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फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा, 122 मामले रडार पर

Fri, 04 Oct 2019 01:51 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 04 Oct 2019 01:51 AM IST
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Fraud in bayers rejistri and 122 case on radar
फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा, 122 मामले रडार पर
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नोएडा। फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। यह फर्जीवाड़ा खुद प्राधिकरण ने ही पकड़ा है, लेकिन इसमें कौन-कौन शामिल है यह जांच का विषय है। दो साल में हुईं 122 रजिस्ट्री रडार पर हैं।
दरअसल, जब भी किसी फ्लैट खरीदार की रजिस्ट्री नोएडा में होती है तो बिल्डर और प्राधिकरण रजिस्ट्री करता है। बिल्डर, प्राधिकरण और खरीदार के बीच त्रिपक्षीय सबलीज डीड कराई जाती है। यही डीड खरीदार के पक्ष में होती है। इस पर बिल्डर, खरीदार और प्राधिकरण के अधिकारी के हस्ताक्षर होते हैं तभी रजिस्ट्री हो पाती है, लेकिन जून में प्राधिकरण के सामने एक मामला सामने आया जिसमें बिल्डर और खरीदार के मामले में जो त्रिपक्षीय सबलीज डीड कराई गई, उसमें प्राधिकरण के अधिकृत अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर थे। प्राधिकरण के पास खरीदार की त्रिपक्षीय सबलीज डीड के लिए कोई फाइल नहीं आई। उस दौरान संबंधित थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। प्राधिकरण ने इसके बाद ऐसे मामलों को खंगालने का काम शुरू किया। बाद में पता चला कि दो वर्ष में ऐसे 122 मामले हैं। इन सभी को जून वाली एफआईआर में प्राधिकरण ने जोड़ दिया है।
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बिना तीनों पक्ष के हस्ताक्षर के नहीं होती रजिस्ट्री
नोएडा में प्राधिकरण की ओर से बिल्डर को जमीन का आवंटन किया जाता है। इसके बाद बिल्डर फ्लैट बनाकर खरीदार की रजिस्ट्री करता है, लेकिन नियम के मुताबिक यहां प्राधिकरण को बिना शामिल किए रजिस्ट्री नहीं होती है।
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प्राधिकरण के फॉर्मेट पर बनती सबलीज डीड
प्राधिकरण की ओर से एक फॉर्मेट जारी किया जाता है, जिसे बिल्डर डाउनलोड कर उस पर सबलीज डीड का मैटर टाइप कराता है। इसके बाद बिल्डर और खरीदार के हस्ताक्षर और फोटो लगाए जाते हैं। फिर प्राधिकरण की ओर से हस्ताक्षर के लिए अधिकृत अधिकारी और उसकी भी फोटो लगती है। यह सब कुछ दस्तावेज लेकर प्राधिकरण की ओर से नामित कर्मचारी रजिस्ट्री विभाग में जाता है।
निलंबन की चल रही प्रक्रिया
प्रथमदृष्टया जो प्राधिकरण से रजिस्ट्री विभाग में डाक लेकर जाता है उस पर ही उंगली उठ रही है। लिहाजा, एक कर्मचारी के निलंबन की प्रक्रिया चल रही है। खबर लिखे जाने तक वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कर्मचारी की निलंबन की पुष्टि नहीं की गई।

प्राधिकरण की ओर से मामले की जांच में दो साल में ऐसे 122 केस सामने आए हैं, जहां बिना प्राधिकरण के अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर के त्रिपक्षीय सबलीज डीड कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। अब आगे यह पुलिस की जांच का विषय है।
राजेश कुमार, ओएसडी, नोएडा प्राधिकरण
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