। इसकी रिपोर्ट मांगी गई। इसके जरिये यमुना में गंदगी पहुंच रही है। लिहाजा, इसे काफी गंभीर विषय माना गया। वहीं, कारखानों से निकलने वाले गंदे पानी के निपटान को लेकर कार्ययोजना भी मांगी गई। इस मामले में सेक्टर-137 निवासी अभिष्ट गुप्ता काफी दिनों से लड़ाई लड़ रहे हैं।
प्राधिकरण के अधिकारियों ने अपर मुख्य सचिव के सामने अपनी तैयारियां गिनाई। अधिकारियों का कहना है कि सेक्टर-123 और 168 में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का काम चल रहा है। इसके अलावा पुराने एसटीपी की क्षमता बढ़ाने की योजना है। सभी बिल्डर सोसाइटियों में एसटीपी को क्रियाशील कराने के उपाय किए जा रहे हैं। इसके अलावा शहर में वेटलैंड बनाकर पर्यावरण के संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं।
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प्राधिकरण कर रहा कार्रवाई
प्राधिकरण की ओर से बताया गया कि जल और वायु प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए संबंधित एजेंसियों को अलर्ट किया गया है जहां भी मानकों को तोड़ते हुए पाया जा रहा है वहां जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है। एनजीटी के नियमों का पालन करने को जागरूक किया जा रहा है। शहर में पानी के छिड़काव कराए जा रहे हैं, ताकि प्रदूषण का स्तर कम हो सके।
रेड जोन में नोएडा, ऑरेंज में ग्रेटर नोएडा
वायु प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा ऑरेंज जोन में है, जबकि नोएडा रेड जोन में पहुंच चुका है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों का कहना है कि हवा चलने से प्रदूषण पर असर होगा। सोमवार को नोएडा और ग्रेटर नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) रेड जोन में पहुंच गया था, लेकिन मंगलवार को ग्रेनो के एक्यूआई में काफी सुधार हुआ। ग्रेनो का एक्यूआई 276 रहा जो ऑरेंज जोन में आता है, लेकिन नोएडा की हवा में कोई सुधार नहीं हुआ और एक्यूआई 303 यानी रेड जोन में बना हुआ है। काफी समय बाद ऐसा हुआ है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा के एक्यूआई में काफी अंतर देखने को मिला है। नोएडा दिल्ली के साथ एनसीआर का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। पहले नंबर पर गाजियाबाद (334) और दूसरे नंबर पर फरीदाबाद (306) रहे।
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सभी अधिकारियों ने करीब दो घंटे की बैठक में प्रदूषण से निपटने की तैयारियां बताईं। अपर मुख्य सचिव ने खास तौर पर एनजीटी के नियमों का सख्ती से पालन कराने को लेकर सभी अधिकारियों को आगाह किया। बैठक में कोंडली नाले के जल प्रदूषण को लेकर भी बातचीत हुई। इसके प्रदूषण के स्तर को कम करने को लेकर प्राधिकरण क्या कर रहा है। इसकी रिपोर्ट मांगी गई। इसके जरिये यमुना में गंदगी पहुंच रही है। लिहाजा, इसे काफी गंभीर विषय माना गया। वहीं, कारखानों से निकलने वाले गंदे पानी के निपटान को लेकर कार्ययोजना भी मांगी गई। इस मामले में सेक्टर-137 निवासी अभिष्ट गुप्ता काफी दिनों से लड़ाई लड़ रहे हैं।
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प्राधिकरण के अधिकारियों ने अपर मुख्य सचिव के सामने अपनी तैयारियां गिनाई। अधिकारियों का कहना है कि सेक्टर-123 और 168 में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का काम चल रहा है। इसके अलावा पुराने एसटीपी की क्षमता बढ़ाने की योजना है। सभी बिल्डर सोसाइटियों में एसटीपी को क्रियाशील कराने के उपाय किए जा रहे हैं। इसके अलावा शहर में वेटलैंड बनाकर पर्यावरण के संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं।
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प्राधिकरण कर रहा कार्रवाई
प्राधिकरण की ओर से बताया गया कि जल और वायु प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए संबंधित एजेंसियों को अलर्ट किया गया है जहां भी मानकों को तोड़ते हुए पाया जा रहा है वहां जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है। एनजीटी के नियमों का पालन करने को जागरूक किया जा रहा है। शहर में पानी के छिड़काव कराए जा रहे हैं, ताकि प्रदूषण का स्तर कम हो सके।
रेड जोन में नोएडा, ऑरेंज में ग्रेटर नोएडा
वायु प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा ऑरेंज जोन में है, जबकि नोएडा रेड जोन में पहुंच चुका है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों का कहना है कि हवा चलने से प्रदूषण पर असर होगा। सोमवार को नोएडा और ग्रेटर नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) रेड जोन में पहुंच गया था, लेकिन मंगलवार को ग्रेनो के एक्यूआई में काफी सुधार हुआ। ग्रेनो का एक्यूआई 276 रहा जो ऑरेंज जोन में आता है, लेकिन नोएडा की हवा में कोई सुधार नहीं हुआ और एक्यूआई 303 यानी रेड जोन में बना हुआ है। काफी समय बाद ऐसा हुआ है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा के एक्यूआई में काफी अंतर देखने को मिला है। नोएडा दिल्ली के साथ एनसीआर का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। पहले नंबर पर गाजियाबाद (334) और दूसरे नंबर पर फरीदाबाद (306) रहे।