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Noida News: जीबीयू बनेगा स्टार्टअप हब, नीति आयोग से पांच साल में मिलेंगे 10 करोड़ रुपये
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- अटल इन्क्यूबेशन सेंटर को मिली स्वीकृति, 80 से अधिक स्टार्टअप को मिलेगा विस्तार, युवाओं को रोजगार देने वाला बनाने पर फोकस
फोटो
अंकुर त्रिपाठी
ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) को नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मिली है। विश्वविद्यालय के अटल इन्क्यूबेशन सेंटर (एआईसी-जीबीयू) को नीति आयोग से अगले पांच वर्षों में 10 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की स्वीकृति मिली है। इस सहायता से विश्वविद्यालय में स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति मिलेगी और युवा उद्यमियों को अपने नवाचारों को सफल कारोबार में बदलने के लिए बेहतर संसाधन, मार्गदर्शन और निवेश के अवसर उपलब्ध होंगे। करीब 30 हजार वर्गफुट क्षेत्र में स्थापित एआईसी-जीबीयू वर्तमान में 80 से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप को इन्क्यूबेशन सुविधाएं प्रदान कर रहा है। इसके अलावा 100 से अधिक स्टार्टअप आइडिएशन चरण में हैं। यहां छात्रों, शोधार्थियों, पूर्व छात्रों और युवा उद्यमियों को तकनीकी सहायता, मेंटरशिप, प्रशिक्षण, व्यवसाय विकास और निवेशकों से जोड़ने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा-
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार स्टार्टअप इंडिया, स्टार्ट इन यूपी और एमएसएमई जैसी योजनाओं के माध्यम से स्टार्टअप को वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। इन्क्यूबेशन सेंटर में एडवांस्ड कंप्यूटिंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), हेल्थकेयर, फूड टेक्नोलॉजी, एग्रीटेक, पर्यावरण एवं ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों के नवाचार आधारित स्टार्टअप को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही स्टार्टअप के बिजनेस मॉडल को मजबूत बनाने और निवेशकों तक पहुंच सुनिश्चित करने पर भी जोर है। विश्वविद्यालय ने अंतिम स्वीकृति के बाद इन्क्यूबेशन सेंटर के विस्तार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), प्रबंधक और अन्य पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, जिससे केंद्र की गतिविधियों का विस्तार किया जा सके।
बड़ी संख्या में युवा भी इस केंद्र से जुड़ रहे-
कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। वहीं कुलसचिव प्रो. चंदर कुमार सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में स्टार्टअप संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है और बड़ी संख्या में बाहरी युवा भी इस केंद्र से जुड़ रहे हैं। उनका कहना है कि नई वित्तीय सहायता से छात्रों को विश्वस्तरीय इन्क्यूबेशन सुविधाएं, उद्योगों का सहयोग और निवेशकों तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
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अंकुर त्रिपाठी
ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) को नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मिली है। विश्वविद्यालय के अटल इन्क्यूबेशन सेंटर (एआईसी-जीबीयू) को नीति आयोग से अगले पांच वर्षों में 10 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की स्वीकृति मिली है। इस सहायता से विश्वविद्यालय में स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति मिलेगी और युवा उद्यमियों को अपने नवाचारों को सफल कारोबार में बदलने के लिए बेहतर संसाधन, मार्गदर्शन और निवेश के अवसर उपलब्ध होंगे। करीब 30 हजार वर्गफुट क्षेत्र में स्थापित एआईसी-जीबीयू वर्तमान में 80 से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप को इन्क्यूबेशन सुविधाएं प्रदान कर रहा है। इसके अलावा 100 से अधिक स्टार्टअप आइडिएशन चरण में हैं। यहां छात्रों, शोधार्थियों, पूर्व छात्रों और युवा उद्यमियों को तकनीकी सहायता, मेंटरशिप, प्रशिक्षण, व्यवसाय विकास और निवेशकों से जोड़ने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा-
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार स्टार्टअप इंडिया, स्टार्ट इन यूपी और एमएसएमई जैसी योजनाओं के माध्यम से स्टार्टअप को वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। इन्क्यूबेशन सेंटर में एडवांस्ड कंप्यूटिंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), हेल्थकेयर, फूड टेक्नोलॉजी, एग्रीटेक, पर्यावरण एवं ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों के नवाचार आधारित स्टार्टअप को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही स्टार्टअप के बिजनेस मॉडल को मजबूत बनाने और निवेशकों तक पहुंच सुनिश्चित करने पर भी जोर है। विश्वविद्यालय ने अंतिम स्वीकृति के बाद इन्क्यूबेशन सेंटर के विस्तार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), प्रबंधक और अन्य पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, जिससे केंद्र की गतिविधियों का विस्तार किया जा सके।
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बड़ी संख्या में युवा भी इस केंद्र से जुड़ रहे-
कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। वहीं कुलसचिव प्रो. चंदर कुमार सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में स्टार्टअप संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है और बड़ी संख्या में बाहरी युवा भी इस केंद्र से जुड़ रहे हैं। उनका कहना है कि नई वित्तीय सहायता से छात्रों को विश्वस्तरीय इन्क्यूबेशन सुविधाएं, उद्योगों का सहयोग और निवेशकों तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
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