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कपास की सरकारी खरीद नहीं होने से किसान बेहाल

Fri, 18 Sep 2020 11:33 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 18 Sep 2020 11:33 PM IST
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Government not procuring cotton in Nuh
नूंह। राज्य सरकार भले ही किसानों को फसलों का उचित मूल्य देने की बात करती हो, लेकिन जिले के किसानों को सरकारी खरीद का लाभ नहीं मिल रहा है। मंडियों में इस बार भी कपास की सरकारी खरीद अब तक शुरू नहीं की गई है। व्यापारी फसलों को सस्ते दामों पर खरीद रहे हैं। इसके साथ ही वजन में गड़बड़ी करने के मामले भी सामने आ रहे हैं।
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आरोप है कि मार्केट कमेटी के अधिकारी समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018-19 के लिए कपास का 5110 और वर्ष 2020-21 के 5515 रुपये प्रति क्विंटल दाम तय किया था। लोगों को उम्मीद थी की इस बार उनको ज्यादा मुनाफा होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस कारण किसान मंडी के व्यापारियों को कम दामों में फसल बेचने के लिए मजबूर हैं।
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जिला मुख्यालय स्थित नई अनाजमंडी में व्यापारी फसलों को कम दामों में खरीद रहे हैं। इससे किसानों का शोषण हो रहा है। सरकारी खरीद होने से किसानों को और अधिक लाभ मिल सकता है।
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- हाजी अलीमोहम्मद, किसान
अनाजमंडी में कई आढ़तियों द्वारा अभी भी वर्षों पुराने कांटे पर वजन किया जा रहा है। साथ ही फसल के गीले होने का बहाना बनाकर उचित दाम नहीं दिया जा रहा है।
- हाजी अब्दुल्ला, सरपंच
जिले के अधिकतर लोग कृषि पर निर्भर हैं। देश के सबसे पिछड़े जिलों की श्रेणी में नूंह आता है। ऐसे में सरकार को यहां के किसानों पर ध्यान देने की जरूरत है।
- डॉ. मौलाना रफीक आजाद, राष्ट्रीय प्रभारी भारतीय किसान यूनियन
सरकार हमारी मांगों को नहीं मान रही है। हाल में तीन अध्यादेश लाए गए हैं। कपास की खरीद सहित अन्य कई मांगें हैं। इससे परेशान किसान और व्यापारी हड़ताल करेंगे।

- गिर्राज प्रधान, अनाजमंडी नूंह
किसानों की इस समस्या को लेकर मार्केट कमेटी द्वारा उपायुक्त को पत्र लिखा गया है। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया की टीम को भी पत्र लिखा गया है। टीम ने अनाजमंडी का दौरा किया है। यहां पर किसानों की फसल गीली पाई गई है। जिले में कपास की आवक कम होने के कारण यहां पर सरकारी खरीद को मना किया है। टीम द्वारा किसानों को उनकी फसल को पलवल ले जाने के लिए कहा गया है। पलवल में किसानों को सरकारी दाम का फायदा मिल सकता है।
- कृष्ण कुमार, सचिव मार्केट कमेटी नूंह
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