{"_id":"5f22c0d28ebc3e9ffb2eccb8","slug":"gmda-warter-harvesting-noida-news-noi5266696178","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो साल में भी 520 जलस्रोत का अस्तित्व नहीं संवार पाया जीएमडीए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो साल में भी 520 जलस्रोत का अस्तित्व नहीं संवार पाया जीएमडीए
विज्ञापन
दो साल में भी 520 जलस्रोत का अस्तित्व नहीं संवार पाया जीएमडीए
गुरुग्राम (पवन कुमार सेठी)। जिले में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के गठन को दो साल बीत गए हैं। इस कार्यकाल के दौरान सर्वे कर 935 जलस्रोतों की पहचान की। इसमें 520 जलस्रोत ऐसे हैं जिनका अस्तित्व खत्म हो चुका है। इन्हें संवारने के लिए जीएमडीए दो साल से योजना बना रहा है, लेकिन आज तक एक भी योजना धरातल पर लागू नहीं हुई है। यही कारण है कि हर बार बरसात का पानी संचयित न होकर व्यर्थ नाले में बह जाता है।
जीएमडीए गठन के बाद जल संचय करने व भूजल स्तर बढ़ाने के लिए सर्वे करवाया गया था। इस दौरान साल 1956 के रिकॉर्ड व अब के रिकॉर्ड का मिलान किया गया। पता लगा कि जिले में 935 जलस्रोत हैं। करीब 520 जलस्रोत ऐसे पाए गए जिनका अस्तित्व या तो खत्म हो चुका है अथवा खत्म होने के कगार पर है। लोगों ने इन जलस्रोतों पर कब्जा तक कर लिया है। इन्हें दोबारा अस्तित्व में लाने के लिए विभाग ने योजनाएं तैयार की। अरावली में चैकडैम बनाने समेत पहाड़ के नीचे जलस्रोत बनाने की भी योजनाएं बनाई गई। इसके साथ ही बरसाती नालों में जगह-जगह बोरवेल करके भूजल का स्तर बढ़ाने की भी योजनाएं तैयार की गई। यह योजना दो साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई। हर साल मानसून में होने वाली बरसात के दौरान लाखों लीटर पानी संचयित नहीं हो पाता। ऐसे में यह व्यर्थ नाले में बह जाता है।
तालाब कमेटी के होंगे अधीन
जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वीएस कुंडू ने बताया कि हरियाणा सरकार ने जलस्रोतों का अस्तित्व दोबारा जीवित करने के लिए तालाब कमेटी बनाई है। इन तालाबों की सूची कमेटी को दी जाएगी। इस सर्वे के आधार पर कमेटी आगे का कार्य करेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
गुरुग्राम (पवन कुमार सेठी)। जिले में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के गठन को दो साल बीत गए हैं। इस कार्यकाल के दौरान सर्वे कर 935 जलस्रोतों की पहचान की। इसमें 520 जलस्रोत ऐसे हैं जिनका अस्तित्व खत्म हो चुका है। इन्हें संवारने के लिए जीएमडीए दो साल से योजना बना रहा है, लेकिन आज तक एक भी योजना धरातल पर लागू नहीं हुई है। यही कारण है कि हर बार बरसात का पानी संचयित न होकर व्यर्थ नाले में बह जाता है।
जीएमडीए गठन के बाद जल संचय करने व भूजल स्तर बढ़ाने के लिए सर्वे करवाया गया था। इस दौरान साल 1956 के रिकॉर्ड व अब के रिकॉर्ड का मिलान किया गया। पता लगा कि जिले में 935 जलस्रोत हैं। करीब 520 जलस्रोत ऐसे पाए गए जिनका अस्तित्व या तो खत्म हो चुका है अथवा खत्म होने के कगार पर है। लोगों ने इन जलस्रोतों पर कब्जा तक कर लिया है। इन्हें दोबारा अस्तित्व में लाने के लिए विभाग ने योजनाएं तैयार की। अरावली में चैकडैम बनाने समेत पहाड़ के नीचे जलस्रोत बनाने की भी योजनाएं बनाई गई। इसके साथ ही बरसाती नालों में जगह-जगह बोरवेल करके भूजल का स्तर बढ़ाने की भी योजनाएं तैयार की गई। यह योजना दो साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई। हर साल मानसून में होने वाली बरसात के दौरान लाखों लीटर पानी संचयित नहीं हो पाता। ऐसे में यह व्यर्थ नाले में बह जाता है।
विज्ञापन
तालाब कमेटी के होंगे अधीन
जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वीएस कुंडू ने बताया कि हरियाणा सरकार ने जलस्रोतों का अस्तित्व दोबारा जीवित करने के लिए तालाब कमेटी बनाई है। इन तालाबों की सूची कमेटी को दी जाएगी। इस सर्वे के आधार पर कमेटी आगे का कार्य करेगी।
विज्ञापन